थाड़पथरा में ग्रामीण और जनजातीय पर्यटन की जीवंत पाठशाला, 90 विद्यार्थियों ने करीब से जानी बैगा संस्कृति

विश्व पर्यटन सप्ताह के तहत थाड़पथरा में आईजीएनटीयू अमरकंटक के 90 विद्यार्थियों के लिए ग्रामीण एवं जनजातीय पर्यटन कार्यशाला और फील्ड विजिट आयोजित की गई। विद्यार्थियों ने जंगल, अमरावती गंगा और ‘माई का मंडप’ तक ट्रैकिंग कर बैगा संस्कृति, स्थानीय खान-पान और समुदाय आधारित पर्यटन मॉडल को करीब से समझा।

Sep 25, 2026 - 16:18
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थाड़पथरा में ग्रामीण और जनजातीय पर्यटन की जीवंत पाठशाला, 90 विद्यार्थियों ने करीब से जानी बैगा संस्कृति

UNITED NEWS OF ASIA. अमृतेश्वर सिंह, रायपुर l विश्व पर्यटन सप्ताह के अवसर पर ग्राम पंचायत थाड़पथरा स्थित मडहाउस परिसर में ग्रामीण एवं जनजातीय पर्यटन पर केंद्रित ‘रूरल एंड ट्राइबल टूरिज्म वर्कशॉप एवं फील्ड विजिट’ का आयोजन किया गया। 21 से 27 सितंबर तक मनाए जा रहे विश्व पर्यटन सप्ताह के तहत आयोजित इस कार्यक्रम में इंदिरा गांधी राष्ट्रीय जनजातीय विश्वविद्यालय (आईजीएनटीयू), अमरकंटक के पर्यटन प्रबंधन विभाग के 90 विद्यार्थियों ने भाग लिया।

कार्यक्रम का उद्देश्य विद्यार्थियों को ग्रामीण और जनजातीय क्षेत्रों में पर्यटन की संभावनाओं, स्थानीय संस्कृति तथा समुदाय आधारित पर्यटन की अवधारणा से व्यावहारिक रूप से परिचित कराना था। विद्यार्थियों ने प्राकृतिक परिवेश में समय बिताने के साथ स्थानीय समुदाय से संवाद किया और पर्यटन विकास के विभिन्न पहलुओं को प्रत्यक्ष रूप से समझा।

फील्ड विजिट के दौरान विद्यार्थियों ने मडहाउस परिसर से घने जंगलों और अमरावती गंगा नदी के प्राकृतिक परिवेश से होते हुए कमरापथरा मार्ग से ‘माई का मंडप’ तक ट्रैकिंग की। जंगल की हरियाली, शांत वातावरण और प्राकृतिक संसाधनों के बीच हुए इस अनुभव ने विद्यार्थियों को पर्यटन प्रबंधन की पुस्तकीय जानकारी को वास्तविक परिस्थितियों से जोड़ने का अवसर दिया।

विद्यार्थियों ने इस दौरान यह समझने का प्रयास किया कि प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण करते हुए पर्यटन गतिविधियों को किस तरह विकसित किया जा सकता है। स्थानीय प्राकृतिक स्थलों के साथ वहां की संस्कृति, परंपराओं और जीवनशैली को जोड़कर पर्यटकों के लिए अनुभव आधारित पर्यटन विकसित करने की संभावनाओं पर भी चर्चा हुई।

फील्ड विजिट के दौरान विद्यार्थियों को बैगा जनजाति की पारंपरिक जीवनशैली, रहन-सहन, खान-पान और गोदना परंपरा को करीब से जानने का अवसर मिला। प्रकृति के साथ बैगा समुदाय के पारंपरिक जुड़ाव और स्थानीय ज्ञान ने विद्यार्थियों को जनजातीय संस्कृति की विशिष्टताओं को समझने में मदद की।

विद्यार्थियों ने स्थानीय समुदाय के सदस्यों के साथ संवाद कर यह भी जाना कि जनजातीय क्षेत्रों में पर्यटन को केवल प्राकृतिक स्थलों के भ्रमण तक सीमित रखने के बजाय स्थानीय कला, खान-पान, लोकजीवन और सांस्कृतिक विरासत से जोड़ा जा सकता है। इससे पर्यटकों को स्थानीय जीवन का बेहतर अनुभव मिलने के साथ समुदाय की भागीदारी भी बढ़ सकती है।

थाड़पथरा पर्यटन समिति द्वारा आईजीएनटीयू के विद्यार्थियों का स्वागत किया गया। समिति के सदस्यों ने विद्यार्थियों को स्थानीय पारंपरिक व्यंजनों से परिचित कराया। इस दौरान विद्यार्थियों ने ग्रामीण खान-पान और स्थानीय जीवनशैली की विशेषताओं को समझा। आयोजन में स्थानीय समुदाय की भागीदारी ने विद्यार्थियों को यह जानने का अवसर दिया कि पर्यटन गतिविधियों में स्थानीय लोगों की भूमिका महत्वपूर्ण हो सकती है।

कार्यक्रम में पर्यटन नोडल अधिकारी डॉ. राहुल गौतम, ग्रामीण आजीविका मिशन के ब्लॉक मिशन प्रबंधक अभिषेक जायसवाल और पर्यटन समन्वयक हर्ष सोनी ने विद्यार्थियों को समुदाय आधारित पर्यटन मॉडल की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि ग्रामीण एवं जनजातीय क्षेत्रों में पर्यटन विकास के लिए स्थानीय लोगों की सक्रिय सहभागिता जरूरी है। समुदाय की भागीदारी से स्थानीय संस्कृति और प्राकृतिक विरासत के संरक्षण के साथ ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने तथा रोजगार एवं आजीविका के अवसर विकसित करने की संभावनाएं बढ़ती हैं।

विद्यार्थियों को ग्रामीण एवं जनजातीय क्षेत्रों में पर्यटन विकास, स्थानीय संसाधनों के उपयोग, सामुदायिक सहभागिता और जिम्मेदार पर्यटन के विभिन्न पहलुओं की जानकारी दी गई। इस दौरान पर्यटन को स्थानीय जरूरतों और पर्यावरणीय संरक्षण के साथ जोड़कर विकसित करने पर भी जोर दिया गया।

कार्यक्रम का आयोजन पर्यटन प्रबंधन विभागाध्यक्ष डॉ. प्रशांत सिंह, डॉ. रोहित रविंद्र बोरलिकर, डॉ. जयप्रकाश नारायना एवं डॉ. दिनेश कुमार परस्ते के मार्गदर्शन में किया गया। आयोजन में थाड़पथरा पर्यटन समिति के सदस्यों ने भी सक्रिय सहभागिता निभाई।

विश्व पर्यटन सप्ताह के तहत आयोजित यह फील्ड विजिट विद्यार्थियों के लिए पर्यटन शिक्षा को व्यावहारिक अनुभव से जोड़ने वाली पहल रही। प्राकृतिक परिवेश, बैगा संस्कृति और स्थानीय समुदाय के साथ प्रत्यक्ष संवाद के माध्यम से विद्यार्थियों ने ग्रामीण एवं जनजातीय पर्यटन की संभावनाओं को करीब से समझा। थाड़पथरा में आयोजित यह कार्यक्रम प्रकृति, संस्कृति, पर्यटन शिक्षा और सामुदायिक सहभागिता को एक साथ जोड़ने वाला अनुभव बना।