छत्तीसगढ़ में मातृ-नवजात मृत्यु दर घटाने की तैयारी, ‘सुमन रोडमैप 2030’ पर रायपुर में राज्य स्तरीय कार्यशाला

छत्तीसगढ़ में मातृ एवं नवजात मृत्यु दर कम करने और स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत बनाने के उद्देश्य से रायपुर में ‘सुमन रोडमैप 2030’ पर राज्य स्तरीय कार्यशाला आयोजित की गई। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग और झपाइगो के तकनीकी सहयोग से आयोजित इस कार्यशाला में 12 हाई-फोकस जिलों में गुणवत्तापूर्ण मातृत्व सेवाओं के विस्तार, आपातकालीन प्रसूति प्रबंधन, जिला कार्ययोजना और विभागीय समन्वय पर जोर दिया गया।

Oct 16, 2026 - 11:05
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छत्तीसगढ़ में मातृ-नवजात मृत्यु दर घटाने की तैयारी, ‘सुमन रोडमैप 2030’ पर रायपुर में राज्य स्तरीय कार्यशाला

UNITED NEWS OF ASIA. अमृतेश्वर सिंह, रायपुर l छत्तीसगढ़ में मातृ एवं नवजात मृत्यु दर को न्यूनतम स्तर तक लाने और स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता में सुधार करने के उद्देश्य से राजधानी रायपुर में ‘सुमन (सुरक्षित मातृत्व आश्वासन) रोडमैप 2030’ पर एक दिवसीय राज्य स्तरीय कार्यशाला आयोजित की गई। होटल बेबीलोन इंटरनेशनल में आयोजित इस कार्यशाला का आयोजन स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग ने झपाइगो (JHPIEGO) के तकनीकी सहयोग से किया। इसमें वर्ष 2030 तक माताओं और नवजात शिशुओं के स्वास्थ्य की स्थिति बेहतर बनाने के लिए आवश्यक रणनीतियों और कार्ययोजनाओं पर चर्चा की गई।

कार्यशाला का आयोजन स्वास्थ्य सेवाओं के आयुक्त सह संचालक एवं राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन, छत्तीसगढ़ के मिशन संचालक संजीव कुमार झा के निर्देशन में हुआ। संयुक्त संचालक (मातृ स्वास्थ्य) डॉ. निर्मला यादव और उपसंचालक (मातृ स्वास्थ्य कार्यक्रम) डॉ. स्मृति देवांगन के नेतृत्व में आयोजित इस कार्यक्रम में मातृ स्वास्थ्य से जुड़ी योजनाओं की प्राथमिकताओं की समीक्षा की गई। विशेषज्ञों ने स्थानीय जरूरतों के अनुरूप योजनाओं को प्रभावी तरीके से लागू करने, मैदानी स्तर पर आने वाली चुनौतियों को समझने और बेहतर कार्य-पद्धतियों को साझा करने पर जोर दिया।

12 प्राथमिकता वाले जिलों पर विशेष फोकस

कार्यशाला में प्रदेश के 12 हाई-फोकस जिलों—बेमेतरा, बीजापुर, धमतरी, दंतेवाड़ा, कांकेर, खैरागढ़-छुईखदान-गंडई, कोंडागांव, महासमुंद, मोहला-मानपुर-अंबागढ़ चौकी, नारायणपुर, राजनांदगांव और सरगुजा—में स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत बनाने पर विशेष ध्यान दिया गया। इन जिलों की प्रथम संदर्भन इकाइयों (FRU), जिला अस्पतालों (DH) और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों (CHC) में गुणवत्तापूर्ण सुविधाओं का विस्तार करने तथा स्थानीय आवश्यकताओं के आधार पर जिला कार्ययोजना तैयार करने की जरूरत रेखांकित की गई।

सुरक्षित प्रसव और आपातकालीन उपचार पर जोर

कार्यशाला में प्रसव पूर्व जांच (ANC), संस्थागत प्रसव और प्रसवोत्तर देखभाल (PNC) को सुरक्षित एवं गुणवत्तापूर्ण बनाने की रणनीतियों पर चर्चा हुई। इसके साथ ही जटिल प्रसव और अन्य आपातकालीन परिस्थितियों में समय पर उपचार उपलब्ध कराने के लिए प्रथम संदर्भन इकाइयों को सुदृढ़ करने पर बल दिया गया। जिला स्तर पर स्वास्थ्य सेवाओं की जवाबदेही सुनिश्चित करने, तकनीकी सहयोग बढ़ाने और समुदाय की भागीदारी मजबूत करने को भी महत्वपूर्ण कार्यबिंदु माना गया।

विशेषज्ञों और सहयोगी संस्थाओं की भागीदारी

कार्यशाला में एम्स रायपुर के स्त्री एवं प्रसूति रोग विभागाध्यक्ष, प्रदेश के 10 शासकीय और 5 निजी मेडिकल कॉलेजों के विभागाध्यक्ष, सभी जिलों के मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO), जिला आरसीएच नोडल अधिकारी, ब्लॉक नोडल अधिकारी तथा FOGSI के प्रतिनिधि शामिल हुए। इसके अलावा WHO, UNICEF, JHPIEGO, Nutrition International, KPMG, IPAS, Piramal Foundation, Wadhwani AI, Azim Premji Foundation, ARMANN और YosAid जैसी सहयोगी संस्थाओं के राज्य प्रमुखों ने भी सहभागिता की।

कार्यशाला में शामिल विशेषज्ञों और प्रतिनिधियों ने मातृ एवं नवजात स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने के लिए समन्वित प्रयासों की आवश्यकता पर जोर दिया। ‘सुमन रोडमैप 2030’ के माध्यम से प्राथमिकता वाले जिलों में स्वास्थ्य सुविधाओं की उपलब्धता, उपचार की गुणवत्ता और आपातकालीन सेवाओं की तत्परता बढ़ाने का लक्ष्य रखा गया है, ताकि सुरक्षित मातृत्व सुनिश्चित करने और नवजात शिशुओं की मृत्यु दर कम करने की दिशा में ठोस प्रगति की जा सके।