रायपुर में प्रत्युषा फाउंडेशन का ‘दिव्यरूपेण गरबा’, दिव्यांग बच्चों ने कन्या पूजन और गरबा उत्सव में लिया हिस्सा

रायपुर के कोपलवाणी मूक-बधिर शाला, सिमरिया में प्रत्युषा फाउंडेशन ने शारदीय नवरात्रि पर चौथे वर्ष ‘दिव्यरूपेण गरबा’ का आयोजन किया। कार्यक्रम में कन्या पूजन, कन्या भोज, सांस्कृतिक प्रस्तुतियां और गरबा नृत्य के माध्यम से दिव्यांग बच्चों की प्रतिभा, आत्मविश्वास और सामाजिक समावेशन को प्रोत्साहित किया गया।

Oct 18, 2026 - 15:06
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रायपुर में प्रत्युषा फाउंडेशन का ‘दिव्यरूपेण गरबा’, दिव्यांग बच्चों ने कन्या पूजन और गरबा उत्सव में लिया हिस्सा

UNITED NEWS OF ASIA. अमृतेश्वर सिंह, रायपुर l शारदीय नवरात्रि के पावन अवसर पर प्रत्युषा फाउंडेशन, रायपुर द्वारा कोपलवाणी मूक-बधिर शाला, सिमरिया में ‘दिव्यरूपेण गरबा’ कार्यक्रम का भव्य आयोजन किया गया। यह आयोजन लगातार चौथे वर्ष आयोजित किया गया, जिसमें दिव्यांग बच्चों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। कार्यक्रम में कन्या पूजन, कन्या भोज, सांस्कृतिक प्रस्तुतियों और गरबा नृत्य के माध्यम से भक्ति, उल्लास और सामाजिक समावेशन का संदेश दिया गया।

संस्था की संस्थापिका प्रीति दास मिश्रा ने बताया कि प्रत्युषा फाउंडेशन शारदीय नवरात्रि के दौरान दिव्यांग बच्चों के लिए यह विशेष आयोजन करती आ रही है। कार्यक्रम से पहले बच्चों को तीन दिनों तक गरबा का प्रशिक्षण दिया जाता है, ताकि वे उत्सव में पूरे आत्मविश्वास के साथ हिस्सा ले सकें। इसके बाद विद्यालय की नौ कन्याओं और दो बच्चों को लंगूर के रूप में पारंपरिक विधि से पूजन किया जाता है। सभी विद्यार्थियों के पूजन के बाद उन्हें उपहार स्वरूप डांडिया भेंट किए जाते हैं। कन्या पूजन और भोज के पश्चात अतिथियों, संस्था के सदस्यों, शिक्षिकाओं और बच्चों ने मिलकर गरबा किया।

कार्यक्रम का उद्देश्य दिव्यांग बच्चों को समाज की मुख्यधारा से जोड़ना, उनकी प्रतिभाओं को प्रोत्साहित करना तथा उनमें आत्मविश्वास, समानता और सम्मान की भावना को मजबूत बनाना है। आयोजन की शुरुआत अतिथियों के तिलक लगाकर स्वागत से हुई। इसके बाद अतिथियों ने दीप प्रज्वलित किया और कन्या पूजन किया। दिव्यांग बच्चों ने स्वागत नृत्य प्रस्तुत कर सभी का मन मोह लिया। उनकी प्रस्तुतियों में उत्साह, आत्मविश्वास और सांस्कृतिक अभिव्यक्ति की सुंदर झलक देखने को मिली।

अतिथियों को शाल, श्रीफल और स्मृति चिह्न के रूप में दिव्यांग बच्चों द्वारा बनाई गई पेंटिंग भेंट की गई। इस पहल ने बच्चों की रचनात्मक प्रतिभा को सामने लाने के साथ उनके हुनर को सम्मान देने का अवसर भी प्रदान किया। कार्यक्रम में उपस्थित अतिथियों, बच्चों, संस्था के सदस्यों और विद्यालय की शिक्षिकाओं ने एक साथ गरबा खेला। पूरा वातावरण भक्ति, उल्लास और आत्मीयता से सराबोर रहा।

इस अवसर पर छत्तीसगढ़ शासन के अल्पसंख्यक आयोग से जुड़े अमरजीत सिंह छाबड़ा, प्रदेश भाजपा महिला मोर्चा की डॉ. नीतू सिंह, विजय मनवानी, पदमा शर्मा और खुशबू शर्मा की गरिमामयी उपस्थिति रही। अतिथियों ने प्रत्युषा फाउंडेशन की इस पहल की सराहना की और बच्चों के साथ समय बिताकर उनका उत्साहवर्धन किया। उन्होंने ऐसे आयोजनों को दिव्यांग बच्चों की प्रतिभा को पहचानने और उन्हें समान अवसर उपलब्ध कराने की दिशा में महत्वपूर्ण बताया।

प्रत्युषा फाउंडेशन की अध्यक्ष सुमन पांडे और संस्थापिका प्रीति दास मिश्रा के मार्गदर्शन में आयोजित कार्यक्रम को सफल बनाने में संस्था की टीम ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। सांस्कृतिक उपाध्यक्ष अर्चना वोरा, उपाध्यक्ष विद्या भट्ट, सचिव लक्ष्मी जिल्हारे, सचिव रितु प्रजापति, सोनिया सिंह और कमल प्रजापति का विशेष सहयोग रहा।

प्रत्युषा फाउंडेशन का मानना है कि दिव्यांग बच्चों को समाज से जोड़ने के लिए केवल उनके लिए कार्यक्रम आयोजित करना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि समाज के लोगों को भी उनकी जरूरतों, क्षमताओं और संवाद के तरीकों को समझना चाहिए। संस्था ने इस बात पर जोर दिया कि सांकेतिक भाषा सीखना और उसका उपयोग करना अधिक समावेशी समाज के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। ‘दिव्यरूपेण गरबा’ ने इसी भावना को आगे बढ़ाते हुए समानता, संवेदनशीलता, सम्मान और सहभागिता का प्रेरक संदेश दिया।