कोंडागांव में 32 दिन SNCU में चला नवजात का उपचार, गंभीर हालत से उबरकर स्वस्थ घर लौटी बालिका
कोंडागांव जिले के बड़ेराजपुर विकासखंड के ग्राम ओंडाकापार की नवजात बालिका जन्म के तुरंत बाद गंभीर चिकित्सकीय जटिलताओं से ग्रसित हो गई थी। उसे विशेष नवजात शिशु देखभाल इकाई (SNCU) में भर्ती कर 32 दिनों तक उपचार दिया गया। CPAP और वेंटिलेशन सपोर्ट, आवश्यक दवाओं, रक्ताधान, कंगारू मदर केयर और लगातार निगरानी के बाद 7 अक्टूबर 2026 को उसे अस्पताल से छुट्टी दे दी गई।
UNITED NEWS OF ASIA. रामकुमार भारद्वाज, कोंडागांव। जिले में नवजात शिशुओं को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने के प्रयासों के बीच एक गंभीर रूप से बीमार नवजात बालिका के सफल उपचार की कहानी सामने आई है। जन्म के तुरंत बाद गंभीर चिकित्सकीय जटिलताओं से जूझ रही बालिका को विशेष नवजात शिशु देखभाल इकाई (SNCU) में भर्ती कराया गया था। यहां चिकित्सकों और स्वास्थ्यकर्मियों की टीम ने लगातार 32 दिनों तक उसका उपचार और निगरानी की। स्थिति में सुधार होने के बाद 7 अक्टूबर 2026 को बालिका को स्वस्थ अवस्था में अस्पताल से छुट्टी दे दी गई। वह अपने माता-पिता के साथ घर लौट गई।
जन्म के तुरंत बाद बिगड़ी स्थिति
बड़ेराजपुर विकासखंड के ग्राम ओंडाकापार, विश्रामपुरी निवासी बिराजो मरकाम और जेठूराम मरकाम की बालिका का जन्म 6 सितंबर 2026 को सुबह 9:51 बजे हुआ था। जन्म के समय उसका वजन 2.510 किलोग्राम था। जन्म के तुरंत बाद उसकी स्थिति गंभीर हो गई, जिसके बाद उसे तत्काल SNCU में भर्ती कराया गया। बालिका को पेरिनेटल एस्फिक्सिया, सेंट्रल सायनोसिस, सांस रुकने की समस्या, हाइपोथर्मिया, शॉक, मेकोनियम एस्पिरेशन और गर्दन में कैपुट जैसी चिकित्सकीय जटिलताएं थीं। ऐसी स्थिति में विशेषज्ञ उपचार और निरंतर निगरानी आवश्यक थी।
विशेषज्ञ चिकित्सकों की देखरेख में उपचार
नवजात के उपचार में शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ. रुद्र कश्यप और डॉ. राजेश बघेल की महत्वपूर्ण भूमिका रही। सांस लेने में गंभीर परेशानी के कारण बालिका को तीन दिनों तक CPAP सपोर्ट और 12 दिनों तक वेंटिलेशन सपोर्ट दिया गया। संक्रमण के उपचार के लिए चिकित्सकीय परामर्श के अनुसार एंटीबायोटिक दवाएं दी गईं। उपचार के दौरान उसकी स्थिति पर लगातार नजर रखी गई और आवश्यकतानुसार दो बार रक्ताधान भी किया गया। चिकित्सकों और नर्सिंग स्टाफ के समन्वित प्रयासों से बालिका की स्थिति में धीरे-धीरे सुधार होने लगा।
कंगारू मदर केयर से मिली सहायता
बालिका की हालत में सुधार आने के बाद उसकी देखभाल में कंगारू मदर केयर (KMC) को भी शामिल किया गया। स्वास्थ्यकर्मियों ने मां को इसकी सही विधि और महत्व समझाया। इस प्रक्रिया में मां के शरीर की गर्माहट शिशु को मिलती है और मां-शिशु के बीच भावनात्मक जुड़ाव को बढ़ावा मिलता है। अस्पताल से छुट्टी के पहले परिवार को नवजात की स्वच्छता, देखभाल और आगे बरती जाने वाली सावधानियों के बारे में भी जानकारी दी गई।
32 दिनों बाद मिली अस्पताल से छुट्टी
लगातार 32 दिनों के उपचार और निगरानी के बाद 7 अक्टूबर को बालिका को अस्पताल से छुट्टी दी गई। डिस्चार्ज के समय उसका वजन 2.280 किलोग्राम दर्ज किया गया। जन्म के समय गंभीर स्थिति में रही बालिका का घर लौटना परिवार के लिए खुशी का अवसर बना।
कलेक्टर नूपुर राशि पन्ना के मार्गदर्शन तथा सीएमएचओ डॉ. आर.के. चतुर्वेदी और सिविल सर्जन डॉ. पी.एल. मंडावी के मार्गदर्शन में जिले में स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता और समय पर उपचार उपलब्ध कराने पर जोर दिया जा रहा है। यह मामला विशेषज्ञ चिकित्सकीय देखभाल, श्वसन सहायता, संक्रमण नियंत्रण, रक्ताधान, कंगारू मदर केयर और निरंतर निगरानी के महत्व को दर्शाता है। नवजात का सफल उपचार स्वास्थ्य विभाग की टीम के समन्वित प्रयासों का उदाहरण है।