डीएमएफ परियोजनाओं की निगरानी अब क्यूआर कोड से, घरघोड़ा में शुरू हुआ रियल-टाइम सोशल ऑडिट सिस्टम

रायगढ़ जिले में डीएमएफ परियोजनाओं की निगरानी और पारदर्शिता बढ़ाने के लिए ‘स्टैंडर्डाइज्ड प्रोजेक्ट नेमेनक्लेचर एंड रियल-टाइम क्यूआर सोशल ऑडिट’ प्रणाली शुरू की गई है। घरघोड़ा विकासखंड की 2026-27 की डीएमएफ परियोजनाओं में लागू इस व्यवस्था के तहत हर कार्यस्थल पर क्यूआर पट्टिका लगेगी। इसे स्कैन करने पर परियोजना की स्वीकृत लागत, एजेंसी, तकनीकी जानकारी और प्रगति की जानकारी मिल सकेगी।

Sep 24, 2026 - 13:59
 0  4
डीएमएफ परियोजनाओं की निगरानी अब क्यूआर कोड से, घरघोड़ा में शुरू हुआ रियल-टाइम सोशल ऑडिट सिस्टम

UNITED NEWS OF ASIA. महेंद्र अग्रवाल, रायगढ़ l रायगढ़ जिले में जिला खनिज संस्थान न्यास (डीएमएफ) की परियोजनाओं की निगरानी और पारदर्शिता बढ़ाने के लिए नई डिजिटल व्यवस्था लागू की गई है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय और वित्तमंत्री ओपी चौधरी के सुशासन एवं पारदर्शी प्रशासन के विजन और मार्गदर्शन में जिला प्रशासन ने ‘स्टैंडर्डाइज्ड प्रोजेक्ट नेमेनक्लेचर एंड रियल-टाइम क्यूआर सोशल ऑडिट’ प्रणाली शुरू की है। वित्तीय वर्ष 2026-27 में घरघोड़ा विकासखंड के लिए स्वीकृत डीएमएफ परियोजनाओं में इसे लागू किया गया है।

नई व्यवस्था के तहत प्रत्येक परियोजना को एक मानकीकृत प्रोजेक्ट कोड दिया जाएगा। इस कोड में ब्लॉक, गांव, सेक्टर, वर्ष और क्रमांक को शामिल किया जाएगा। इससे एक ही स्थान या कार्य के लिए दोहरे प्रस्ताव और दोहरे वित्तपोषण की संभावना को रोकने में मदद मिलेगी। साथ ही कलेक्ट्रेट, संबंधित विभाग, इंजीनियरिंग एजेंसी और ट्रेजरी स्तर पर परियोजना की पहचान एक समान रहेगी।

प्रोजेक्ट कोड जनरेट होने के बाद परियोजना से जुड़े दस्तावेजों और स्वीकृतियों को एक केंद्रीकृत डिजिटल फोल्डर में व्यवस्थित किया जाएगा। इससे परियोजना से संबंधित दस्तावेजों को अलग-अलग फाइलों में तलाशने और उनका मिलान करने की प्रक्रिया को आसान बनाया जा सकेगा। परियोजना की स्वीकृति से लेकर क्रियान्वयन और प्रगति तक की जानकारी डिजिटल रूप से उपलब्ध रहेगी।

इस व्यवस्था की अहम कड़ी प्रत्येक परियोजना स्थल पर लगाई जाने वाली वेदरप्रूफ क्यूआर कोड पट्टिका होगी। नागरिक सामान्य स्मार्टफोन कैमरे से क्यूआर कोड स्कैन कर परियोजना से जुड़ी जानकारी देख सकेंगे। इसके लिए किसी विशेष मोबाइल ऐप की आवश्यकता नहीं होगी। क्यूआर कोड के माध्यम से स्वीकृत लागत, संबंधित एजेंसी, तकनीकी जानकारी और परियोजना की प्रगति जैसी जानकारी उपलब्ध होगी।

इस डिजिटल व्यवस्था से खनन प्रभावित क्षेत्रों के ग्रामीणों और ग्राम सभाओं को अपने क्षेत्र में चल रहे विकास कार्यों की जानकारी सीधे प्राप्त करने और उनकी प्रगति की निगरानी करने का अवसर मिलेगा। इससे परियोजनाओं की निगरानी में स्थानीय समुदाय की भागीदारी बढ़ाने का प्रयास किया गया है।

जिला प्रशासन ने भुगतान प्रक्रिया को भी क्यूआर प्रणाली से जोड़ा है। संबंधित ठेकेदार या विभाग को कार्यस्थल पर स्थापित क्यूआर पट्टिका की जियो-टैग और टाइम-स्टैम्प वाली फोटो अपलोड करनी होगी। निर्धारित प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही संबंधित माइलस्टोन भुगतान बिलों की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी।

नई व्यवस्था को प्रभावी ढंग से लागू करने के लिए 24 सितंबर को कलेक्ट्रेट सभा कक्ष में प्रशिक्षण आयोजित किया गया। इसमें घरघोड़ा विकासखंड में डीएमएफ के तहत कार्य करने वाली एजेंसियों के अधिकारी, अनुविभागीय अधिकारी, इंजीनियर और पोर्टल ऑपरेटर शामिल हुए। प्रशिक्षण में पोर्टल के उपयोग, विभागीय प्रविष्टियां, सिस्टम वेरिफिकेशन, परियोजना कोड जनरेशन और कार्यस्थल पर क्यूआर पट्टिका लगाने की प्रक्रिया की जानकारी दी गई।

जिला प्रशासन ने संबंधित एजेंसियों को नई व्यवस्था का अनिवार्य रूप से पालन करने के निर्देश दिए हैं। प्रशासन के अनुसार, इस डिजिटल प्रणाली से डीएमएफ परियोजनाओं की पहचान, दस्तावेजों के रखरखाव, भुगतान प्रक्रिया और जमीनी निगरानी में पारदर्शिता बढ़ेगी तथा नागरिकों को अपने क्षेत्र में हो रहे विकास कार्यों की जानकारी सीधे मिल सकेगी।