कवर्धा में स्वास्थ्य विषयों पर पत्रकारों का क्षेत्रीय संवाद एवं उन्मुखीकरण कार्यक्रम आयोजित

कवर्धा में यूनिसेफ छत्तीसगढ़ एवं एमसीसीर ट्रस्ट के सहयोग से पत्रकारों और मीडिया प्रतिनिधियों के लिए स्वास्थ्य विषयों पर क्षेत्रीय संवाद एवं उन्मुखीकरण कार्यक्रम आयोजित किया गया। इसमें सिकल सेल रोग, बच्चों में टाइप-1 मधुमेह, जन्मजात हृदय रोग तथा मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा हुई। कार्यक्रम में लगभग 50 प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया। विशेषज्ञों ने स्वास्थ्य संबंधी जागरूकता बढ़ाने, समय पर जांच एवं उपचार सुनिश्चित करने और प्रमाणित जानकारी के साथ जिम्मेदार पत्रकारिता की भूमिका पर जोर दिया।

Oct 14, 2026 - 16:14
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कवर्धा में स्वास्थ्य विषयों पर पत्रकारों का क्षेत्रीय संवाद एवं उन्मुखीकरण कार्यक्रम आयोजित

UNITED NEWS OF ASIA. सौरभ नामदेव, कवर्धा। जिले में स्वास्थ्य संबंधी महत्वपूर्ण विषयों पर मीडिया की समझ मजबूत करने और जनजागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य से पत्रकारों एवं मीडिया प्रतिनिधियों के लिए क्षेत्रीय संवाद एवं उन्मुखीकरण कार्यक्रम आयोजित किया गया। 12 अक्टूबर 2026 को आयोजित इस कार्यक्रम में यूनिसेफ छत्तीसगढ़ एवं एमसीसीर ट्रस्ट का सहयोग रहा। कार्यक्रम में कवर्धा और आसपास के क्षेत्रों से लगभग 50 प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया। इस दौरान जिला स्वास्थ्य विभाग के मीडिया प्रभारी भी उपस्थित रहे।

कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य सिकल सेल रोग (SCD), बच्चों में टाइप-1 मधुमेह, जन्मजात हृदय रोग (CHD) तथा मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य (MCH) जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर पत्रकारों की जानकारी बढ़ाना था। विशेषज्ञों ने कहा कि स्वास्थ्य संबंधी खबरों को तथ्यपरक, सरल और संवेदनशील तरीके से प्रस्तुत करना जरूरी है, ताकि आम लोगों को सही जानकारी मिल सके और वे समय पर जांच एवं उपचार के लिए प्रेरित हों।

कार्यक्रम के दौरान सिकल सेल रोग की समय पर पहचान, आवश्यक जांच, परामर्श और नियमित उपचार के महत्व पर चर्चा की गई। विशेषज्ञों ने बताया कि इस बीमारी के प्रति जागरूकता बढ़ाने और प्रभावित लोगों को उचित स्वास्थ्य सेवाओं से जोड़ने में मीडिया महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। ग्रामीण एवं दूरस्थ क्षेत्रों में स्वास्थ्य संबंधी जानकारी पहुंचाने के लिए पत्रकारों और स्वास्थ्य विभाग के बीच बेहतर समन्वय आवश्यक है।

बच्चों में टाइप-1 मधुमेह के विषय पर चर्चा करते हुए विशेषज्ञों ने शुरुआती लक्षणों की पहचान और समय पर चिकित्सकीय परामर्श की आवश्यकता बताई। उन्होंने कहा कि लक्षणों को नजरअंदाज करने के बजाय बच्चों को समय पर स्वास्थ्य केंद्र तक पहुंचाना जरूरी है। इसी तरह जन्मजात हृदय रोग से प्रभावित बच्चों की शीघ्र पहचान, उचित रेफरल और उपचार की जानकारी भी साझा की गई, ताकि जरूरतमंद बच्चों को समय पर चिकित्सा सहायता मिल सके।

कार्यक्रम में मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य से जुड़े विषयों पर भी विस्तार से चर्चा हुई। इसमें गर्भवती महिलाओं की देखभाल, बच्चों का पूर्ण टीकाकरण, उचित पोषण और एनीमिया नियंत्रण जैसे मुद्दे शामिल रहे। वक्ताओं ने कहा कि इन विषयों पर नियमित जनजागरूकता से परिवारों को स्वास्थ्य सेवाओं का लाभ लेने के लिए प्रोत्साहित किया जा सकता है। मीडिया के माध्यम से शासकीय स्वास्थ्य योजनाओं और उपलब्ध सुविधाओं की जानकारी अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचाई जा सकती है।

विशेषज्ञों ने पत्रकारों से अपील की कि स्वास्थ्य संबंधी समाचार तैयार करते समय प्रमाणित तथ्यों, विश्वसनीय स्रोतों और संवेदनशील भाषा को प्राथमिकता दें। बीमारी से प्रभावित बच्चों और परिवारों की निजता एवं सम्मान का ध्यान रखना भी जिम्मेदार पत्रकारिता का महत्वपूर्ण हिस्सा है। भ्रामक जानकारी से बचते हुए सही तथ्यों को सामने लाना समाज में स्वास्थ्य जागरूकता बढ़ाने में सहायक हो सकता है।

वक्ताओं ने कहा कि मीडिया, स्वास्थ्य विभाग और समुदाय के संयुक्त प्रयासों से स्वास्थ्य कार्यक्रमों की पहुंच बढ़ाई जा सकती है। विशेष रूप से ग्रामीण और दूरस्थ इलाकों में लोगों को समय पर जांच, उपचार, टीकाकरण और पोषण संबंधी सुविधाओं की जानकारी देना जरूरी है। इसके लिए स्थानीय स्तर पर संवाद और सहयोग को मजबूत करने पर जोर दिया गया।

कार्यक्रम का संचालन यूनिसेफ के स्वास्थ्य विशेषज्ञ डॉ. गजेंद्र सिंह के नेतृत्व में किया गया, जबकि एमसीसीर ट्रस्ट के डॉ. डी. श्याम कुमार ने सहयोग प्रदान किया। समापन अवसर पर प्रतिभागियों ने बच्चों एवं माताओं के बेहतर स्वास्थ्य, समुदाय में जागरूकता बढ़ाने और जनहित से जुड़े मुद्दों पर जिम्मेदार पत्रकारिता को आगे बढ़ाने की प्रतिबद्धता व्यक्त की। यह कार्यक्रम स्वास्थ्य संबंधी विषयों पर मीडिया की भूमिका को प्रभावी बनाने तथा आम नागरिकों तक उपयोगी और प्रमाणित जानकारी पहुंचाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल रहा।