छत्तीसगढ़ की शक्तिपीठ परियोजना: पांच प्रमुख देवी मंदिरों का होगा विकास, धार्मिक पर्यटन को मिलेगी नई पहचान
छत्तीसगढ़ सरकार प्रदेश के पांच प्रमुख शक्तिपीठों—डोंगरगढ़ की मां बम्लेश्वरी, रतनपुर की मां महामाया, दंतेवाड़ा की मां दंतेश्वरी, सूरजपुर के कुदरगढ़ धाम और चंद्रपुर की मां चंद्रहासिनी—को धार्मिक पर्यटन सर्किट के रूप में विकसित करने की दिशा में काम कर रही है। शक्तिपीठ परियोजना के तहत मंदिरों में सड़क संपर्क, पेयजल, प्रकाश व्यवस्था, स्वच्छता, पार्किंग, विश्राम स्थल और सुरक्षा जैसी सुविधाओं का विस्तार किया जाएगा। वित्तीय वर्ष 2026-27 के बजट में छत्तीसगढ़ आस्था पथ योजना के लिए पांच करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। इस पहल से श्रद्धालुओं को बेहतर सुविधाएं मिलने के साथ प्रदेश में पर्यटन, स्थानीय रोजगार और आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।
UNITED NEWS OF ASIA. अमृतेश्वर सिंह, रायपुर l छत्तीसगढ़ की समृद्ध धार्मिक और सांस्कृतिक विरासत को नई पहचान देने के उद्देश्य से राज्य सरकार पांच प्रमुख शक्तिपीठों के विकास की दिशा में पहल कर रही है। प्रस्तावित शक्तिपीठ परियोजना के अंतर्गत प्रदेश के प्रमुख देवी मंदिरों को धार्मिक पर्यटन सर्किट के रूप में विकसित किया जाएगा। इस पहल का उद्देश्य श्रद्धालुओं को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने के साथ छत्तीसगढ़ के धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा देना है। जनसंपर्क विभाग के संयुक्त संचालक धनंजय राठौर के विशेष लेख के अनुसार, प्रदेश में पर्यटन की अपार संभावनाएं हैं और धार्मिक स्थलों का व्यवस्थित विकास स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी मजबूती दे सकता है।
छत्तीसगढ़ सरकार उत्तराखंड के चारधाम की तर्ज पर प्रदेश के प्रमुख धार्मिक स्थलों को जोड़ने की योजना पर काम कर रही है। इसके तहत लगभग एक हजार किलोमीटर लंबे आध्यात्मिक एवं धार्मिक पर्यटन कॉरिडोर के विकास की परिकल्पना की गई है। वित्तीय वर्ष 2026-27 के बजट में छत्तीसगढ़ आस्था पथ यानी शक्तिपीठ भ्रमण योजना के लिए पांच करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। इस योजना के माध्यम से श्रद्धालुओं को पांचों प्रमुख शक्तिपीठों के दर्शन कराने और इन स्थलों तक पहुंचने की सुविधाओं को बेहतर बनाने पर जोर दिया जाएगा।
इस धार्मिक सर्किट में राजनांदगांव जिले के डोंगरगढ़ स्थित मां बम्लेश्वरी मंदिर, बिलासपुर जिले के रतनपुर स्थित मां महामाया मंदिर, बस्तर क्षेत्र के दंतेवाड़ा स्थित मां दंतेश्वरी मंदिर, सूरजपुर जिले के कुदरगढ़ धाम और सक्ती जिले के चंद्रपुर स्थित मां चंद्रहासिनी मंदिर को शामिल किया गया है। ये सभी स्थल धार्मिक आस्था के साथ ऐतिहासिक और सांस्कृतिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण हैं।
डोंगरगढ़ की पहाड़ियों पर स्थित मां बम्लेश्वरी मंदिर देश-विदेश के श्रद्धालुओं की आस्था का प्रमुख केंद्र है। रतनपुर का मां महामाया मंदिर कलचुरी कालीन इतिहास और स्थापत्य परंपरा के लिए प्रसिद्ध है। दंतेवाड़ा का मां दंतेश्वरी मंदिर बस्तर की जनजातीय परंपराओं और धार्मिक मान्यताओं का महत्वपूर्ण प्रतीक है। वहीं, सूरजपुर का कुदरगढ़ धाम घने जंगलों और पहाड़ियों के बीच स्थित है, जबकि चंद्रपुर का मां चंद्रहासिनी मंदिर महानदी के तट पर श्रद्धालुओं को आकर्षित करता है।
परियोजना के अंतर्गत इन मंदिरों में बेहतर सड़क संपर्क, स्वच्छ पेयजल, प्रकाश व्यवस्था, सुव्यवस्थित पार्किंग, सामुदायिक शौचालय, बैठने की व्यवस्था, विश्राम स्थल, सुरक्षा प्रबंध और पर्यटक सहायता केंद्र जैसी सुविधाएं विकसित करने की योजना है। जरूरत के अनुसार गार्डन, रेलिंग, सीसीटीवी कैमरे, डिजिटल सूचना प्रणाली, प्राथमिक चिकित्सा केंद्र और होम स्टे जैसी व्यवस्थाओं पर भी ध्यान दिया जाएगा। विकास कार्यों में स्थानीय संस्कृति, वास्तुकला और प्राकृतिक परिवेश के संरक्षण को महत्व देने की बात कही गई है।
रतनपुर स्थित मां महामाया मंदिर के समग्र विकास के लिए केंद्र सरकार की प्रसाद (PRASHAD) योजना के अंतर्गत 200 करोड़ रुपये की कार्ययोजना पर्यटन मंत्रालय को भेजे जाने का उल्लेख भी लेख में किया गया है। इसकी स्वीकृति मिलने के बाद संबंधित एजेंसी तय कर कार्य प्रारंभ किए जाने की बात कही गई है। इसके अलावा डोंगरगढ़, कुदरगढ़, चंद्रपुर और दंतेवाड़ा के शक्तिपीठों के विकास के लिए विस्तृत परियोजना रिपोर्ट तैयार करने की प्रक्रिया का उल्लेख है।
शक्तिपीठ परियोजना से धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा मिलने के साथ स्थानीय लोगों के लिए रोजगार और स्वरोजगार के नए अवसर पैदा होने की संभावना है। होटल, परिवहन, स्थानीय हस्तशिल्प, खानपान और होम स्टे जैसी गतिविधियों को प्रोत्साहन मिल सकता है। इस प्रकार धार्मिक स्थलों का योजनाबद्ध विकास छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण, पर्यटन अधोसंरचना के विस्तार और स्थानीय आर्थिक विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।