बस्तर दशहरा के लिए कोण्डागांव के पारंपरिक पदाधिकारियों को मिले वस्त्र-परिधान, 5 करोड़ से बनेगा आदिवासी संस्कृति संग्रहालय

कोण्डागांव में बस्तर दशहरा में शामिल होने वाले मांझी-चालकी, गायता-पुजारी, मेंबर-मेम्बरीन एवं पटेल को पारंपरिक वस्त्र-परिधान प्रदान किए गए। कार्यक्रम में विधायक लता उसेण्डी ने आदिवासी संस्कृति के संरक्षण और संवर्धन के लिए 5 करोड़ रुपये की लागत से संग्रहालय निर्माण की जानकारी दी।

Oct 19, 2026 - 11:29
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बस्तर दशहरा के लिए कोण्डागांव के पारंपरिक पदाधिकारियों को मिले वस्त्र-परिधान, 5 करोड़ से बनेगा आदिवासी संस्कृति संग्रहालय

UNITED NEWS OF ASIA. रामकुमार भारद्वाज, कोण्डागांव l बस्तर दशहरा की पारंपरिक गरिमा और समृद्ध आदिवासी संस्कृति को आगे बढ़ाने की दिशा में जिला प्रशासन द्वारा महत्वपूर्ण पहल की गई। बस्तर दशहरा में शामिल होने के लिए जिले के मांझी-चालकी, गायता-पुजारी, मेंबर-मेम्बरीन एवं पटेल को पारंपरिक वस्त्र-परिधान प्रदान किए गए। जिला कार्यालय के सभाकक्ष में शनिवार को आयोजित कार्यक्रम में बस्तर विकास प्राधिकरण की उपाध्यक्ष एवं कोण्डागांव विधायक लता उसेण्डी, कलेक्टर नूपुर राशि पन्ना और नगर पालिका अध्यक्ष नरपति पटेल सहित अन्य अतिथियों ने पारंपरिक पदाधिकारियों को वस्त्र-परिधान वितरित किए।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए विधायक लता उसेण्डी ने कहा कि बस्तर दशहरा केवल एक पर्व नहीं, बल्कि वर्षों पुरानी परंपरा, सांस्कृतिक विरासत और समृद्ध आदिवासी संस्कृति का प्रतीक है। यह आयोजन बस्तर की विशिष्ट पहचान को दर्शाता है और लोगों को अपनी परंपराओं, रीति-रिवाजों तथा सांस्कृतिक मूल्यों से जोड़ता है। उन्होंने कहा कि समय के साथ बदलाव स्वाभाविक है, लेकिन अपनी संस्कृति और परंपराओं को सहेजकर अगली पीढ़ी तक पहुंचाना हम सभी की जिम्मेदारी है।

विधायक लता उसेण्डी ने आदिवासी संस्कृति के संरक्षण और संवर्धन के लिए कोण्डागांव में 5 करोड़ रुपये की लागत से संग्रहालय का निर्माण किए जाने की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि यह संग्रहालय क्षेत्र की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। इसके माध्यम से नई पीढ़ी को आदिवासी समाज की परंपराओं, रीति-रिवाजों, ऐतिहासिक पहचान और सांस्कृतिक जीवनशैली को जानने तथा समझने का अवसर मिलेगा। इससे आने वाली पीढ़ियों में अपनी जड़ों और विरासत के प्रति जागरूकता बढ़ाने में भी मदद मिलेगी।

उन्होंने बस्तर दशहरा में शामिल होने वाले सभी पारंपरिक पदाधिकारियों को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि सांस्कृतिक परंपराओं को जीवंत बनाए रखने के लिए समाज की सहभागिता जरूरी है। नई पीढ़ी को अपनी संस्कृति से परिचित कराना और परंपराओं के प्रति सम्मान की भावना विकसित करना समय की आवश्यकता है। उन्होंने आशा व्यक्त की कि सामूहिक प्रयासों से बस्तर की सांस्कृतिक विरासत आने वाले समय में और समृद्ध होगी।

कार्यक्रम में कलेक्टर नूपुर राशि पन्ना और नगर पालिका अध्यक्ष नरपति पटेल ने बस्तर दशहरा में शामिल होने के लिए जिला प्रशासन द्वारा की गई व्यवस्थाओं की जानकारी दी। उन्होंने पारंपरिक पदाधिकारियों की यात्रा को सुरक्षित और सुव्यवस्थित बनाने के लिए आवश्यक इंतजामों का उल्लेख करते हुए सभी की मंगलमय यात्रा की कामना की।

इस अवसर पर अशोक ब्रह्मजी, जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी अविनाश भोई, आदिवासी विकास विभाग के सहायक आयुक्त कृपेन्द्र तिवारी, निर्मल शार्दुल सहित जिले के विभिन्न क्षेत्रों से आए मांझी-चालकी, गायता-पुजारी, मेंबर-मेम्बरीन एवं पटेल उपस्थित रहे। वस्त्र-परिधान वितरण कार्यक्रम ने बस्तर दशहरा की परंपराओं के प्रति सम्मान और आदिवासी संस्कृति के संरक्षण का संदेश दिया।