निरीक्षण के दौरान छात्राओं ने बताया कि छात्रावास में वेंडिंग मशीन की सुविधा उपलब्ध है, लेकिन पैड डिस्पोजल मशीन नहीं होने से उन्हें परेशानी होती है। छात्राओं ने बिजली की समस्या का भी उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि बिजली की समस्या के कारण पढ़ाई प्रभावित होती है। इसके स्थायी समाधान के लिए छात्राओं ने सोलर पैनल और आपातकालीन लाइट की व्यवस्था करने की मांग रखी।
छात्राओं ने डिजिटल शिक्षा को बेहतर बनाने के लिए छात्रावास में कंप्यूटर की संख्या बढ़ाने और स्मार्ट क्लास के लिए स्मार्ट बोर्ड उपलब्ध कराने की मांग भी की। इसके अलावा छात्राओं ने सूर्यकिरण में रहने की इच्छा व्यक्त की और मुख्यमंत्री से मुलाकात करने की इच्छा भी आयोग अध्यक्ष के सामने रखी। डॉ. वर्णिका शर्मा ने छात्राओं की सभी बातों को गंभीरता से सुना और आवश्यक सुविधाओं के लिए उचित स्तर पर पहल करने का आश्वासन दिया।
निरीक्षण के दौरान आयोग अध्यक्ष ने छात्रावास की स्वच्छता, अनुशासन और व्यवस्थित वातावरण का जायजा लिया। उन्होंने छात्राओं की दिनचर्या और परिसर की व्यवस्थाओं की जानकारी लेते हुए साफ-सफाई एवं अनुशासन को महत्वपूर्ण बताया। छात्राओं के साथ उनका व्यवहार आत्मीय रहा, जिससे छात्राएं भी सहजता और उत्साह के साथ अपनी बातें साझा करती नजर आईं।
डॉ. वर्णिका शर्मा ने कहा कि बच्चों को केवल शिक्षा उपलब्ध कराना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि उनके लिए सुरक्षित, स्वच्छ, सम्मानजनक और सुविधायुक्त वातावरण सुनिश्चित करना भी जरूरी है। बच्चों की आवश्यकताओं और समस्याओं को सीधे सुनकर उनका समाधान करना बाल अधिकारों की प्रभावी सुरक्षा की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।
उन्होंने कहा कि छात्राओं की ओर से रखी गई मांगों और समस्याओं को संबंधित स्तर पर पहुंचाकर आवश्यक कार्रवाई के लिए पहल की जाएगी। छात्रावास में बिजली जैसी मूलभूत सुविधाओं की उपलब्धता के साथ डिजिटल शिक्षा के संसाधनों को मजबूत करने पर भी ध्यान देने की आवश्यकता है, ताकि छात्राओं को पढ़ाई के लिए बेहतर वातावरण मिल सके।
कांकेर में आयोग अध्यक्ष के इस निरीक्षण के दौरान छात्राओं को अपनी समस्याएं सीधे रखने का अवसर मिला। छात्राओं ने भी अपनी जरूरतों को खुलकर साझा किया। आयोग की ओर से बच्चों के अधिकारों, सुरक्षा, शिक्षा और बेहतर जीवन-परिस्थितियों को लेकर ऐसे निरीक्षण और संवाद को महत्वपूर्ण बताया गया।