मुस्लिम समाज को शिक्षा, कौशल और विकास की मुख्यधारा से जोड़ने पर जोर: डॉ. सलीम राज

रायपुर में आयोजित प्रेस वार्ता में छत्तीसगढ़ राज्य वक्फ बोर्ड के अध्यक्ष डॉ. सलीम राज ने मदरसा शिक्षा, नई शिक्षा नीति, अल्पसंख्यक शैक्षणिक संस्थानों और मुस्लिम समाज के विकास से जुड़े विषयों पर बात की। उन्होंने शिक्षा, कौशल विकास, रोजगार और आधुनिक तकनीकी ज्ञान को मुस्लिम समाज के बच्चों और युवाओं के लिए महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि सरकारी योजनाओं का लाभ सभी पात्र नागरिकों तक पहुंचना चाहिए और मुस्लिम समाज को भी शिक्षा एवं कौशल विकास के अवसरों का लाभ उठाना चाहिए। डॉ. सलीम राज छत्तीसगढ़ राज्य वक्फ बोर्ड के अध्यक्ष हैं और उन्हें कैबिनेट मंत्री दर्जा प्राप्त है।

Sep 30, 2026 - 11:49
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मुस्लिम समाज को शिक्षा, कौशल और विकास की मुख्यधारा से जोड़ने पर जोर: डॉ. सलीम राज

UNITED NEWS OF ASIA. अमृतेश्वर सिंह, रायपुर l छत्तीसगढ़ राज्य वक्फ बोर्ड के अध्यक्ष डॉ. सलीम राज की अध्यक्षता में आयोजित प्रेस वार्ता में मदरसा शिक्षा, नई शिक्षा नीति, अल्पसंख्यक शैक्षणिक संस्थानों, मुस्लिम समाज के विकास तथा केंद्र और राज्य सरकार की विभिन्न नीतियों से जुड़े विषयों पर चर्चा हुई। इस अवसर पर उत्तराखंड वक्फ बोर्ड के चेयरमैन मोहम्मद शादाब शम्स भी उपस्थित रहे। डॉ. सलीम राज वर्तमान में छत्तीसगढ़ राज्य वक्फ बोर्ड के अध्यक्ष हैं और उन्हें कैबिनेट मंत्री दर्जा प्राप्त है।

मीडिया से बातचीत के दौरान डॉ. सलीम राज ने शिक्षा, कौशल विकास, रोजगार और सामाजिक विकास से संबंधित सरकारी प्रयासों का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि सरकार की योजनाओं का लाभ मुस्लिम समाज सहित सभी पात्र नागरिकों तक पहुंचना आवश्यक है। उन्होंने मुस्लिम समाज के लोगों से शिक्षा, कौशल विकास और रोजगार से जुड़े उपलब्ध अवसरों का लाभ उठाने की बात कही।

डॉ. सलीम राज ने मुस्लिम समाज के बच्चों और युवाओं की शिक्षा को भविष्य के लिए महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि आधुनिक समय में ऐसी शिक्षा व्यवस्था की जरूरत है, जिसमें धार्मिक एवं सांस्कृतिक शिक्षा के साथ आधुनिक विषयों को भी स्थान मिले। उनके अनुसार कंप्यूटर, विज्ञान, गणित, अंग्रेजी, तकनीकी ज्ञान और रोजगारपरक कौशल युवाओं को बदलते समय की आवश्यकताओं के अनुरूप तैयार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।

उन्होंने मदरसा शिक्षा को लेकर भी अपनी बात रखी। डॉ. सलीम राज ने कहा कि बच्चों को उनकी परंपरा और संस्कृति से जोड़ते हुए आधुनिक शिक्षा और तकनीकी ज्ञान के अवसर उपलब्ध कराए जाने चाहिए। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विजन का उल्लेख करते हुए ‘एक हाथ में कुरआन और दूसरे हाथ में कंप्यूटर’ की बात कही और इसे धार्मिक एवं सांस्कृतिक शिक्षा के साथ आधुनिक ज्ञान को जोड़ने के संदर्भ में प्रस्तुत किया।

मदरसा शिक्षा को आधुनिक शिक्षा से जोड़ने को लेकर डॉ. सलीम राज पहले भी अपनी राय सार्वजनिक कर चुके हैं। जुलाई 2026 में उन्होंने मुख्यमंत्री विष्णु देव साय को पत्र लिखकर छत्तीसगढ़ मदरसा बोर्ड की जगह अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण गठित करने का सुझाव दिया था। रिपोर्ट के अनुसार उन्होंने मदरसों में आधुनिक विषयों और कौशल विकास को बढ़ावा देने की आवश्यकता बताई थी।

प्रेस वार्ता के दौरान अल्पसंख्यक शैक्षणिक संस्थानों और मुस्लिम समाज के सामाजिक एवं आर्थिक विकास से जुड़े मुद्दों पर भी चर्चा हुई। डॉ. सलीम राज ने शिक्षा और कौशल विकास को युवाओं के भविष्य से जोड़ते हुए कहा कि रोजगारपरक शिक्षा के माध्यम से युवा नई संभावनाओं का लाभ उठा सकते हैं।

उन्होंने सरकारी योजनाओं की जानकारी समाज के अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचाने और पात्र लाभार्थियों को योजनाओं से जोड़ने पर भी जोर दिया। उनके अनुसार शिक्षा, कौशल और रोजगार के अवसरों तक पहुंच बढ़ाने से समाज के युवाओं को आगे बढ़ने के लिए नए रास्ते मिल सकते हैं। प्रेस वार्ता में मदरसा शिक्षा, आधुनिक शिक्षा और मुस्लिम समाज के विकास से जुड़े विभिन्न विषयों पर विचार रखे गए।