इंस्पायर अवार्ड योजना से विद्यार्थियों में बढ़ रही वैज्ञानिक सोच, शिक्षा मंत्री ने 40 प्रतिभागियों को किया सम्मानित

रायपुर में आयोजित कार्यक्रम में शिक्षा मंत्री गजेन्द्र यादव ने इंस्पायर मानक योजना के तहत चयनित छत्तीसगढ़ के लगभग 40 विद्यार्थियों को सम्मानित किया। उन्होंने कहा कि योजना बच्चों में वैज्ञानिक सोच, रचनात्मकता और नवाचार को प्रोत्साहित कर रही है। कार्यक्रम में जापान से लौटे पांच प्रतिभागियों ने अपने अनुभव भी साझा किए।

Oct 11, 2026 - 11:26
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इंस्पायर अवार्ड योजना से विद्यार्थियों में बढ़ रही वैज्ञानिक सोच, शिक्षा मंत्री ने 40 प्रतिभागियों को किया सम्मानित

UNITED NEWS OF ASIA. अमृतेश्वर सिंह, रायपुर l छत्तीसगढ़ में विद्यार्थियों के भीतर वैज्ञानिक सोच, रचनात्मकता और नवाचार को बढ़ावा देने के लिए संचालित इंस्पायर अवार्ड योजना महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। इसी क्रम में शिक्षा मंत्री गजेन्द्र यादव ने इंस्पायर मानक योजना के अंतर्गत चयनित प्रदेश के लगभग 40 विद्यार्थियों को सम्मानित किया। रायपुर के बीटीआई ग्राउंड परिसर स्थित एससीआरटी भवन के सभा कक्ष में आयोजित कार्यक्रम में विद्यार्थियों की प्रतिभा और नवाचारी विचारों की सराहना की गई।

शिक्षा मंत्री गजेन्द्र यादव ने कहा कि केंद्र सरकार की पहल से संचालित इंस्पायर अवार्ड योजना बच्चों में वैज्ञानिक दृष्टिकोण विकसित करने का महत्वपूर्ण माध्यम है। प्रत्येक बच्चे में कोई न कोई मौलिक प्रतिभा होती है। जरूरत है उस प्रतिभा को पहचानने और उसे आगे बढ़ने के लिए उचित अवसर उपलब्ध कराने की। उन्होंने विद्यार्थियों को ड्रोन तकनीक, सौर ऊर्जा और दैनिक जीवन में उपयोगी आविष्कारों का उदाहरण देते हुए नए विचारों पर काम करने के लिए प्रेरित किया।

मंत्री ने बताया कि छत्तीसगढ़ से लगभग 80 हजार नवाचारी विचार सामने आए हैं। उन्होंने चयनित विद्यार्थियों को बधाई देते हुए कहा कि उन्हें नवाचार के साथ पढ़ाई में भी उत्कृष्ट प्रदर्शन करना चाहिए। अपने आविष्कारों को समाज के लिए उपयोगी बनाने की दिशा में प्रयास करना जरूरी है। उन्होंने विद्यार्थियों की प्रतिभा को निखारने में सहयोग देने वाले अभिभावकों और शिक्षकों के प्रति भी आभार व्यक्त किया।

नवाचार के लिए प्रयोग और आत्मविश्वास जरूरी

कार्यक्रम में शिक्षा विभाग के सचिव डॉ. कमलप्रीत सिंह ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि नवाचार के लिए रचनात्मक सोच, आत्मविश्वास और लगातार सीखने की इच्छा जरूरी है। नवाचार का अर्थ केवल नई वस्तु का आविष्कार करना नहीं, बल्कि पुराने कार्यों को नए और बेहतर तरीकों से करना भी है। विद्यार्थियों को नए विचार विकसित करने, प्रयोग करने और गलतियों से सीखने की आदत अपनानी चाहिए।

उन्होंने कहा कि विद्यार्थी ग्रामीण, आदिवासी या किसी भी सामाजिक परिवेश से आते हों, उन्हें स्वयं को कम नहीं आंकना चाहिए। सफलता का आधार व्यक्ति की पृष्ठभूमि नहीं, बल्कि उसकी क्षमता, मेहनत और सोच होती है। भाषा के महत्व पर चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि हिंदी, अंग्रेजी, छत्तीसगढ़ी या अन्य कोई भाषा अभिव्यक्ति का माध्यम है। वास्तविक महत्व विषय की समझ, ज्ञान और कार्य करने की योग्यता का है।

जापान से लौटे प्रतिभागियों ने साझा किए अनुभव

कार्यक्रम में विभिन्न जिलों से चयनित 40 विद्यार्थियों को सम्मानित किया गया। इसके साथ ही जुलाई माह में इंस्पायर मानक प्रतियोगिता के अंतर्गत जापान जाने और वहां सीखने का अवसर प्राप्त करने वाले राज्य के पांच प्रतिभागियों को भी सम्मानित किया गया। जापान से लौटे रमन दास मानिकपुरी, समीक्षा साहू, सुनयना और शैयाद अली ने अपने अनुभव साझा किए और विदेश में सीखने के अवसरों के बारे में जानकारी दी।

इस अवसर पर लोक शिक्षण विभाग के संचालक ऋतुराज रघुवंशी, शिक्षा विभाग के वरिष्ठ अधिकारी, चयनित विद्यार्थी और शिक्षक उपस्थित रहे।

कक्षा 6वीं से 12वीं तक के विद्यार्थियों के लिए योजना

इंस्पायर मानक अवार्ड योजना भारत सरकार के विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग द्वारा नेशनल इनोवेशन फाउंडेशन के सहयोग से संचालित की जाती है। इसका उद्देश्य कक्षा 6वीं से 12वीं तक के विद्यार्थियों में वैज्ञानिक सोच, रचनात्मकता और नवाचार को प्रोत्साहित करना है। योजना के अंतर्गत चयनित विद्यार्थियों को उनके मौलिक विचारों पर आधारित प्रोजेक्ट या मॉडल विकसित करने के लिए 10 हजार रुपये की प्रोत्साहन राशि दी जाती है।

इस योजना के माध्यम से विद्यार्थियों को अपनी प्रतिभा प्रदर्शित करने और जिला, राज्य तथा राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताओं में भाग लेने का अवसर मिलता है। कार्यक्रम के जरिए विद्यार्थियों को नए विचारों पर काम करने और विज्ञान के माध्यम से समाज की समस्याओं का समाधान खोजने के लिए प्रेरित किया गया।