गांधी जयंती पर कुष्ठ रोग के प्रति जागरूकता का संदेश, भ्रांतियां दूर करने की अपील
बेमेतरा जिले में गांधी जयंती के अवसर पर स्वच्छता, सेवा, सत्य और अहिंसा के साथ कुष्ठ रोग के प्रति जनजागरूकता का संदेश दिया गया। स्वास्थ्य विभाग ने कुष्ठ रोग को उपचार योग्य बीमारी बताते हुए समय पर जांच और पूर्ण उपचार की आवश्यकता पर जोर दिया। नागरिकों से लक्षण दिखाई देने पर नजदीकी शासकीय स्वास्थ्य केंद्र में जांच कराने और कुष्ठ रोग से प्रभावित लोगों के साथ भेदभाव नहीं करने की अपील की गई।
UNITED NEWS OF ASIA. अरुण पुरेना, बेमेतरा l राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की जयंती के अवसर पर जिले में विभिन्न कार्यक्रमों के माध्यम से स्वच्छता, सेवा, सत्य एवं अहिंसा के साथ-साथ कुष्ठ रोग के प्रति जनजागरूकता का संदेश दिया गया। कार्यक्रमों के माध्यम से लोगों को कुष्ठ रोग से जुड़ी भ्रांतियों को दूर करने और रोग से प्रभावित व्यक्तियों के प्रति संवेदनशीलता तथा सहयोग की भावना रखने के लिए प्रेरित किया गया।
महात्मा गांधी कुष्ठ रोग से प्रभावित व्यक्तियों के प्रति सेवा और संवेदनशीलता के लिए विशेष रूप से जाने जाते थे। उनके विचारों से प्रेरणा लेते हुए स्वास्थ्य विभाग द्वारा आम नागरिकों को कुष्ठ रोग के संबंध में सही जानकारी देने का प्रयास किया गया। लोगों से अपील की गई कि कुष्ठ रोग को लेकर समाज में व्याप्त गलत धारणाओं को दूर करें और रोग से प्रभावित व्यक्ति के साथ किसी भी प्रकार का भेदभाव न करें।
मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. शरद कुमार कोहाड़े ने बताया कि कुष्ठ रोग एक उपचार योग्य बीमारी है। समय पर बीमारी की पहचान और पूर्ण उपचार से रोगी स्वस्थ हो सकता है। उन्होंने कहा कि कुष्ठ रोग के प्रति जागरूकता और शुरुआती जांच से बीमारी के कारण होने वाली दिव्यांगता जैसी जटिलताओं से बचाव में मदद मिल सकती है।
कुष्ठ रोग के प्रमुख लक्षण
स्वास्थ्य विभाग के अनुसार कुष्ठ रोग के संभावित लक्षणों में त्वचा पर हल्के या लाल रंग के ऐसे दाग-धब्बे शामिल हैं, जिनमें संवेदना कम या समाप्त हो गई हो। दाग वाले स्थान पर छूने, गर्म-ठंडा या दर्द का एहसास कम होना भी एक लक्षण हो सकता है।
इसके अलावा हाथ-पैर की उंगलियों में सुन्नपन या झनझनाहट, हाथ-पैर की नसों में मोटापन या दर्द तथा कमजोरी महसूस होना भी ध्यान देने योग्य लक्षण बताए गए हैं। हाथ या पैर की मांसपेशियों में कमजोरी के कारण वस्तुओं को पकड़ने या चलने में परेशानी हो सकती है।
उपचार में देरी होने पर हाथ-पैर की नसों को नुकसान पहुंचने के साथ आंखों से संबंधित जटिलताएं भी सामने आ सकती हैं। ऐसे में शुरुआती स्तर पर लक्षणों की पहचान और स्वास्थ्य केंद्र में जांच महत्वपूर्ण मानी गई है।
जिला कुष्ठ अधिकारी डॉ. बी. राज एवं प्रभारी जिला कुष्ठ सलाहकार ने नागरिकों से अपील की कि बताए गए लक्षणों में से कोई भी लक्षण दिखाई देने पर उसे नजरअंदाज न करें। ऐसे मामलों में नजदीकी शासकीय स्वास्थ्य केंद्र में जांच कराने की सलाह दी गई। कुष्ठ रोग की जांच और उपचार के लिए स्वास्थ्य विभाग से संपर्क करने की अपील भी की गई।
स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों ने कहा कि कुष्ठ रोग से प्रभावित व्यक्ति के साथ किसी भी प्रकार का भेदभाव नहीं किया जाना चाहिए। यह उपचार योग्य बीमारी है और समय पर उपचार शुरू होने से रोगी सामान्य जीवन जी सकता है।
कार्यक्रम के दौरान स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों एवं कर्मचारियों ने आमजन तक कुष्ठ रोग से संबंधित जागरूकता संदेश पहुंचाया। साथ ही लोगों से स्वच्छता, स्वास्थ्य जागरूकता और सामाजिक सद्भाव बनाए रखने की अपील की गई।