सिम्स बिलासपुर में अगस्त में 4,300 से अधिक हेपेटाइटिस जांच, बी और सी के संक्रमण की पहचान पर जोर
छत्तीसगढ़ आयुर्विज्ञान संस्थान (सिम्स), बिलासपुर में राष्ट्रीय वायरल हेपेटाइटिस नियंत्रण कार्यक्रम के तहत अगस्त 2026 में हेपेटाइटिस बी और सी सहित अन्य प्रकारों की जांच की गई। रिपोर्ट के अनुसार, हेपेटाइटिस बी और सी की रैपिड जांच में क्रमशः 48 और 19 लोग पॉजिटिव मिले। विशेषज्ञों ने समय पर जांच, चिकित्सकीय परामर्श, सुरक्षित रक्त और सुई के उपयोग तथा हेपेटाइटिस बी के टीकाकरण को महत्वपूर्ण बताया।
UNITED NEWS OF ASIA. बिलासपुर l छत्तीसगढ़ आयुर्विज्ञान संस्थान (सिम्स), बिलासपुर में राष्ट्रीय वायरल हेपेटाइटिस नियंत्रण कार्यक्रम के तहत हेपेटाइटिस बी, सी, ए और ई की जांच की जा रही है। माइक्रोबायोलॉजी विभाग की अगस्त 2026 की रिपोर्ट के अनुसार, एक महीने के दौरान इन चार प्रकार के हेपेटाइटिस की जांच के लिए कुल 4,279 स्क्रीनिंग की गईं। जांच का उद्देश्य संक्रमण की समय पर पहचान कर मरीजों को आगे के परीक्षण और उपचार से जोड़ना है।
रिपोर्ट के मुताबिक, हेपेटाइटिस बी की रैपिड जांच में 2,087 लोगों की स्क्रीनिंग की गई, जिनमें 48 लोग पॉजिटिव पाए गए। वहीं, हेपेटाइटिस सी की रैपिड जांच में 2,083 लोगों की जांच हुई और 19 लोगों की रिपोर्ट पॉजिटिव रही। इसके अतिरिक्त हेपेटाइटिस ए के 57 और हेपेटाइटिस ई के 52 लोगों की जांच की गई। हेपेटाइटिस ए में एक व्यक्ति पॉजिटिव मिला, जबकि हेपेटाइटिस ई की जांच में कोई पॉजिटिव मामला दर्ज नहीं हुआ।
विभागीय रिपोर्ट में आगे की जांच के आंकड़े भी सामने आए हैं। हेपेटाइटिस बी की एलिसा जांच में 77 लोगों में से 63 की रिपोर्ट पॉजिटिव रही, जबकि वायरल लोड जांच में 42 में से 25 लोगों में संक्रमण की पुष्टि दर्ज की गई। इसी तरह, हेपेटाइटिस सी की एलिसा जांच में 38 लोगों में से 30 पॉजिटिव पाए गए।
वायरल लोड जांच में शामिल 12 लोगों में कोई पॉजिटिव मामला नहीं मिला। ये आंकड़े अलग-अलग जांच चरणों से संबंधित हैं, इसलिए इन्हें अलग-अलग व्यक्तियों की कुल संख्या नहीं माना जाना चाहिए।सिम्स के अधिष्ठाता डॉ. रमणेश मूर्ति ने कहा कि वायरल हेपेटाइटिस की रोकथाम और नियंत्रण में समय पर जांच, सही निदान और वैज्ञानिक उपचार की अहम भूमिका है। हेपेटाइटिस बी और सी के संक्रमण शुरुआती अवस्था में कई बार स्पष्ट लक्षण नहीं दिखाते।
ऐसे में जोखिम की स्थिति में जांच कराना और रिपोर्ट के आधार पर विशेषज्ञ चिकित्सक से परामर्श लेना जरूरी है। एलिसा और वायरल लोड जैसी जांचें संक्रमण की स्थिति का आकलन करने तथा उपचार संबंधी निर्णय लेने में मदद करती हैं।
माइक्रोबायोलॉजी विभागाध्यक्ष डॉ. रेखा बारापात्रे ने बताया कि हेपेटाइटिस से बचाव के लिए स्वच्छ पानी और सुरक्षित भोजन का सेवन, हाथों की नियमित सफाई तथा सुरक्षित रक्त और स्टरलाइज्ड सुई का उपयोग आवश्यक है। उन्होंने हेपेटाइटिस बी से बचाव के लिए टीकाकरण कराने और जांच में पॉजिटिव आने पर चिकित्सकीय सलाह के अनुसार आगे की जांच तथा उपचार लेने पर जोर दिया।
हेपेटाइटिस बी के लिए टीकाकरण प्रभावी बचाव का उपाय है, जबकि हेपेटाइटिस सी का उपचार उपलब्ध दवाओं से संभव है। विशेषज्ञों ने लोगों को बिना चिकित्सकीय सलाह के स्वयं दवा लेने से बचने और रक्तदान सहित सभी चिकित्सकीय प्रक्रियाओं में सुरक्षा मानकों का पालन करने की सलाह दी। सिम्स में संचालित यह कार्यक्रम संक्रमण की पहचान, उपचार से जुड़ाव और जनजागरूकता बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण प्रयास है।