छत्तीसगढ़ के ‘रक्षक’ मॉडल को SKOCH गोल्ड अवार्ड, बाल अधिकार संरक्षण में मिली राष्ट्रीय पहचान

छत्तीसगढ़ राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग के ‘रक्षक’ कार्यक्रम को SKOCH गोल्ड अवार्ड से सम्मानित किया गया है। आयोग की अध्यक्ष डॉ. वर्णिका शर्मा के नेतृत्व में तैयार इस पहल का उद्देश्य बाल अधिकार संरक्षण के क्षेत्र में प्रशिक्षित मानव संसाधन तैयार करना है। SKOCH की आधिकारिक प्रदर्शनी के अनुसार ‘रक्षक’ के तहत छत्तीसगढ़ के छह विश्वविद्यालयों के साथ मिलकर पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा इन चाइल्ड राइट्स एंड प्रोटेक्शन शुरू करने की पहल की गई है।

Sep 27, 2026 - 12:19
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छत्तीसगढ़ के ‘रक्षक’ मॉडल को SKOCH गोल्ड अवार्ड, बाल अधिकार संरक्षण में मिली राष्ट्रीय पहचान

UNITED NEWS OF ASIA. अमृतेश्वर सिंह, रायपुर l छत्तीसगढ़ राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग के ‘रक्षक’ कार्यक्रम को राष्ट्रीय स्तर पर SKOCH गोल्ड अवार्ड से सम्मानित किया गया है। आयोग की अध्यक्ष डॉ. वर्णिका शर्मा के नेतृत्व में तैयार इस पहल को बाल अधिकार संरक्षण के क्षेत्र में प्रशिक्षित मानव संसाधन तैयार करने की दिशा में एक पहल के रूप में प्रस्तुत किया गया है। 26 सितंबर 2026 को प्रकाशित रिपोर्टों में इस सम्मान की जानकारी सामने आई है।

SKOCH की आधिकारिक प्रदर्शनी में ‘RAKSHAK’ को छत्तीसगढ़ राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग की पहल के रूप में दर्ज किया गया है। इसे State Government–Women and Child Development श्रेणी में प्रदर्शित किया गया है। SKOCH के अनुसार इस पहल के तहत छत्तीसगढ़ के छह प्रमुख विश्वविद्यालयों—तीन सरकारी और तीन निजी विश्वविद्यालयों—के साथ मिलकर Post Graduate Diploma in Child Rights & Protection (PGDPCR) शुरू करने की दिशा में काम किया गया है।

क्या है ‘रक्षक’ कार्यक्रम?

‘रक्षक’ का उद्देश्य बाल अधिकार संरक्षण के क्षेत्र में प्रशिक्षित मानव संसाधन तैयार करना है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार यह एक वर्षीय, दो सेमेस्टर का पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा पाठ्यक्रम है। इसमें बाल अधिकारों से संबंधित कानूनी, सामाजिक और व्यावहारिक पहलुओं को शामिल किया गया है।

पाठ्यक्रम में विद्यार्थियों को केवल सैद्धांतिक जानकारी तक सीमित रखने के बजाय व्यावहारिक अनुभव से जोड़ने पर जोर दिया गया है। SKOCH की जानकारी के अनुसार इसमें कानूनी एवं सैद्धांतिक ज्ञान के साथ सरकारी योजनाओं और व्यावहारिक कार्य को भी पाठ्यक्रम का हिस्सा बनाया गया है।

इस पहल के पीछे बाल संरक्षण के क्षेत्र में प्रशिक्षित मानव संसाधन की आवश्यकता को प्रमुख आधार बताया गया है। पाठ्यक्रम के माध्यम से ऐसे युवाओं को तैयार करने का प्रयास किया जा रहा है, जो बाल अधिकार, संरक्षण, सामाजिक कार्य और संबंधित क्षेत्रों में आगे काम कर सकें।

आयोग के अनुसार पाठ्यक्रम में बाल संरक्षण से जुड़े विभिन्न कानूनों और विषयों को व्यवस्थित रूप से शामिल किया गया है। इनमें पॉक्सो कानून, किशोर न्याय व्यवस्था, बाल विवाह, बाल श्रम, दत्तक ग्रहण, शिक्षा का अधिकार और बच्चों के पुनर्वास से जुड़े विषय शामिल हैं।

SKOCH की आधिकारिक वेबसाइट पर ‘रक्षक’ को वर्तमान में आयोग की प्रदर्शित परियोजनाओं में शामिल किया गया है। आयोग की ओर से इस पहल को बाल अधिकार संरक्षण के क्षेत्र में संस्थागत क्षमता विकसित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम के रूप में प्रस्तुत किया गया है।

इस सम्मान के साथ छत्तीसगढ़ के बाल अधिकार संरक्षण से जुड़े इस मॉडल को राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा मिली है। इससे बाल संरक्षण के क्षेत्र में अकादमिक प्रशिक्षण और फील्ड आधारित अनुभव को जोड़ने की पहल पर भी ध्यान गया है।

SKOCH के रिकॉर्ड में छत्तीसगढ़ राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग की अन्य पहलें भी पहले दर्ज रही हैं। उदाहरण के लिए, ‘Mor Mayaru Guruji’ परियोजना को SKOCH की ओर से Silver Category में Winner के रूप में दर्ज किया गया था।

‘रक्षक’ कार्यक्रम के माध्यम से आयोग का फोकस बाल अधिकारों की समझ रखने वाले प्रशिक्षित मानव संसाधन तैयार करने और उन्हें व्यावहारिक अनुभव उपलब्ध कराने पर है। इसी पहल को 2026 में SKOCH गोल्ड अवार्ड से राष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिली है।