छत्तीसगढ़ में बेरोजगारी चरम पर, रोजगार मेले में 10 हजार रुपये की नौकरी के लिए भटक रहे पोस्ट ग्रेजुएट: कांग्रेस

छत्तीसगढ़ प्रदेश कांग्रेस कमेटी ने भाजपा सरकार पर युवाओं को रोजगार देने में विफल रहने का आरोप लगाया है। प्रदेश कांग्रेस की मुख्य प्रवक्ता वंदना राजपूत ने कहा कि रोजगार मेले में पोस्ट ग्रेजुएट युवाओं को भी दस हजार रुपये मासिक वेतन वाली नौकरी के लिए भटकना पड़ रहा है। कांग्रेस ने दावा किया कि प्रदेश के विभिन्न सरकारी विभागों में एक लाख से अधिक पद रिक्त हैं, जबकि विधानसभा चुनाव के दौरान पांच साल में एक लाख युवाओं को सरकारी नौकरी देने का वादा किया गया था। पार्टी ने सरकार से भर्ती प्रक्रिया तेज करने और युवाओं को रोजगार उपलब्ध कराने की मांग की है।

Oct 14, 2026 - 15:28
 0  3
छत्तीसगढ़ में बेरोजगारी चरम पर, रोजगार मेले में 10 हजार रुपये की नौकरी के लिए भटक रहे पोस्ट ग्रेजुएट: कांग्रेस

UNITED NEWS OF ASIA. अमृतेश्वर सिंह, रायपुर l छत्तीसगढ़ में बेरोजगारी और सरकारी भर्तियों को लेकर राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। छत्तीसगढ़ प्रदेश कांग्रेस कमेटी ने भाजपा सरकार पर युवाओं को रोजगार उपलब्ध कराने में विफल रहने का आरोप लगाया है। प्रदेश कांग्रेस की मुख्य प्रवक्ता वंदना राजपूत ने कहा कि प्रदेश में बेरोजगारी की समस्या गंभीर होती जा रही है और रोजगार की तलाश में शिक्षित युवाओं को भी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने रोजगार मेले का उल्लेख करते हुए दावा किया कि पोस्ट ग्रेजुएट युवाओं को भी दस हजार रुपये मासिक वेतन वाली नौकरी के लिए भटकना पड़ रहा है। कांग्रेस ने इसे प्रदेश में रोजगार के अवसरों की स्थिति पर गंभीर सवाल बताते हुए सरकार से युवाओं के लिए ठोस कदम उठाने की मांग की है।

वंदना राजपूत ने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार के लगभग पौने तीन साल के कार्यकाल में युवाओं को पर्याप्त रोजगार नहीं मिला है। उनके मुताबिक, कांग्रेस सरकार के दौरान प्रदेश में बेरोजगारी दर 0.60 प्रतिशत थी, जबकि वर्तमान में यह बढ़कर 4.5 प्रतिशत हो गई है। ये आंकड़े कांग्रेस की ओर से जारी प्रेस विज्ञप्ति में प्रस्तुत किए गए हैं। बेरोजगारी दर की तुलना के लिए संबंधित अवधि, सर्वेक्षण और आधिकारिक आंकड़ों की स्वतंत्र पुष्टि आवश्यक है। कांग्रेस का कहना है कि प्रदेश में रोजगार के अवसर बढ़ाने के बजाय कई क्षेत्रों में पहले से काम कर रहे युवाओं और कर्मचारियों के सामने भी रोजगार का संकट पैदा हुआ है।

कांग्रेस की मुख्य प्रवक्ता ने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार के कार्यकाल में बीएड शिक्षकों, अतिथि शिक्षकों, विद्या मितान, क्रेडा के संविदा कर्मचारियों, अनियमित कर्मचारियों तथा विद्युत और वन विभाग के संविदा कर्मचारियों सहित विभिन्न वर्गों के लोगों को रोजगार संबंधी समस्याओं का सामना करना पड़ा है। उन्होंने गोठान से जुड़ी महिला स्व-सहायता समूहों, रूरल इंडस्ट्रियल पार्क यानी रीपा के माध्यम से काम कर रहे लोगों और ई-श्रेणी के लाइसेंस के तहत काम करने वाले युवाओं के रोजगार पर भी सवाल उठाए। कांग्रेस का आरोप है कि विभिन्न योजनाओं और विभागों में रोजगार के अवसर प्रभावित होने से प्रदेश के युवाओं की आर्थिक स्थिति पर असर पड़ा है।

सरकारी विभागों में रिक्त पदों का मुद्दा उठाते हुए कांग्रेस ने भाजपा सरकार को विधानसभा चुनाव के दौरान किए गए वादों की याद दिलाई है। वंदना राजपूत ने कहा कि भाजपा ने अपनी चुनावी घोषणा में पांच साल के भीतर एक लाख युवाओं को सरकारी नौकरी देने का वादा किया था। कांग्रेस के अनुसार, प्रदेश के विभिन्न सरकारी विभागों में एक लाख से अधिक पद रिक्त हैं, लेकिन उन पदों पर भर्ती की प्रक्रिया अपेक्षित गति से आगे नहीं बढ़ रही है। पार्टी ने सवाल उठाया कि जब सरकारी विभागों में बड़ी संख्या में पद खाली बताए जा रहे हैं, तो बेरोजगार युवाओं को नौकरी के लिए इंतजार क्यों करना पड़ रहा है।

कांग्रेस की ओर से जारी आंकड़ों के मुताबिक, शिक्षा विभाग में लगभग 57 हजार पद रिक्त हैं। स्वास्थ्य विभाग में डॉक्टरों और पैरामेडिकल स्टाफ के 18 हजार से अधिक पद खाली होने का दावा किया गया है। इसी तरह उच्च शिक्षा विभाग में लगभग 3,700 पद, लोक निर्माण विभाग यानी पीडब्ल्यूडी में छह हजार पद, सहकारिता विभाग में चार हजार पद, वन विभाग में छह हजार पद और जेल विभाग में लगभग 1,200 पद रिक्त बताए गए हैं। कांग्रेस ने ग्रामीण विकास विभाग में आठ हजार, पुलिस विभाग में सात हजार और आदिम जाति कल्याण विभाग में सात हजार पद खाली होने का भी दावा किया है। पार्टी ने लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग यानी पीएचई में भी रिक्त पदों का उल्लेख किया है, हालांकि प्रेस विज्ञप्ति में इस विभाग के लिए स्पष्ट संख्या नहीं दी गई है। इन आंकड़ों की विभागवार आधिकारिक पुष्टि आवश्यक है।

वंदना राजपूत ने कहा कि यदि सरकार इच्छाशक्ति दिखाए और भर्ती प्रक्रिया को प्राथमिकता दे, तो बड़ी संख्या में बेरोजगार युवाओं को सरकारी नौकरी के अवसर मिल सकते हैं। कांग्रेस का आरोप है कि भाजपा सरकार के सत्ता में आने के बाद से सरकारी भर्तियों की गति धीमी रही है और पहले से चल रही कई भर्ती प्रक्रियाओं में भी नियुक्तियों को लेकर अभ्यर्थियों के बीच असमंजस बना हुआ है। पार्टी ने सरकार से पूछा है कि पांच साल में एक लाख सरकारी नौकरी देने की चुनावी गारंटी को पूरा करने के लिए अब तक क्या ठोस कदम उठाए गए हैं और भर्ती प्रक्रिया की समयसीमा क्या है।

कांग्रेस ने यह भी आरोप लगाया कि भाजपा ने विधानसभा चुनाव के दौरान युवाओं को रोजगार उपलब्ध कराने का वादा किया था, लेकिन अब तक उस दिशा में पर्याप्त प्रगति दिखाई नहीं दे रही है। वंदना राजपूत के मुताबिक, सरकार को स्पष्ट करना चाहिए कि विभिन्न विभागों में रिक्त पदों पर भर्ती कब शुरू होगी और चयनित अभ्यर्थियों को नियुक्ति कब तक दी जाएगी। उन्होंने कहा कि सरकारी नौकरी की तैयारी कर रहे हजारों युवाओं का समय और पैसा प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी में खर्च हो रहा है। ऐसे में भर्ती कैलेंडर जारी करना, लंबित प्रक्रियाओं को पूरा करना और विभागवार रिक्तियों की जानकारी सार्वजनिक करना जरूरी है।

वंदना राजपूत ने राष्ट्रीय स्तर पर रोजगार के मुद्दे को उठाते हुए भाजपा की नीतियों की आलोचना भी की। उन्होंने कहा कि 2014 के लोकसभा चुनाव के दौरान नरेंद्र मोदी ने हर साल दो करोड़ रोजगार देने का वादा किया था। कांग्रेस का आरोप है कि बीते वर्षों में रोजगार के पर्याप्त अवसर नहीं बन पाए और नोटबंदी तथा जीएसटी जैसी नीतियों के कारण छोटे कारोबारियों, उद्योगों और व्यवसायों को नुकसान पहुंचा, जिसका असर रोजगार पर भी पड़ा। ये राजनीतिक आरोप हैं; इनके आर्थिक प्रभाव और रोजगार संबंधी दावों का मूल्यांकन स्वतंत्र आंकड़ों तथा संबंधित नीतियों के व्यापक विश्लेषण के आधार पर किया जाना चाहिए।

छत्तीसगढ़ में रोजगार का मुद्दा लाखों युवाओं और उनके परिवारों से जुड़ा हुआ है। सरकारी विभागों में रिक्त पदों को भरना, भर्ती परीक्षाओं को समय पर आयोजित करना, चयन प्रक्रिया में पारदर्शिता बनाए रखना और निजी क्षेत्र में रोजगार के अवसर बढ़ाना युवाओं की प्रमुख अपेक्षाओं में शामिल हैं। कांग्रेस ने भाजपा सरकार से मांग की है कि चुनाव के दौरान किए गए रोजगार संबंधी वादों पर स्थिति स्पष्ट की जाए और रिक्त पदों पर भर्ती के लिए ठोस कार्ययोजना सार्वजनिक की जाए।

कांग्रेस ने कहा है कि केवल रोजगार मेलों का आयोजन पर्याप्त नहीं है, बल्कि युवाओं को उनकी शैक्षणिक योग्यता के अनुरूप स्थायी और सम्मानजनक रोजगार के अवसर उपलब्ध कराना भी जरूरी है। पार्टी ने सरकार से भर्ती प्रक्रिया तेज करने, लंबित नियुक्तियों को पूरा करने और रोजगार संबंधी योजनाओं की समीक्षा करने की मांग की है। वहीं, रिक्त पदों की वास्तविक संख्या, बेरोजगारी दर और चुनावी वादों पर सरकार की प्रगति का आकलन आधिकारिक आंकड़ों और विभागीय जानकारी के आधार पर किया जाना आवश्यक है। फिलहाल, बेरोजगारी और सरकारी भर्ती का मुद्दा छत्तीसगढ़ की राजनीति में एक बार फिर चर्चा के केंद्र में है।