बलरामपुर: वन विभाग के पौधारोपण पर उठे सवाल, कागजों में 6,771 पौधे, जमीन पर धान-मक्का की खेती

बलरामपुर जिले के चांदो वन परिक्षेत्र के इदरीकला में वर्ष 2022-23 के दौरान 61.610 हेक्टेयर भूमि पर 6,771 पौधे लगाए जाने का रिकॉर्ड बताया गया है। लेकिन मौके पर पौधों के बजाय धान और मक्का की फसल दिखाई देने का दावा किया गया है। मामले ने पौधारोपण कार्य, सरकारी राशि के उपयोग और वन भूमि पर खेती को लेकर सवाल खड़े किए हैं। वन परिक्षेत्र अधिकारी ने जल्द स्थल निरीक्षण करने की बात कही है।

Oct 11, 2026 - 13:30
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बलरामपुर: वन विभाग के पौधारोपण पर उठे सवाल, कागजों में 6,771 पौधे, जमीन पर धान-मक्का की खेती

UNITED NEWS OF ASIA. अली खान, बलरामपुर l जिले के चांदो वन परिक्षेत्र से पौधारोपण कार्य में कथित अनियमितता और वन भूमि पर खेती किए जाने का मामला सामने आया है। बीट चांदो के अंतर्गत ग्राम पंचायत इदरीकला में वर्ष 2022-23 के दौरान कक्ष क्रमांक P-3283 की 61.610 हेक्टेयर भूमि पर 6,771 पौधे लगाए जाने का रिकॉर्ड होने की जानकारी दी गई है। हालांकि, संबंधित स्थल के निरीक्षण में पौधों के बजाय धान और मक्का की फसल दिखाई देने का दावा किया गया है। इस स्थिति ने पौधारोपण कार्य की वास्तविकता और वन विभाग की निगरानी व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

कागजों में पौधारोपण, मौके पर धान-मक्का की फसल

सरकार पर्यावरण संरक्षण और हरित क्षेत्र बढ़ाने के उद्देश्य से पौधारोपण अभियान चलाती है। इसके लिए वन क्षेत्रों में पौधे लगाने और उनकी देखरेख की व्यवस्था की जाती है। लेकिन इदरीकला में सामने आए इस मामले में रिकॉर्ड और जमीनी स्थिति के बीच अंतर होने का दावा किया जा रहा है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, जिस क्षेत्र में पौधारोपण किया जाना बताया गया है, वहां तार घेराव के भीतर स्थानीय ग्रामीणों द्वारा धान और मक्का की खेती की जा रही है।

यदि स्थल पर पौधे मौजूद नहीं हैं और उनकी जगह फसल उगाई जा रही है, तो यह जांच का विषय है कि पौधारोपण कार्य वास्तव में हुआ था या नहीं। साथ ही, लगाए गए पौधों की देखरेख, उनकी जीवित रहने की स्थिति और संबंधित कार्य पर खर्च की गई सरकारी राशि की जानकारी भी सामने आनी चाहिए। फिलहाल इन बिंदुओं पर आधिकारिक जांच के निष्कर्ष उपलब्ध नहीं हैं।

वन परिक्षेत्र अधिकारी ने कही निरीक्षण की बात

मामले को लेकर जब चांदो के वन परिक्षेत्र अधिकारी से संपर्क किया गया, तो उन्होंने बताया कि उनकी पदस्थापना हाल ही में हुई है और वे अभी संबंधित बीट का दौरा नहीं कर पाए हैं। अधिकारी के अनुसार, उन्होंने अब तक मौके पर जाकर स्थिति का निरीक्षण नहीं किया है और जल्द ही क्षेत्र का दौरा कर वास्तविक स्थिति देखेंगे।

अधिकारी के इस बयान के बाद यह सवाल उठ रहा है कि पौधारोपण स्थल की नियमित निगरानी किस स्तर पर की गई और वहां पौधों की स्थिति का आकलन कब हुआ था। हालांकि, केवल स्थल निरीक्षण नहीं होने के आधार पर सरकारी राशि के गबन की पुष्टि नहीं की जा सकती। इसके लिए विभागीय रिकॉर्ड, भुगतान संबंधी दस्तावेज और भौतिक सत्यापन की जांच जरूरी होगी।

वन भूमि पर खेती और निगरानी व्यवस्था पर सवाल

मामले में वन भूमि पर कथित खेती को लेकर भी सवाल उठाए जा रहे हैं। यदि संबंधित भूमि वन विभाग के अधीन है और वहां बिना अनुमति खेती की जा रही है, तो विभाग को भूमि की स्थिति और अतिक्रमण से जुड़े तथ्यों की जांच करनी होगी। इसके साथ ही यह भी स्पष्ट होना चाहिए कि पौधारोपण के लिए निर्धारित क्षेत्र में सुरक्षा और निगरानी की क्या व्यवस्था थी।

स्थानीय स्तर पर इस मामले की उच्चस्तरीय जांच की मांग किए जाने की बात सामने आई है। जांच में पौधारोपण के रिकॉर्ड, पौधों की संख्या, कार्य की लागत, भुगतान, रखरखाव और वर्तमान स्थल की स्थिति का मिलान किया जाना महत्वपूर्ण होगा।

जांच के बाद ही स्पष्ट होगी वास्तविक स्थिति

इदरीकला का यह मामला पौधारोपण योजनाओं की निगरानी और सरकारी संसाधनों के उपयोग की पारदर्शिता से जुड़ा है। यदि रिकॉर्ड और वास्तविक स्थिति में अंतर पाया जाता है, तो जिम्मेदारी तय करने के लिए संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों की भूमिका की जांच की जानी चाहिए। वहीं, वन भूमि पर अवैध कब्जे की पुष्टि होने पर नियमानुसार कार्रवाई का प्रश्न भी उठेगा।

फिलहाल 6,771 पौधों के रिकॉर्ड और मौके पर धान-मक्का की खेती किए जाने के दावे की आधिकारिक पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी। अब देखना होगा कि वन विभाग कब स्थल निरीक्षण करता है और पौधारोपण कार्य तथा भूमि की स्थिति को लेकर क्या तथ्य सामने आते हैं।