कवर्धा के तरेगांव जंगल कन्या छात्रावास में मनाया गया अंतरराष्ट्रीय बालिका दिवस, छात्राओं को स्वास्थ्य और अधिकारों के प्रति किया जागरूक
छत्तीसगढ़ के कबीरधाम जिले के तरेगांव जंगल स्थित प्री-मैट्रिक आदिवासी कन्या छात्रावास में अंतरराष्ट्रीय बालिका दिवस के अवसर पर जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। छात्राओं को स्वास्थ्य, पोषण, व्यक्तिगत स्वच्छता, शिक्षा, सुरक्षा, लैंगिक समानता और बालिका अधिकारों की जानकारी दी गई। पोस्टर एवं रंगोली प्रतियोगिताओं में छात्राओं ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। प्रतियोगिताओं में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाली छात्राओं को पुरस्कार देकर सम्मानित किया गया।
UNITED NEWS OF ASIA. सौरभ नामदेव, कबीरधाम l छत्तीसगढ़ के कबीरधाम जिले के तरेगांव जंगल स्थित प्री-मैट्रिक आदिवासी कन्या छात्रावास में अंतरराष्ट्रीय बालिका दिवस के अवसर पर जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य छात्राओं को स्वास्थ्य, शिक्षा, सुरक्षा और बालिका अधिकारों के प्रति जागरूक करना तथा उनमें आत्मविश्वास बढ़ाना रहा। इस दौरान विभिन्न गतिविधियों के माध्यम से छात्राओं को अपने अधिकारों के प्रति सजग रहने और जीवन में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया गया।
स्वास्थ्य, पोषण और स्वच्छता पर दी गई जानकारी
कार्यक्रम में छात्राओं को व्यक्तिगत स्वच्छता, किशोरावस्था में होने वाले शारीरिक एवं मानसिक बदलाव, पौष्टिक आहार और बेहतर स्वास्थ्य के महत्व के बारे में विस्तार से जानकारी दी गई। वक्ताओं ने बताया कि किशोरावस्था में शरीर और मन में कई तरह के बदलाव होते हैं। ऐसे समय में संतुलित आहार, साफ-सफाई और स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता आवश्यक है। छात्राओं को किसी भी स्वास्थ्य संबंधी समस्या या परेशानी की स्थिति में विश्वसनीय व्यक्ति से सहायता लेने के लिए भी प्रोत्साहित किया गया।
इस अवसर पर आराधना बंजारे, आकांक्षा लिखार और प्रिया तम्बोली ने छात्राओं को उपयोगी जानकारी दी। उन्होंने कहा कि बालिकाओं को अपने स्वास्थ्य के प्रति सजग रहना चाहिए और किसी भी समस्या को छिपाने के बजाय उचित मार्गदर्शन प्राप्त करना चाहिए। कार्यक्रम के माध्यम से छात्राओं को स्वस्थ जीवनशैली अपनाने और अपनी शिक्षा पर ध्यान केंद्रित करने का संदेश दिया गया।
पोस्टर और रंगोली प्रतियोगिता में दिखी रचनात्मकता
जागरूकता कार्यक्रम के अंतर्गत पोस्टर एवं रंगोली प्रतियोगिता सहित विभिन्न गतिविधियों का आयोजन किया गया। छात्राओं ने उत्साहपूर्वक भाग लेकर अपनी रचनात्मकता और प्रतिभा का प्रदर्शन किया। इन गतिविधियों का उद्देश्य बालिकाओं में आत्मविश्वास विकसित करना और उन्हें अपनी बात प्रभावी ढंग से प्रस्तुत करने के लिए प्रोत्साहित करना था।
प्रतियोगिताओं में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाली छात्राओं को प्रथम, द्वितीय और तृतीय पुरस्कार के साथ सांत्वना पुरस्कार प्रदान कर सम्मानित किया गया। पुरस्कार मिलने से छात्राओं का उत्साह बढ़ा और उन्हें आगे भी ऐसी गतिविधियों में भाग लेने की प्रेरणा मिली।
बालिकाओं के अधिकार और लैंगिक समानता पर जोर
कार्यक्रम में पीसीपीएनडीटी अधिनियम, 1994 के प्रावधानों की जानकारी भी दी गई। छात्राओं को बताया गया कि गर्भधारण पूर्व और प्रसव पूर्व लिंग चयन पर कानूनी प्रतिबंध है। वक्ताओं ने समाज में बेटा-बेटी के बीच भेदभाव समाप्त करने और प्रत्येक बालिका को जन्म लेने का समान अवसर देने की आवश्यकता पर जोर दिया।
उन्होंने कहा कि बालिकाओं को शिक्षा, स्वास्थ्य, सुरक्षा और समान अवसर उपलब्ध कराना समाज की सामूहिक जिम्मेदारी है। बालिकाओं के प्रति सकारात्मक सोच विकसित करने से उन्हें आत्मनिर्भर बनने और अपने भविष्य के लिए बेहतर निर्णय लेने में मदद मिलती है।
स्वास्थ्य विभाग और छात्रावास के कर्मचारी रहे उपस्थित
कार्यक्रम में आराधना बंजारे, डीपीएचएनओ, आकांक्षा लिखार, एनसीडी कंसल्टेंट, प्रिया तम्बोली, बीडीएम सहित आरएमए, सीएचओ, आरएचओ तथा कन्या छात्रावास के शिक्षक-शिक्षिकाएं उपस्थित रहे। सभी ने बालिकाओं के स्वास्थ्य, शिक्षा और अधिकारों के प्रति जागरूकता बढ़ाने के महत्व पर जोर दिया।
तरेगांव जंगल कन्या छात्रावास में आयोजित यह कार्यक्रम बालिकाओं को जागरूक, आत्मविश्वासी और सशक्त बनाने की दिशा में एक प्रयास रहा। इसके माध्यम से छात्राओं को अपने स्वास्थ्य का ध्यान रखने, शिक्षा के प्रति गंभीर रहने और समान अवसरों के साथ आगे बढ़ने का संदेश दिया गया।