गौरेला की नर्मदा यात्रा संपन्न, 3200 किलोमीटर का सफर तय कराने वाले बस चालक का सम्मान
छत्तीसगढ़ के गौरेला में श्री राधे मोहन रामायण समिति की 14 दिवसीय नर्मदा दर्शन यात्रा 9 अक्टूबर 2026 को संपन्न हुई। 26 सितंबर से शुरू हुई इस यात्रा में 40 सदस्य शामिल हुए। यात्रा के दौरान लगभग 3200 किलोमीटर का सफर तय कराने वाले बस चालक को उनके सेवाभाव और समर्पण के लिए ₹2100 की पुरस्कार राशि देकर सम्मानित किया गया। तापस शर्मा ने भी ₹500 की राशि भेंट की। समापन अवसर पर वैदिक मंत्रोच्चार, मां नर्मदा की आरती और विशाल भंडारे का आयोजन किया गया।
UNITED NEWS OF ASIA. अवास कैवर्त, मरवाही l आस्था, सेवा और समर्पण की मिसाल पेश करते हुए श्री राधे मोहन रामायण समिति गौरेला की 14 दिवसीय नर्मदा दर्शन यात्रा शुक्रवार, 9 अक्टूबर 2026 को भक्तिमय वातावरण में संपन्न हुई। इस यात्रा में 40 सदस्य शामिल हुए। श्रद्धालुओं ने मां नर्मदा के विभिन्न पवित्र स्थलों पर पहुंचकर दर्शन-पूजन किया। यात्रा के समापन अवसर पर सबसे खास चर्चा उस बस चालक की रही, जिसने लगभग 3200 किलोमीटर का सफर तय कराते हुए यात्रियों की सुविधा और सुरक्षा का ध्यान रखा। समिति और यात्रियों ने उनके सेवाभाव की सराहना करते हुए तिलक-चंदन लगाकर सम्मानित किया।
26 सितंबर से शुरू हुई थी यात्रा
श्री राधे मोहन रामायण समिति के तत्वावधान में नर्मदा दर्शन यात्रा 26 सितंबर 2026 को प्रारंभ हुई थी। 14 दिनों तक चली इस धार्मिक यात्रा में श्रद्धालुओं ने मां नर्मदा के पवित्र स्थलों पर दर्शन और पूजा-अर्चना की। यात्रा के दौरान सदस्यों ने धार्मिक आस्था के साथ आपसी सहयोग और सेवा की भावना को भी बनाए रखा। शुक्रवार को यात्रा के समापन पर मां नर्मदा के जयकारों से वातावरण भक्तिमय हो उठा।
बस चालक के सेवाभाव ने जीता श्रद्धालुओं का दिल
यात्रा की सफलता में बस चालक की भूमिका महत्वपूर्ण रही। जानकारी के अनुसार, चालक ने अकेले लगभग 3200 किलोमीटर का सफर पूरा कराया। प्रतिदिन 200 किलोमीटर से अधिक की यात्रा के दौरान उन्होंने यात्रियों की सुविधा और सुरक्षा को प्राथमिकता दी। उनके समर्पण और जिम्मेदारी से प्रभावित होकर समिति के सदस्यों तथा यात्रियों ने उनका अभिनंदन किया।
सम्मान समारोह में बस चालक को तिलक-चंदन लगाकर ₹2100 की नगद पुरस्कार राशि भेंट की गई। वहीं, तापस शर्मा ने भी चालक का उत्साह बढ़ाने के लिए ₹500 की राशि प्रदान की। यात्रा के दौरान भोजन तैयार करने और अन्य व्यवस्थाओं में सहयोग देने वाले कार्यकर्ताओं को भी सम्मानित किया गया। इस पहल के माध्यम से समिति ने यात्रा को सफल बनाने में योगदान देने वाले लोगों के प्रति आभार व्यक्त किया।
वैदिक मंत्रोच्चार के बीच मां नर्मदा की आरती
यात्रा के समापन अवसर पर बंटी महाराज के आचार्यत्व में मां नर्मदा की विधिवत पूजा-अर्चना और आरती की गई। वैदिक मंत्रोच्चार के बीच मां नर्मदा को विशेष मोहन भोग अर्पित किया गया। इसके बाद विशाल भंडारे का आयोजन हुआ, जिसमें श्रद्धालुओं और स्थानीय भक्तों ने महाप्रसाद ग्रहण किया। समिति के सदस्यों ने मां नर्मदा से मानव कल्याण, सुख-समृद्धि और क्षेत्र की खुशहाली की कामना की।
समिति के सदस्यों का रहा विशेष योगदान
इस धार्मिक यात्रा को सफल बनाने में संयोजक सीताराम महाराज, मोहन गुप्ता, मथुरा सोनी, मंजू नामदेव, कन्हैया राठौर, सुरेश नामदेव, मोहन सरिवान, कपूर चंद साहू, जयदीप सोनी, राजेंद्र प्रसाद सोनी, चंद्रकांत शर्मा, चिंटू साहू, केदार नामदेव और संतोष श्रीवास सहित 16 मातृशक्तियों तथा सभी 40 सदस्यों का योगदान रहा।
कुल मिलाकर, श्री राधे मोहन रामायण समिति की यह यात्रा धार्मिक आस्था के साथ सेवा और समर्पण का संदेश भी दे गई। मां नर्मदा के दर्शन से जहां श्रद्धालु भावविभोर हुए, वहीं बस चालक और अन्य सहयोगियों का सम्मान इस बात का प्रतीक बना कि किसी भी यात्रा की सफलता में पर्दे के पीछे मेहनत करने वाले लोगों की भूमिका भी उतनी ही महत्वपूर्ण होती है।