आंजनेय यूनिवर्सिटी में एआईसीटीई प्रायोजित अटल कार्यक्रम, ब्लू इकोनॉमी को सतत विकास की महत्वपूर्ण कड़ी बताया

आंजनेय यूनिवर्सिटी में एआईसीटीई प्रायोजित दो दिवसीय अटल कार्यक्रम का आयोजन किया गया। “ब्लू इकोनॉमी : ए पाथवे टू सस्टेनेबल डेवलपमेंट एंड इंडियाज़ इकोनॉमिक ग्रोथ” विषय पर आयोजित कार्यक्रम में जल संरक्षण, समुद्री ऊर्जा, जल संसाधन प्रबंधन, सतत मत्स्य पालन और पर्यावरण संरक्षण सहित विभिन्न विषयों पर विशेषज्ञों ने विचार साझा किए। समापन अवसर पर बीएससी विद्यार्थियों ने लोक नृत्य की प्रस्तुति दी।

Oct 8, 2026 - 08:32
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आंजनेय यूनिवर्सिटी में एआईसीटीई प्रायोजित अटल कार्यक्रम, ब्लू इकोनॉमी को सतत विकास की महत्वपूर्ण कड़ी बताया

UNITED NEWS OF ASIA. हसीब अख्तर, रायपुर l आंजनेय यूनिवर्सिटी के फैकल्टी ऑफ साइंस के डिपार्टमेंट ऑफ मैथमेटिक्स एवं डिपार्टमेंट ऑफ जूलॉजी द्वारा एआईसीटीई प्रायोजित अटल कार्यक्रम का आयोजन किया गया। “ब्लू इकोनॉमी : ए पाथवे टू सस्टेनेबल डेवलपमेंट एंड इंडियाज़ इकोनॉमिक ग्रोथ” विषय पर आयोजित इस दो दिवसीय कार्यक्रम में ब्लू इकोनॉमी के विभिन्न आयामों के साथ जल एवं समुद्री संसाधनों के संरक्षण, पर्यावरणीय सुरक्षा और सतत विकास में उनकी भूमिका पर विशेषज्ञों ने विस्तार से विचार साझा किए।

कार्यक्रम में मुख्य अतिथि डॉ. एल. के. परगनिहा, गेस्ट ऑफ ऑनर डॉ. एन. मरिमुथु, डायरेक्टर जनरल डॉ. बी. सी. जैन, कुलपति डॉ. टी. रामाराव, डायरेक्टर डॉ. जयेंद्र नारंग, डायरेक्टर एकेडमिक्स डॉ. संध्या वर्मा और रजिस्ट्रार डॉ. रुपाली चौधरी सहित अन्य गणमान्यजन उपस्थित रहे। कार्यक्रम के दौरान ब्लू इकोनॉमी को पर्यावरणीय संरक्षण और आर्थिक विकास के बीच संतुलन स्थापित करने वाली महत्वपूर्ण अवधारणा के रूप में रेखांकित किया गया।

विशेषज्ञों ने बताया कि ब्लू इकोनॉमी के अंतर्गत समुद्री और जल संसाधनों का संरक्षण करते हुए उनके जिम्मेदार एवं सतत उपयोग को आर्थिक विकास से जोड़ा जाता है। समुद्री जैव विविधता के संरक्षण, नवीकरणीय समुद्री ऊर्जा, जल संसाधन प्रबंधन, जल संरक्षण, पर्यावरण संरक्षण और सतत मत्स्य पालन जैसे क्षेत्र भारत के सतत विकास और आर्थिक संभावनाओं से जुड़े हुए हैं। इस दौरान प्रतिभागियों को इन क्षेत्रों के वैज्ञानिक, पर्यावरणीय और आर्थिक पक्षों की जानकारी दी गई।

कार्यक्रम के पहले दिन आयोजित तकनीकी सत्रों में डॉ. एन. मरिमुथु ने कोरल रीफ संरक्षण एवं तटीय पारिस्थितिकी तंत्र की स्थिरता पर विचार रखे। डॉ. राजेश कुमार राय ने नवीकरणीय समुद्री ऊर्जा, डॉ. रंजू गुप्ता ने जल संसाधन प्रबंधन और डॉ. पार्वती पटेल ने सतत मत्स्य पालन से जुड़े विषयों पर विशेषज्ञ व्याख्यान दिए। सत्रों में समुद्री एवं जल संसाधनों के संरक्षण तथा उनके जिम्मेदार उपयोग पर विस्तार से चर्चा की गई।

दूसरे दिन श्री प्रहलाद ने जल संरक्षण एवं प्रबंधन और सतत विकास के बीच संबंध पर अपने विचार साझा किए। डॉ. राज किशोर चौधरी ने सतत पर्यावरण एवं विकास तथा प्रो. अनुभूति कौशले ने जल स्थिरता एवं पर्यावरण संरक्षण पर जानकारी दी। अंतिम सत्र में एस. के. राजीव नायर, डीन, सीएसआईटी, दुर्ग ने “बीकम द बेस्ट वर्जन ऑफ योरसेल्फ” विषय पर इंटरैक्टिव और प्रेरणादायी सत्र लिया। इसमें प्रतिभागियों ने सक्रिय रूप से भाग लिया।

दो दिवसीय कार्यक्रम के समापन अवसर पर बीएससी विद्यार्थियों ने आकर्षक लोक नृत्य की सांस्कृतिक प्रस्तुति दी। पारंपरिक लोक संस्कृति से जुड़ी प्रस्तुति ने कार्यक्रम में उत्साह का माहौल बनाया। उपस्थित अतिथियों, शिक्षकों और प्रतिभागियों ने विद्यार्थियों की प्रस्तुति की सराहना की।

कार्यक्रम के माध्यम से प्रतिभागियों को जल एवं समुद्री संसाधनों के संरक्षण, पर्यावरणीय जिम्मेदारी और सतत विकास के विभिन्न पहलुओं को समझने का अवसर मिला। दो दिनों तक चले अकादमिक विमर्श में कोरल रीफ संरक्षण, समुद्री ऊर्जा, जल प्रबंधन, सतत मत्स्य पालन, जल संरक्षण और पर्यावरण संरक्षण जैसे विषय प्रमुख रहे। वैलिडिक्टरी सत्र और सांस्कृतिक प्रस्तुति के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ।