बिलासपुर में ऑटो-ई-रिक्शा का डिजिटल पंजीकरण शुरू, पहले दिन 3000 से अधिक चालकों ने कराया रजिस्ट्रेशन

बिलासपुर पुलिस ने सार्वजनिक परिवहन को सुरक्षित और पारदर्शी बनाने के लिए ऑटो-ई-रिक्शा का डिजिटल पंजीकरण एवं क्यूआर कोड आधारित पहचान व्यवस्था शुरू की है। आईजी रामगोपाल गर्ग और एसएसपी रजनेश सिंह की मौजूदगी में चेतना भवन में अभियान का शुभारंभ हुआ। पहले दिन 3000 से अधिक ऑटो चालकों ने पंजीकरण कराया। पुलिस ने सभी चालकों को तीन दिनों के भीतर क्यूआर कोड स्कैन कर पंजीकरण पूरा करने की समय-सीमा दी है।

Oct 9, 2026 - 11:16
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बिलासपुर में ऑटो-ई-रिक्शा का डिजिटल पंजीकरण शुरू, पहले दिन 3000 से अधिक चालकों ने कराया रजिस्ट्रेशन

UNITED NEWS OF ASIA. विशु तिवारी, बिलासपुर। शहर में सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था को अधिक सुरक्षित, पारदर्शी और तकनीक-सक्षम बनाने के उद्देश्य से बिलासपुर पुलिस ने ऑटो-ई-रिक्शा के डिजिटल पंजीकरण एवं क्यूआर कोड आधारित पहचान व्यवस्था की शुरुआत की है। गुरुवार, 8 अक्टूबर 2026 को चेतना भवन, पुलिस ग्राउंड बिलासपुर में आयोजित कार्यक्रम में पुलिस महानिरीक्षक रामगोपाल गर्ग और वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक रजनेश सिंह की मौजूदगी में ‘रिक्शा डिजिटल पंजीकरण एवं नागरिक सुरक्षा नेटवर्क’ कार्यक्रम का शुभारंभ किया गया। पुलिस के अनुसार, अभियान के पहले ही दिन 3000 से अधिक ऑटो चालकों ने क्यूआर कोड के माध्यम से डिजिटल पंजीकरण कराया।

इस पहल का उद्देश्य यात्रियों को ऑटो में बैठने से पहले चालक और वाहन की आवश्यक जानकारी उपलब्ध कराना है। योजना के तहत प्रत्येक पंजीकृत ऑटो-ई-रिक्शा को विशिष्ट डिजिटल आईडी और क्यूआर कोड दिया जाएगा। यात्री अपने मोबाइल फोन से क्यूआर कोड स्कैन कर संबंधित वाहन और चालक की उपलब्ध जानकारी देख सकेंगे। इससे यात्रा के दौरान पहचान को लेकर अनिश्चितता कम करने और जरूरत पड़ने पर जानकारी परिजनों या संबंधित व्यक्तियों के साथ साझा करने में सुविधा मिलने की उम्मीद है।

महिलाओं, बुजुर्गों और बच्चों की सुरक्षा पर जोर

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए आईजी रामगोपाल गर्ग ने ऑटो चालकों को पुलिस और सुरक्षा व्यवस्था का महत्वपूर्ण सहयोगी बताया। उन्होंने कहा कि ऑटो चालक शहर और आसपास के क्षेत्रों में नियमित रूप से आवागमन करते हैं, इसलिए उन्हें स्थानीय गतिविधियों की जानकारी रहती है। किसी संदिग्ध गतिविधि या अप्रिय घटना की सूचना समय पर मिलने से अपराधों की रोकथाम में मदद मिल सकती है।

उन्होंने कहा कि सार्वजनिक परिवहन का उपयोग महिलाएं, बच्चे, बुजुर्ग और दूसरे शहरों से आने वाले यात्री भी करते हैं। ऐसे में चालक की पहचान सुनिश्चित होना जरूरी है। क्यूआर कोड आधारित व्यवस्था से यात्रियों को संबंधित चालक की जानकारी प्राप्त करने में सुविधा मिलेगी और सार्वजनिक परिवहन के प्रति विश्वास बढ़ाने में मदद मिल सकती है।

डिजिटल रिकॉर्ड में सुरक्षित रहेंगी जानकारियां

अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक रामगोपाल करियारे ने कार्यक्रम के उद्देश्य और रूपरेखा की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि पंजीकरण के दौरान चालक की पहचान, ड्राइविंग लाइसेंस, वाहन का विवरण, फोटो और अन्य जरूरी जानकारियों का डिजिटल रिकॉर्ड तैयार किया जाएगा। इससे पुलिस और प्रशासन को आवश्यकतानुसार सत्यापन तथा निगरानी में सहायता मिलेगी। आपात स्थिति में वाहन और चालक से जुड़ी जानकारी प्राप्त करना भी अपेक्षाकृत आसान हो सकेगा।

नगर निगम आयुक्त प्रकाश सर्वे ने यातायात व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए वेंडर पॉलिसी के तहत शहर और कस्बों में ठेला, गुमटी तथा दुकानदारों को भी क्यूआर कोड जारी करने की संभावनाओं पर जानकारी दी। उन्होंने कहा कि सड़क किनारे व्यवस्थित गतिविधियों से यातायात दबाव और आवागमन में बाधा जैसी समस्याओं को कम करने में मदद मिल सकती है।

तीन दिन में पंजीकरण कराने की समय-सीमा

बिलासपुर पुलिस ने जिले के सभी ऑटो चालकों से तीन दिनों के भीतर क्यूआर कोड स्कैन कर डिजिटल पंजीकरण कराने की अपील की है। इसके लिए जिले के विभिन्न चौक-चौराहों पर अभियान चलाकर पंजीकरण की व्यवस्था की जाएगी। पुलिस के अनुसार, क्यूआर कोड की उपलब्धता से चालक अलग-अलग स्थानों से ऑनलाइन पंजीकरण भी कर सकेंगे।

कार्यक्रम में एएसपी शहर पंकज पटेल, एएसपी ग्रामीण मधुलिका सिंह, सीएसपी परमेश्वर तिलकवार, तिलेश्वर यादव, सुदीप सरकार, एसडीओपी नूपुर उपाध्याय, डीएसपी शिव चरण परिहार, आरआई भूपेंद्र गुप्ता सहित विभिन्न थानों के प्रभारी, अधिकारी, कर्मचारी और नागरिक उपस्थित रहे। पुलिस का कहना है कि यह पहल डिजिटल पहचान, जवाबदेही और नागरिक सुरक्षा को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।