नॉर्थ ईस्ट ज़ोन लेवल-1 कोचिंग कार्यशाला का सफल आयोजन, 12 राज्यों के 55 कोचों ने लिया प्रशिक्षण
रायपुर में छत्तीसगढ़ प्रदेश आर्चरी एसोसिएशन द्वारा चार दिवसीय ईस्ट एवं नॉर्थ ईस्ट ज़ोन लेवल-1 कोचिंग कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यशाला में 12 राज्यों के करीब 55 कोचों ने हिस्सा लिया। विशेषज्ञों ने प्रशिक्षकों को आधुनिक तकनीक, प्रशिक्षण पद्धति, फिटनेस, मानसिक तैयारी और पोषण से जुड़े महत्वपूर्ण पहलुओं की जानकारी दी।
UNITED NEWS OF ASIA. अमृतेश्वर सिंह, रायपुर l छत्तीसगढ़ प्रदेश आर्चरी एसोसिएशन द्वारा ईस्ट एवं नॉर्थ ईस्ट ज़ोन लेवल-1 कोचिंग कार्यशाला का सफल आयोजन किया गया। चार दिवसीय इस कार्यशाला में देश के 12 राज्यों से करीब 55 प्रशिक्षकों ने सहभागिता की। प्रत्येक राज्य से दो से तीन प्रशिक्षकों ने हिस्सा लिया, जबकि छत्तीसगढ़ से लगभग 8 से 10 कोच कार्यशाला में शामिल हुए। आयोजन का उद्देश्य प्रशिक्षकों को तीरंदाजी की आधुनिक एवं वैज्ञानिक प्रशिक्षण पद्धतियों से जोड़ना और खिलाड़ियों को राष्ट्रीय तथा अंतरराष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताओं के लिए बेहतर तरीके से तैयार करना रहा।
कार्यशाला के दौरान प्रशिक्षकों को तीरंदाजी की तकनीकी बारीकियों के साथ प्रशिक्षण की आधुनिक विधियों की जानकारी दी गई। खिलाड़ियों की शारीरिक फिटनेस, मानसिक तैयारी, अभ्यास की योजना, प्रतियोगिता की तैयारी तथा प्रशिक्षण के दौरान आवश्यक सावधानियों जैसे विभिन्न विषयों पर विशेषज्ञों ने मार्गदर्शन प्रदान किया। प्रशिक्षण में इस बात पर भी जोर दिया गया कि एक खिलाड़ी के प्रदर्शन को बेहतर बनाने के लिए तकनीकी प्रशिक्षण के साथ शारीरिक और मानसिक मजबूती भी जरूरी है।
कार्यशाला में कोलकाता स्थित भारतीय खेल प्राधिकरण (SAI) के HOD एवं अंतरराष्ट्रीय कोच गंगाधर विशेष रूप से उपस्थित रहे। उन्होंने प्रशिक्षकों को तीरंदाजी के तकनीकी पक्षों और प्रशिक्षण प्रक्रिया से संबंधित महत्वपूर्ण जानकारी दी। असम से अमरजीत दुबे ने भी कार्यशाला में सहभागिता करते हुए प्रशिक्षकों को तकनीकी प्रशिक्षण और मार्गदर्शन प्रदान किया। खिलाड़ियों एवं प्रशिक्षकों के पोषण और संतुलित आहार से संबंधित विषयों पर नई दिल्ली के डाइटिशियन सचिन उपाध्याय ने महत्वपूर्ण जानकारी साझा की।
कार्यक्रम का संचालन भारतीय तीरंदाजी संघ के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष कैलाश मुरारका ने किया। छत्तीसगढ़ प्रदेश आर्चरी एसोसिएशन के महासचिव आयुष मुरारका ने कार्यशाला में उपस्थित अतिथियों एवं विशेषज्ञों का पुष्पगुच्छ भेंट कर स्वागत किया। दुर्ग-भिलाई जिला तीरंदाजी संघ के अध्यक्ष सतीश साहू भी इस अवसर पर विशेष रूप से उपस्थित रहे। सभी अतिथियों एवं प्रशिक्षकों का पुष्पगुच्छ, शॉल और श्रीफल भेंट कर सम्मान किया गया।
चार दिवसीय कार्यशाला के दौरान छत्तीसगढ़ के उपमुख्यमंत्री एवं खेल मंत्री अरुण साव ने भी प्रशिक्षकों और तीरंदाजी से जुड़े पदाधिकारियों को संबोधित किया। उन्होंने छत्तीसगढ़ प्रदेश आर्चरी एसोसिएशन के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष कैलाश मुरारका के खेल के प्रति समर्पण और तीरंदाजी को आगे बढ़ाने के प्रयासों की सराहना की। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ में खेल प्रतिभाओं की कमी नहीं है और खिलाड़ियों को बेहतर प्रशिक्षण, सुविधाएं तथा अवसर उपलब्ध कराकर खेलों के विकास को आगे बढ़ाया जा सकता है।
अरुण साव ने खेलों में प्रशिक्षकों की भूमिका को महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि कोच केवल तकनीकी प्रशिक्षण देने वाले व्यक्ति नहीं, बल्कि खिलाड़ियों के मार्गदर्शक और अभिभावक की भूमिका भी निभाते हैं। उन्होंने खिलाड़ियों की मानसिक मजबूती, शारीरिक फिटनेस और उचित पोषण पर ध्यान देने की आवश्यकता बताई। उन्होंने खेलो इंडिया, आधुनिक खेल अधोसंरचना और खिलाड़ियों की तैयारी से जुड़े प्रयासों का उल्लेख करते हुए प्रशिक्षकों से खेल प्रतिभाओं को आगे बढ़ाने में सक्रिय भूमिका निभाने का आह्वान किया।
कार्यक्रम में सुरजीत छाबड़ा, सोनू राजपूत सहित छत्तीसगढ़ के अनेक तीरंदाजी प्रशिक्षक और तीरंदाज उपस्थित रहे। कार्यशाला के माध्यम से प्रशिक्षकों को नई तकनीकों और वैज्ञानिक प्रशिक्षण प्रणाली से जोड़ने का प्रयास किया गया। आयोजकों के अनुसार, इस प्रकार के प्रशिक्षण कार्यक्रमों से प्रशिक्षकों की दक्षता बढ़ाने और खिलाड़ियों के प्रदर्शन को बेहतर बनाने में मदद मिलेगी। कार्यशाला का समापन खेल एवं तीरंदाजी के विकास, प्रशिक्षकों की क्षमता निर्माण और नई प्रतिभाओं को बेहतर मंच उपलब्ध कराने के उद्देश्य के साथ हुआ।