उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, वित्तीय वर्ष 2016-17 से 2025-26 तक दुर्ग जिले को प्रधानमंत्री आवास योजना ग्रामीण के तहत कुल 39,346 आवासों का लक्ष्य प्राप्त हुआ। इनमें से 38,952 आवास स्वीकृत किए जा चुके हैं। स्वीकृत आवासों में से 36,609 आवासों का निर्माण पूरा होने की जानकारी दी गई है। इस आधार पर स्वीकृत आवासों के मुकाबले पूर्णता दर 94 प्रतिशत बताई गई है।
योजना के क्रियान्वयन में पारदर्शिता बनाए रखने के लिए आवास-सॉफ्ट और आवास ऐप के माध्यम से प्रक्रिया संचालित किए जाने की जानकारी दी गई है। पंजीकृत हितग्राहियों को आवास निर्माण की पहली, दूसरी और तीसरी किश्त की राशि सीधे उनके आधार-लिंक्ड बैंक खातों में डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर यानी DBT के माध्यम से भेजी जा रही है।
प्रशासन के अनुसार, मई से सितंबर तक पहली, दूसरी और तीसरी किश्त के रूप में हितग्राहियों को 10 करोड़ 50 लाख रुपये से अधिक की राशि जारी की जा चुकी है। निर्माण कार्य की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए आवास निर्माण के अलग-अलग चरणों की जियो-टैगिंग भी की जा रही है। नींव या प्लिंथ, लिंटल और छत के स्तर पर निर्माण की निगरानी किए जाने की जानकारी दी गई है।
आवास निर्माण से जुड़े हितग्राहियों को मजदूरी का लाभ भी योजना के तहत उपलब्ध कराया जा रहा है। प्रत्येक आवास निर्माण के लिए 90 दिनों की अकुशल मजदूरी राशि वी बी जी राम जी योजना के तहत प्रदान किए जाने की जानकारी दी गई है। वित्तीय वर्ष 2024-25 और 2025-26 में पूर्ण हुए 13,598 आवासों के लिए अब तक 31 करोड़ 80 लाख रुपये से अधिक की मजदूरी दिए जाने का दावा किया गया है।
आवासों की गुणवत्ता बेहतर बनाने के लिए जिले में ग्रामीण राजमिस्त्री प्रशिक्षण कार्यक्रम भी संचालित किया गया। इसके तहत स्थानीय राजमिस्त्रियों को आधुनिक निर्माण तकनीकों का प्रशिक्षण देकर प्रमाणित किया गया। प्रशासन के अनुसार, इससे आवास निर्माण की गुणवत्ता में सहायता मिलने के साथ स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर भी विकसित हुए हैं।
जिला प्रशासन की ओर से बताया गया है कि जिन हितग्राहियों के बैंक खातों में आधार मैपिंग या तकनीकी कारणों से किश्त की राशि में देरी हुई, उनकी समस्याओं के समाधान के लिए विशेष शिविर लगाए गए। ब्लॉक स्तर पर अधिकारियों को योजना की प्रगति की नियमित समीक्षा करने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि निर्माण कार्य और भुगतान प्रक्रिया में अनावश्यक देरी न हो।
प्रशासन ने कहा है कि अभी निर्माणाधीन आवासों को अगले 30 से 60 दिनों के भीतर गुणवत्ता के साथ पूरा कराने का प्रयास किया जाएगा। इसके लिए खंड विकास अधिकारी, पंचायत सचिव और ग्राम रोजगार सहायकों के स्तर पर लगातार निगरानी किए जाने की बात कही गई है।
प्रधानमंत्री आवास योजना ग्रामीण के माध्यम से ग्रामीण परिवारों को पक्के आवास उपलब्ध कराने के साथ निर्माण प्रक्रिया में रोजगार, तकनीकी प्रशिक्षण और डिजिटल निगरानी को भी जोड़ा गया है। दुर्ग जिले में उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, योजना के तहत बड़ी संख्या में आवास पूर्ण हो चुके हैं, जबकि शेष निर्माणाधीन आवासों को भी समयबद्ध तरीके से पूरा कराने पर प्रशासन का जोर है।