दुर्ग में साइबर ठगी के लिए बैंक खाते उपलब्ध कराने के आरोप में 7 आरोपी गिरफ्तार, कमीशन का लालच देकर खुलवाए जा रहे थे म्यूल खाते
छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले में साइबर ठगी की रकम के लेन-देन में इस्तेमाल किए जा रहे बैंक खातों के मामले में पुलिस ने सात खाताधारकों के खिलाफ वैधानिक कार्रवाई की है। सुपेला और खुर्सीपार थाना पुलिस तथा एसीसीयू की संयुक्त कार्रवाई में सामने आया कि कथित तौर पर पांच हजार से पंद्रह हजार रुपये तक के कमीशन के लालच में बैंक पासबुक, एटीएम कार्ड, चेकबुक और सिम कार्ड दूसरे लोगों को उपलब्ध कराए गए। पुलिस के मुताबिक, संबंधित खातों में लाखों रुपये से अधिक के संदिग्ध लेन-देन मिले हैं। पुलिस ने नागरिकों से अपने बैंक खाते और वित्तीय दस्तावेज किसी अन्य व्यक्ति को इस्तेमाल के लिए नहीं देने की अपील की है।
UNITED NEWS OF ASIA. भारती कौर, दुर्ग l छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले में साइबर ठगी की रकम के लेन-देन में इस्तेमाल किए जा रहे बैंक खातों के मामले में पुलिस ने सात खाताधारकों के खिलाफ वैधानिक कार्रवाई की है। यह कार्रवाई थाना सुपेला, थाना खुर्सीपार और एंटी क्राइम एंड साइबर यूनिट (एसीसीयू) दुर्ग की संयुक्त टीम ने की। पुलिस के अनुसार, जांच में सामने आया कि कथित तौर पर पांच हजार से पंद्रह हजार रुपये तक के कमीशन के लालच में कुछ लोगों ने अपने बैंक खातों से संबंधित दस्तावेज और सिम कार्ड दूसरे व्यक्तियों को उपलब्ध कराए थे। इन खातों का इस्तेमाल साइबर ठगी से प्राप्त धनराशि के लेन-देन और हस्तांतरण के लिए किए जाने की जानकारी मिली है।
दुर्ग पुलिस के मुताबिक, पुलिस मुख्यालय के निर्देश पर साइबर अपराधों में म्यूल बैंक खातों के इस्तेमाल पर रोक लगाने के लिए विशेष अभियान चलाया जा रहा है। इसी अभियान के तहत बैंक खातों के लेन-देन का विश्लेषण, तकनीकी साक्ष्यों का परीक्षण और विवेचना की गई। जांच में संबंधित खातों में लाखों रुपये से अधिक के लेन-देन सामने आए। पुलिस ने इन तथ्यों के आधार पर सात खाताधारकों के विरुद्ध कार्रवाई की है।
पुलिस की जानकारी के अनुसार, थाना सुपेला क्षेत्र में फेडरल बैंक और उत्कर्ष बैंक से संबंधित दो खाताधारकों के खिलाफ कार्रवाई की गई। वहीं, थाना खुर्सीपार क्षेत्र में इंडियन बैंक से संबंधित पांच खाताधारकों को जांच के दायरे में लिया गया। कार्रवाई 14 अक्टूबर 2026 को की गई। पुलिस ने संबंधित मामलों में बैंक पासबुक, एटीएम कार्ड, चेकबुक, सिम कार्ड, मोबाइल फोन और अन्य दस्तावेज जब्त किए हैं। इन वस्तुओं की जांच के जरिए खातों के संचालन और संदिग्ध लेन-देन से जुड़े तथ्यों का पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है।
सुपेला थाना क्षेत्र के मामले में शुभम चौधरी, उम्र 22 वर्ष, निवासी सुभाष नगर, नंदिनी रोड, छावनी और गुरमीत कौर, निवासी कृपाल नगर, कोहका के नाम सामने आए हैं। खुर्सीपार थाना क्षेत्र से संबंधित मामलों में तरुण नायक, उम्र 40 वर्ष, निवासी खुर्सीपार; निखिल नेताम, उम्र 22 वर्ष, निवासी एसटीएफ कॉलोनी, बघेरा; यसमीत सिंह, उम्र 22 वर्ष, निवासी शिवाजी नगर, खुर्सीपार; गौरव साहू, उम्र 23 वर्ष, निवासी शंकर नगर, सद्भावना चौक; और नरगिस, निवासी मछली मार्केट, जोन-2, खुर्सीपार के नाम शामिल हैं। पुलिस की प्रेस विज्ञप्ति में कुछ आरोपियों की उम्र और अन्य विवरण उपलब्ध नहीं होने की जानकारी भी दी गई है।
पुलिस के अनुसार, संबंधित प्रकरण थाना सुपेला के अपराध क्रमांक 1321/2026 और 1324/2026 तथा थाना खुर्सीपार के अपराध क्रमांक 272/2026 के तहत दर्ज हैं। इनमें भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धाराओं 318(2), 318(3) और 317(4) का उल्लेख किया गया है। मामले में बैंक खातों के इस्तेमाल, संदिग्ध धनराशि के हस्तांतरण और संबंधित व्यक्तियों की भूमिका की जांच की जा रही है। आरोपियों के विरुद्ध की गई कार्रवाई को अंतिम दोषसिद्धि नहीं माना जाना चाहिए; मामले में आगे की कानूनी प्रक्रिया और जांच के निष्कर्ष महत्वपूर्ण होंगे।
क्या होते हैं म्यूल बैंक खाते? साइबर अपराधों में म्यूल बैंक खातों का इस्तेमाल ठगी से प्राप्त रकम को एक खाते से दूसरे खाते में भेजने और धनराशि के वास्तविक स्रोत या लाभार्थी की पहचान छिपाने के लिए किया जा सकता है। कई बार खाताधारकों को कमीशन या अन्य आर्थिक लाभ का लालच देकर उनके खाते, एटीएम कार्ड, पासबुक और सिम कार्ड दूसरे लोगों को सौंपने के लिए कहा जाता है। ऐसे मामलों में खाताधारक भी पुलिस जांच और कानूनी कार्रवाई के दायरे में आ सकते हैं।
दुर्ग पुलिस ने नागरिकों से अपील की है कि वे कमीशन के लालच में अपना बैंक खाता, एटीएम कार्ड, पासबुक, चेकबुक या सिम कार्ड किसी अन्य व्यक्ति को इस्तेमाल के लिए न दें। यदि किसी को अपने बैंक खाते के दुरुपयोग की आशंका हो, तो तत्काल संबंधित बैंक और नजदीकी पुलिस थाने को सूचना दें। साइबर वित्तीय धोखाधड़ी होने पर हेल्पलाइन नंबर 1930 पर संपर्क किया जा सकता है। शिकायत राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल https://cybercrime.gov.in पर भी दर्ज की जा सकती है।
दुर्ग पुलिस ने स्पष्ट किया है कि साइबर अपराधों पर अंकुश लगाने और नागरिकों की वित्तीय सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए इस तरह की कार्रवाई जारी रहेगी।