धान खरीदी से पहले नए नियमों पर सियासी घमासान, कांग्रेस ने भाजपा सरकार पर किसानों और पटवारियों को परेशान करने का लगाया आरोप

छत्तीसगढ़ में धान खरीदी का समय नजदीक आने के बीच पटवारियों की मांगों और पीवी ऐप से गिरदावरी कार्य को लेकर सियासत तेज हो गई है। प्रदेश कांग्रेस कमेटी के मुख्य प्रवक्ता सुरेंद्र वर्मा ने भाजपा सरकार पर अव्यावहारिक नियम लागू करने, पटवारियों की समस्याओं की अनदेखी करने और किसानों को रकबा संशोधन तथा पंजीयन के लिए परेशान करने का आरोप लगाया है। कांग्रेस ने सरकार से पटवारियों की मांगों को तत्काल पूरा करने और धान खरीदी की व्यवस्था सुचारू बनाने की मांग की है। साथ ही चेतावनी दी है कि समस्याओं का समाधान नहीं होने पर पार्टी किसानों के हित में आंदोलन करेगी।

Oct 14, 2026 - 15:22
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धान खरीदी से पहले नए नियमों पर सियासी घमासान, कांग्रेस ने भाजपा सरकार पर किसानों और पटवारियों को परेशान करने का लगाया आरोप

UNITED NEWS OF ASIA. अमृतेश्वर सिंह, रायपुर l छत्तीसगढ़ में धान खरीदी का समय नजदीक आने के साथ ही पटवारियों की मांगों और गिरदावरी प्रक्रिया को लेकर राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। छत्तीसगढ़ प्रदेश कांग्रेस कमेटी ने पटवारियों की मांगों का समर्थन करते हुए भाजपा सरकार पर किसानों और राजस्व कर्मचारियों को परेशान करने का आरोप लगाया है। प्रदेश कांग्रेस कमेटी के मुख्य प्रवक्ता सुरेंद्र वर्मा ने कहा कि सरकार डिजिटल गवर्नेंस और पारदर्शी धान खरीदी के दावे कर रही है, लेकिन जमीनी स्तर पर पटवारियों को पर्याप्त संसाधन उपलब्ध कराए बिना नए नियमों के तहत काम करने का दबाव बनाया जा रहा है। कांग्रेस का आरोप है कि इसका सीधा असर किसानों के रकबा सत्यापन, पंजीयन और धान बेचने की तैयारियों पर पड़ रहा है।

सुरेंद्र वर्मा के अनुसार, भुइयां ऐप को ब्लॉक करने और पीवी ऐप को अनिवार्य किए जाने के बाद पटवारियों के सामने तकनीकी तथा व्यावहारिक समस्याएं खड़ी हो गई हैं। गिरदावरी और सत्यापन की प्रक्रिया को लेकर राजस्व अमले पर दबाव बढ़ रहा है। वहीं, किसानों को अपने खेतों के रकबे में सुधार कराने और धान खरीदी के लिए पंजीयन संबंधी समस्याओं का समाधान कराने के लिए तहसील कार्यालयों के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं। कांग्रेस का कहना है कि खरीदी की तारीख नजदीक होने के बावजूद व्यवस्था को सरल बनाने के बजाय ऐसे नियम लागू किए जा रहे हैं, जिनसे किसानों और कर्मचारियों दोनों की परेशानी बढ़ रही है।

कांग्रेस ने आरोप लगाया कि प्रदेश के किसान खेतों में मेहनत करके धान की फसल तैयार कर चुके हैं, लेकिन सरकारी व्यवस्था में आ रही दिक्कतें उनकी उपज बेचने की प्रक्रिया को प्रभावित कर सकती हैं। पार्टी के मुताबिक, टोकन कटवाने, रकबा संशोधन कराने और पंजीयन पूरा करने में देरी होने से किसानों को परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। यदि समय रहते इन समस्याओं का समाधान नहीं किया गया, तो किसानों के सामने आर्थिक संकट खड़ा होने की आशंका है। कांग्रेस ने यह भी आशंका जताई कि व्यवस्था में देरी के कारण कुछ किसान बिचौलियों और कोचियों के माध्यम से कम कीमत पर धान बेचने के लिए मजबूर हो सकते हैं। हालांकि, ये आरोप और आशंकाएं कांग्रेस पार्टी की ओर से व्यक्त की गई हैं।

प्रदेश कांग्रेस कमेटी के मुख्य प्रवक्ता ने पटवारियों की मांगों का उल्लेख करते हुए कहा कि कर्मचारी लंबे समय से आवश्यक संसाधन, इंटरनेट भत्ता, सुरक्षा व्यवस्था, तकनीकी नियमों में संशोधन, वेतन विसंगति और पदोन्नति जैसे मुद्दों को उठाते रहे हैं। कांग्रेस का आरोप है कि इन मांगों पर समय रहते निर्णय लेने के बजाय पटवारियों को नोटिस जारी करने और निलंबन जैसी कार्रवाई का सामना करना पड़ रहा है। पार्टी ने इसे कर्मचारियों की समस्याओं के प्रति सरकार का कठोर रवैया बताया है। कांग्रेस का कहना है कि राजस्व विभाग के कर्मचारियों को बेहतर सुविधाएं और व्यावहारिक कार्यप्रणाली उपलब्ध कराए बिना समयसीमा के भीतर बड़े पैमाने पर डिजिटल गिरदावरी का काम पूरा करने का दबाव बनाना उचित नहीं है।

सुरेंद्र वर्मा ने पीवी ऐप के माध्यम से गिरदावरी कार्य को लेकर भी सवाल उठाए। उन्होंने दावा किया कि दस दिनों के भीतर तीस लाख से अधिक खसरों की गिरदावरी पूरी करने का दबाव पटवारियों के लिए व्यावहारिक कठिनाइयां पैदा कर रहा है। कांग्रेस ने सवाल किया कि यदि पीवी ऐप में व्यवहारिक दिक्कतों को लेकर राजस्व मंत्री की ओर से भी समस्याएं स्वीकार किए जाने की बात कही जा रही है, तो फिर पटवारियों के खिलाफ निलंबन की कार्रवाई क्यों की जा रही है? पार्टी ने सरकार से तकनीकी समस्याओं का समाधान करने, कर्मचारियों से संवाद स्थापित करने और काम की समयसीमा निर्धारित करते समय जमीनी परिस्थितियों का ध्यान रखने की मांग की है।

धान खरीदी की तैयारियों को लेकर कांग्रेस ने पूर्ववर्ती सरकार और वर्तमान भाजपा सरकार की कार्यप्रणाली की तुलना भी की। सुरेंद्र वर्मा ने कहा कि कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में एक नवंबर से धान खरीदी की व्यवस्था शुरू होती थी और राजस्व अमले के साथ समन्वय बनाकर काम किया जाता था। उनके अनुसार, उस समय किसानों को अपनी उपज बेचने में परेशानी न हो, इसके लिए प्रशासनिक स्तर पर सहयोगात्मक व्यवस्था बनाए रखने पर जोर दिया जाता था। उन्होंने आरोप लगाया कि वर्तमान सरकार के कार्यकाल में पटवारियों और किसानों के बीच समस्याएं बढ़ी हैं तथा रकबा संशोधन और गिरदावरी की प्रक्रिया को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है। कांग्रेस ने कहा कि किसान राज्य की अर्थव्यवस्था की महत्वपूर्ण कड़ी हैं और धान खरीदी की प्रक्रिया में किसी भी प्रकार की अनावश्यक बाधा से बचना सरकार की प्राथमिकता होनी चाहिए।

कांग्रेस ने रकबा संशोधन की प्रक्रिया को लेकर भी सरकार से जवाब मांगा है। पार्टी ने सवाल उठाया कि गिरदावरी और सत्यापन के नाम पर किसानों के रकबे में कटौती की आशंका क्यों पैदा हो रही है और सरकार इस संबंध में स्थिति स्पष्ट क्यों नहीं कर रही है। कांग्रेस का आरोप है कि यदि किसानों के वास्तविक रकबे का सही समय पर सत्यापन नहीं हुआ, तो उन्हें धान बेचने के लिए पंजीयन कराने और निर्धारित मात्रा में उपज बेचने में परेशानी हो सकती है। पार्टी ने सरकार से यह स्पष्ट करने की मांग की है कि रकबा संशोधन की प्रक्रिया किस तरह संचालित की जा रही है, तकनीकी शिकायतों का निपटारा कैसे होगा और प्रभावित किसानों को समय पर राहत देने के लिए क्या कदम उठाए जा रहे हैं।

प्रदेश कांग्रेस कमेटी ने सरकार से पटवारी संघ की मांगों पर तत्काल बातचीत शुरू करने, आवश्यक संसाधन उपलब्ध कराने, पीवी ऐप से जुड़ी तकनीकी और व्यावहारिक समस्याओं को दूर करने तथा अन्यायपूर्ण कार्रवाई के आरोपों की समीक्षा करने की मांग की है। कांग्रेस का कहना है कि धान खरीदी जैसी महत्वपूर्ण प्रक्रिया को सुचारू बनाए रखने के लिए प्रशासन और राजस्व कर्मचारियों के बीच समन्वय आवश्यक है। पार्टी ने चेतावनी दी है कि यदि पटवारियों की जायज मांगों पर ध्यान नहीं दिया गया और किसानों की समस्याओं का समाधान नहीं हुआ, तो कांग्रेस सड़कों पर उतरकर आंदोलन करेगी।

धान खरीदी शुरू होने से पहले उठे इन सवालों के बीच अब किसानों और पटवारियों की समस्याओं का समाधान करना प्रशासन के लिए महत्वपूर्ण चुनौती है। किसानों को समय पर पंजीयन, रकबा संशोधन और टोकन संबंधी सुविधाएं मिलें तथा पटवारियों को तकनीकी संसाधन और स्पष्ट कार्यप्रणाली उपलब्ध हो, इसके लिए प्रभावी कदम उठाने की जरूरत है। कांग्रेस ने जहां भाजपा सरकार पर व्यवस्था बाधित करने का आरोप लगाया है, वहीं इन आरोपों पर सरकार का पक्ष और संबंधित विभाग की ओर से उठाए गए कदम भी महत्वपूर्ण होंगे। फिलहाल, धान खरीदी से पहले तकनीकी समस्याओं, पटवारियों की मांगों और किसानों के पंजीयन को लेकर विवाद राजनीतिक बहस का प्रमुख मुद्दा बन गया है।