Yes Bank Share: सुप्रीम कोर्ट के फैसले से येस बैंक के शेयर में गिरावट, ₹17.79 पर पहुंचा भाव, Citi ने घटाया टारगेट
सुप्रीम कोर्ट के AT-1 बॉन्ड मामले में फैसले के बाद येस बैंक के शेयरों पर दबाव बना हुआ है। शेयर गिरकर ₹17.79 पर आ गया। वहीं, वैश्विक ब्रोकरेज फर्म Citi ने बैंक की सेल रेटिंग बरकरार रखते हुए टारगेट प्राइस ₹22 से घटाकर ₹17.50 कर दिया है। फैसले से बैंक की पूंजी और बुक वैल्यू पर संभावित असर को लेकर निवेशकों की चिंता बढ़ गई है।
UNITED NEWS OF ASIA. येस बैंक के शेयरों में सुप्रीम कोर्ट के AT-1 बॉन्ड मामले में फैसले के बाद लगातार दबाव देखने को मिल रहा है। बैंक के शेयर में एक दिन पहले भारी गिरावट दर्ज की गई थी और यह कारोबार के दौरान करीब 20 प्रतिशत तक टूटकर एक साल के निचले स्तर ₹16.98 पर पहुंच गया था। इसके बाद भी बिकवाली का सिलसिला जारी रहा। उपलब्ध कारोबारी आंकड़ों के मुताबिक, शेयर BSE पर 1.98 प्रतिशत गिरकर ₹17.79 पर कारोबार कर रहा था, जबकि दिन के दौरान यह ₹17.45 तक फिसल गया। इससे पहले 18 जून 2026 को येस बैंक के शेयर ने ₹25.77 का एक साल का उच्च स्तर छुआ था।
क्या है ₹8,415 करोड़ के AT-1 बॉन्ड का मामला?
यह पूरा मामला येस बैंक के अतिरिक्त टियर-1 यानी AT-1 बॉन्ड से जुड़ा है। बैंक ने वर्ष 2016 और 2017 में इन बॉन्ड के माध्यम से करीब ₹8,415 करोड़ जुटाए थे। वर्ष 2020 में बैंक के पुनर्गठन के दौरान इन बॉन्ड को राइट ऑफ कर दिया गया था, जिससे बॉन्डधारकों को अपने निवेश का नुकसान उठाना पड़ा। सुप्रीम कोर्ट ने इस राइट ऑफ की प्रक्रिया को गलत ठहराया है। फैसले के बाद बॉन्डधारकों के भुगतान और बैंक की वित्तीय स्थिति पर संभावित असर को लेकर चर्चा तेज हो गई है।
बैंक की पूंजी पर कितना पड़ सकता है असर?
येस बैंक ने एक्सचेंज फाइलिंग में बताया कि वह सुप्रीम कोर्ट के फैसले के सभी कानूनी पहलुओं और उपलब्ध विकल्पों की समीक्षा कर रहा है। बैंक के अनुसार, उसके पास पूंजी प्रबंधन के अन्य विकल्प भी मौजूद हैं, जिनके माध्यम से विकास योजनाओं के लिए आवश्यक पूंजी से जुड़े फैसले लिए जा सकते हैं। बैंक ने कहा कि 30 जून 2026 तक के CET-1 अनुपात पर फैसले का संभावित असर करीब 250 बेसिस पॉइंट हो सकता है। हालांकि, बैंक के अनुसार प्रो-फॉर्मा आधार पर टियर-1 पूंजी अनुपात 14 प्रतिशत पर बना रहेगा।
Citi ने घटाया टारगेट प्राइस
वैश्विक ब्रोकरेज फर्म Citi ने येस बैंक पर अपनी ‘सेल’ रेटिंग बरकरार रखी है। साथ ही, शेयर का टारगेट प्राइस ₹22 से घटाकर ₹17.50 कर दिया है। ब्रोकरेज का मानना है कि सुप्रीम कोर्ट का फैसला बैंक की पूंजी स्थिति के लिए चुनौती बन सकता है। अनुमान के मुताबिक, CET-1 अनुपात में करीब 250 बेसिस पॉइंट की कमी आ सकती है। वहीं, कूपन भुगतान के प्रभाव को ध्यान में रखते हुए कुछ आकलनों में यह अनुपात 11.5 प्रतिशत तक रहने की संभावना जताई गई है।
बुक वैल्यू और निवेशकों पर क्या होगा असर?
Citi के अनुमान के अनुसार, इस मामले के कारण येस बैंक की बुक वैल्यू में लगभग 13 से 14 प्रतिशत तक गिरावट आ सकती है। पूंजी के बफर को मजबूत करने के लिए बैंक को अतिरिक्त पूंजी जुटाने की जरूरत भी पड़ सकती है। इससे बैंक की भविष्य की विकास योजनाओं और वित्तीय रणनीति पर असर पड़ने की आशंका है।
निवेशकों के लिए फिलहाल बैंक की कानूनी रणनीति, संभावित भुगतान दायित्व और पूंजी प्रबंधन से जुड़े फैसले महत्वपूर्ण रहेंगे। हालांकि, शेयर की आगे की चाल कई वित्तीय और बाजार संबंधी कारकों पर निर्भर करेगी। Citi का टारगेट प्राइस केवल ब्रोकरेज का अनुमान है, यह शेयर के भविष्य के भाव की गारंटी नहीं है।