बस्तर बाढ़ पीड़ितों के लिए ₹1,000 करोड़ के राहत पैकेज की मांग, 5 नवंबर को जगदलपुर में धरना और पैदल मार्च करेंगे संगठन
जनता कांग्रेस छत्तीसगढ़ (जे) और बस्तर अधिकार मुक्ति मोर्चा ने बाढ़ प्रभावित परिवारों को वास्तविक नुकसान के आधार पर मुआवजा देने और बस्तर के लिए ₹1,000 करोड़ का विशेष राहत पैकेज स्वीकृत करने की मांग की है। संगठन 5 नवंबर को जगदलपुर में धरना और पैदल मार्च करेगा। साथ ही निष्पक्ष पुनः सर्वेक्षण, कृषि ऋण माफी, पुनर्वास और बाढ़ प्रबंधन की जांच की मांग को लेकर ज्ञापन सौंपा जाएगा।
UNITED NEWS OF ASIA. जगदलपुर। बस्तर में आई भीषण बाढ़ से प्रभावित परिवारों को वास्तविक नुकसान के अनुरूप मुआवजा देने और राहत एवं पुनर्वास के लिए ₹1,000 करोड़ का विशेष पैकेज स्वीकृत करने की मांग को लेकर जनता कांग्रेस छत्तीसगढ़ (जे) और बस्तर अधिकार मुक्ति मोर्चा ने आंदोलन का ऐलान किया है। संगठन की ओर से 5 नवंबर को जगदलपुर में प्रभावित परिवारों के साथ एक दिवसीय धरना और पैदल मार्च आयोजित किया जाएगा।
संगठन का आरोप है कि बाढ़ से हुए नुकसान का सरकारी सर्वेक्षण प्रभावित परिवारों की वास्तविक स्थिति को पर्याप्त रूप से सामने नहीं ला रहा है। इसी मुद्दे पर जगदलपुर के जनता दरबार में तीन घंटे तक बैठक हुई। बैठक की अध्यक्षता जिला प्रभारी एवं संभागीय महामंत्री रामनाथ नेगी ने की, जबकि प्रदेश उपाध्यक्ष और बस्तर अधिकार मुक्ति मोर्चा के मुख्य संयोजक नवनीत चाँद ने नेतृत्व किया। बैठक में ग्रामीण जिला अध्यक्ष संतु कश्यप, जगदलपुर विधानसभा अध्यक्ष ओम मरकाम और प्रभावित ग्राम पंचायतों एवं नगरीय वार्डों के प्रतिनिधि मौजूद रहे।
5 नवंबर को धरना, पैदल मार्च और ज्ञापन
संगठन के अनुसार, 5 नवंबर को बाढ़ प्रभावित परिवार अपने नुकसान का विवरण लेकर धरना और पैदल मार्च में शामिल होंगे। इसके बाद कलेक्ट्रेट कार्यालय और भाजपा प्रदेश अध्यक्ष कार्यालय में मुख्यमंत्री, भाजपा प्रदेश अध्यक्ष एवं जिला प्रशासन के नाम आवेदन सहित ज्ञापन सौंपा जाएगा। इसमें निष्पक्ष पुनः सर्वेक्षण, उचित मुआवजा, कृषि ऋण माफी और प्रभावित परिवारों के पुनर्वास की मांग की जाएगी।
दस सूत्रीय मांगों में मुआवजा और जांच शामिल
संगठन ने दस प्रमुख मांगें रखी हैं। इनमें पूर्ण क्षतिग्रस्त मकानों के लिए न्यूनतम ₹5 लाख और आंशिक क्षति पर ₹1 लाख मुआवजा शामिल है। बर्बाद फसलों के लिए कृषि ऋण माफी अथवा ₹62,000 प्रति एकड़ विशेष सहायता देने की मांग भी की गई है।
इसके अलावा बाढ़ में मृत लोगों के परिवारों को ₹25 लाख सहायता और एक पात्र सदस्य को सरकारी नौकरी देने की विशेष नीति बनाने की मांग रखी गई है। संगठन ने बस्तर के लिए ₹1,000 करोड़ का विशेष राहत एवं पुनर्वास पैकेज स्वीकृत करने तथा राजस्व, कृषि, पंचायत और नगरीय निकाय की संयुक्त टीम से प्रभावितों की मौजूदगी में पुनः सर्वे कराने की मांग की है।
ज्ञापन में ओडिशा के खाटीगुड़ा बांध से जलप्रवाह और चेतावनी व्यवस्था की स्वतंत्र जांच, जिला आपदा प्रबंधन तैयारियों का ऑडिट, जगदलपुर में पिछले दस वर्षों के ड्रेनेज एवं निर्माण कार्यों की तकनीकी और वित्तीय जांच तथा इंद्रावती नदी के बाढ़ क्षेत्र और प्राकृतिक जल निकासी मार्गों से जुड़े मुद्दों की समीक्षा की मांग भी शामिल है। संगठन मुख्यमंत्री, मंत्रियों, सांसदों, विधायकों, प्रशासन और प्रभावित प्रतिनिधियों की सर्वदलीय बैठक बुलाने की मांग भी करेगा।
30 दिन की समय-सीमा, आंदोलन की चेतावनी
नवनीत चाँद ने कहा कि बाढ़ पीड़ितों को केवल औपचारिक सर्वेक्षण नहीं, बल्कि वास्तविक नुकसान के आधार पर मुआवजा मिलना चाहिए। उन्होंने किसानों की कर्ज माफी अथवा ₹62,000 प्रति एकड़ सहायता और बस्तर के लिए विशेष राहत पैकेज स्वीकृत करने की मांग दोहराई।
रामनाथ नेगी ने समयबद्ध और लिखित निर्णय की जरूरत बताई। संतु कश्यप ने गांव-गांव से प्रभावित परिवारों के आवेदन तैयार कराने की बात कही, जबकि ओम मरकाम ने बाढ़ प्रभावित वार्डों के पुनः सर्वेक्षण और ड्रेनेज व्यवस्था की जांच पर जोर दिया।
संगठन ने सरकार और प्रशासन को 30 दिन की समय-सीमा देने की बात कही है। इस अवधि में मांगों पर लिखित निर्णय नहीं होने पर प्रभावित गांवों, पंचायतों और वार्डों को जोड़कर चरणबद्ध जनआंदोलन चलाने की चेतावनी दी गई है। ये सभी मांगें संगठन की ओर से रखी गई हैं।