एक महीने से कैंप लगाने का दावा, फिर भी 5 बच्चों की मौत! बैगा आदिवासी गांव में स्वास्थ्य व्यवस्था पर सवाल

छत्तीसगढ़ के कबीरधाम जिले के मध्यप्रदेश सीमा से लगे नंदनी कुमान गांव में पिछले कुछ महीनों के दौरान पांच बच्चों की अलग-अलग समय पर अज्ञात कारणों से मौत होने का मामला सामने आया है। वहीं, 15 कुपोषित बच्चों को एहतियातन पोषण पुनर्वास केंद्र (NRC) में भर्ती कराया गया है। स्वास्थ्य विभाग और महिला एवं बाल विकास विभाग की टीमें बच्चों की स्थिति का आकलन कर रही हैं। गांव में स्वास्थ्य शिविर लगाए जाने के दावों के बीच स्वास्थ्य सेवाओं की प्रभावशीलता पर सवाल उठ रहे हैं। कांग्रेस नेता महेश चंद्रवंशी और आदिवासी नेता कामू बैगा ने मामले में जवाबदेही और निष्पक्ष जांच की मांग की है। फिलहाल बच्चों की मौत के वास्तविक कारण स्पष्ट नहीं हुए हैं।

Oct 16, 2026 - 18:00
Oct 16, 2026 - 18:47
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एक महीने से कैंप लगाने का दावा, फिर भी 5 बच्चों की मौत! बैगा आदिवासी गांव में स्वास्थ्य व्यवस्था पर सवाल

UNITED NEWS OF ASIA. सौरभ नामदेव, कबीरधाम l छत्तीसगढ़ के कबीरधाम जिले से बैगा आदिवासी बच्चों के स्वास्थ्य को लेकर चिंताजनक मामला सामने आया है। मध्यप्रदेश की सीमा से लगे नंदनी कुमान गांव में पिछले कुछ महीनों के दौरान पांच बच्चों की अलग-अलग समय पर अज्ञात कारणों से मौत हो चुकी है। वहीं, 15 कुपोषित बच्चों को एहतियातन पोषण पुनर्वास केंद्र (NRC) में भर्ती कराया गया है। घटना के बाद स्वास्थ्य विभाग और महिला एवं बाल विकास विभाग की टीमें गांव में बच्चों की स्थिति का आकलन कर रही हैं। हालांकि, बच्चों की मौत के वास्तविक कारणों का अब तक स्पष्ट पता नहीं चल पाया है।

स्वास्थ्य शिविरों के दावों के बीच उठे सवाल

मामले में स्वास्थ्य विभाग की ओर से गांव में स्वास्थ्य शिविर लगाने और बच्चों की निगरानी करने की बात कही जा रही है। दूसरी ओर, एक महीने से शिविर लगाए जाने के दावे के बीच पांच बच्चों की मौत की घटनाओं ने स्वास्थ्य सेवाओं की प्रभावशीलता पर सवाल खड़े कर दिए हैं। सवाल उठ रहे हैं कि बच्चों के स्वास्थ्य की नियमित जांच, कुपोषण की समय पर पहचान और जरूरतमंद बच्चों को उपचार उपलब्ध कराने की व्यवस्था कितनी प्रभावी रही। इन सवालों के जवाब विभागीय रिकॉर्ड और जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेंगे।

28 सितंबर को भी उठाया गया था बैगा जनजाति के स्वास्थ्य का मुद्दा

इस मामले का एक महत्वपूर्ण पहलू यह है कि बैगा जनजाति के स्वास्थ्य को लेकर पहले भी चिंता जाहिर की गई थी। 28 सितंबर को जिला प्रशासन की सेवा पखवाड़ा प्रेस वार्ता के दौरान यूनाइटेड न्यूज ऑफ एशिया (UNA) के सीएमडी सौरभ नामदेव ने बैगा समुदाय के स्वास्थ्य और सीमावर्ती क्षेत्रों में रहने वाले परिवारों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने की आवश्यकता का मुद्दा उठाया था। इस दौरान उन्होंने मध्यप्रदेश के सीमावर्ती बालाघाट जिले में बैगा बच्चों की मौत से संबंधित खबरों का भी उल्लेख किया था। अब नंदनी कुमान में पांच बच्चों की मौत और 15 कुपोषित बच्चों के NRC में भर्ती होने के बाद स्वास्थ्य निगरानी की व्यवस्था पर चर्चा तेज हो गई है।

कांग्रेस नेता और आदिवासी समाज ने की जांच की मांग

बच्चों की मौत के मामले में कांग्रेस नेता महेश चंद्रवंशी ने स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए गंभीर लापरवाही के आरोप लगाए हैं। वहीं, आदिवासी नेता कामू बैगा ने शासन-प्रशासन से जवाबदेही तय करने और पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। हालांकि, मौतों के कारणों की पुष्टि नहीं हुई है, इसलिए किसी विभाग या व्यक्ति की जिम्मेदारी तय करने के लिए जांच के निष्कर्ष महत्वपूर्ण होंगे।

जांच के नतीजों पर टिकी नजरें

स्वास्थ्य विभाग की टीम गांव में जांच कर रही है जबकि महिला एवं बाल विकास विभाग बच्चों की स्थिति का आकलन कर रहा है। जिला महिला एवं बाल विकास अधिकारी आनंद तिवारी का पक्ष भी इस मामले में महत्वपूर्ण है। अब यह देखना होगा कि जांच में बच्चों की मौत के कारणों को लेकर क्या तथ्य सामने आते हैं और गांव में स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने के लिए कौन से कदम उठाए जाते हैं।

फिलहाल नंदनी कुमान में पांच बच्चों की मौत के कारण अज्ञात हैं। ऐसे में जरूरी है कि निष्पक्ष जांच के साथ प्रभावित परिवारों को आवश्यक सहायता मिले, कुपोषित बच्चों का समुचित उपचार हो और गांव के प्रत्येक बच्चे तक समय पर स्वास्थ्य सुविधाएं पहुंचाई जाएं।