रायपुर नगर निगम में अमृत 2.0 के तहत भूजल प्रबंधन पर मंथन, भविष्य की पेयजल जरूरतों के लिए डेटा आधारित योजना बनाने पर जोर

अमृत 2.0 योजना के तहत रायपुर नगर निगम में एंड-टू-एंड भूजल प्रबंधन योजना पर महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। बैठक में भूजल स्तर, वर्षा जल संचयन, रिचार्ज स्ट्रक्चर, जल गुणवत्ता, शहरी बाढ़ नियंत्रण और भूजल की निगरानी के लिए स्वचालित प्रणाली स्थापित करने जैसे विषयों पर चर्चा हुई। अधिकारियों और विशेषज्ञों ने वर्तमान एवं भविष्य की पेयजल समस्याओं के समाधान के लिए डेटा आधारित योजना, विभागीय समन्वय और प्रभावी जल प्रबंधन रणनीति तैयार करने पर जोर दिया।

Oct 14, 2026 - 12:12
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रायपुर नगर निगम में अमृत 2.0 के तहत भूजल प्रबंधन पर मंथन, भविष्य की पेयजल जरूरतों के लिए डेटा आधारित योजना बनाने पर जोर

UNITED NEWS OF ASIA. अमृतेश्वर सिंह, रायपुर l अमृत 2.0 योजना के अंतर्गत रायपुर नगर निगम में एंड-टू-एंड ग्राउंड वाटर मैनेजमेंट प्लान को लेकर महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। बैठक में भूजल की वर्तमान स्थिति का विश्लेषण करने, जल प्रबंधन को मजबूत बनाने, डेटा आधारित योजना तैयार करने और संबंधित विभागों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने पर चर्चा की गई। इसका प्रमुख उद्देश्य वर्तमान और भविष्य में सामने आने वाली पेयजल संबंधी समस्याओं के समाधान के लिए प्रभावी रणनीति तैयार करना है।

बैठक में इस बात पर जोर दिया गया कि शहर की जल आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए भूजल प्रबंधन की समग्र योजना बनाई जाए। इसके लिए उपलब्ध आंकड़ों, भूजल स्तर, जल की गुणवत्ता, वर्षा जल संचयन और रिचार्ज व्यवस्था जैसे महत्वपूर्ण पहलुओं का अध्ययन किया जाना आवश्यक है। इन विषयों को ध्यान में रखते हुए ऐसी कार्ययोजना तैयार करने पर चर्चा हुई, जिससे जल संसाधनों का बेहतर प्रबंधन किया जा सके और भविष्य में पेयजल की उपलब्धता सुनिश्चित करने में मदद मिले।

विशेषज्ञों और विभागीय अधिकारियों की रही उपस्थिति

बैठक में नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ अर्बन अफेयर्स (एनआईयूए), महुआ से उदय भोंडे एवं विक्टर शेंडे शामिल हुए। नाबार्ड की कंसल्टेंसी संस्था नेबकान्स से राणा चटर्जी और आलोक श्रीवास्तव ने भी सहभागिता की। इसके अलावा सेंट्रल ग्राउंड वाटर बोर्ड के क्षेत्रीय संचालक डॉ. भूषण लाम सोगे तथा नगर तथा ग्राम निवेश विभाग, क्षेत्रीय कार्यालय रायपुर के संयुक्त संचालक विनीत नायर उपस्थित रहे।

बैठक में वास्तुविद संस्थाओं मेसर्स ग्रे स्पेस इंटरप्राइजेस और मेसर्स सावनसुखा एसोसिएट्स के प्रतिनिधियों ने भी हिस्सा लिया। रायपुर नगर पालिक निगम की ओर से आयुक्त संबित मिश्रा, अपर आयुक्त लोकेश्वर साहू और विनोद पाण्डेय, मुख्य अभियंता संजय बागड़े, अधीक्षण अभियंता, उपायुक्तगण, जोन कमिश्नर, कार्यपालन अभियंता तथा अन्य विभागीय अधिकारी उपस्थित रहे। विभिन्न संस्थाओं और विभागों के प्रतिनिधियों की मौजूदगी का उद्देश्य भूजल प्रबंधन से जुड़े तकनीकी, प्रशासनिक और नियोजन संबंधी पहलुओं पर समन्वित चर्चा करना था।

नलकूपों और रिचार्ज स्ट्रक्चर की संख्या का होगा आकलन

बैठक में भूजल के समन्वित एवं समग्र प्रबंधन के लिए कई महत्वपूर्ण कारकों पर विचार-विमर्श किया गया। इसमें शहर में नलकूपों की संख्या, भूजल को पुनर्भरण करने वाले रिचार्ज स्ट्रक्चर की उपलब्धता और संख्या तथा सतही जल के अपव्यय पर नियंत्रण जैसे विषय शामिल रहे। इन पहलुओं के व्यवस्थित आकलन से जल संसाधनों की स्थिति को समझने और उनके बेहतर उपयोग के लिए योजना बनाने में सहायता मिल सकती है।

विशेषज्ञों और अधिकारियों ने वर्षा जल संचयन तथा भूजल रिचार्ज की व्यवस्था को भी महत्वपूर्ण विषय के रूप में लिया। बारिश के पानी का उचित संग्रहण और उसका प्रभावी उपयोग भूजल प्रबंधन की रणनीति का अहम हिस्सा है। बैठक में इन व्यवस्थाओं को योजना में शामिल करने और शहर की आवश्यकताओं के अनुरूप प्रभावी उपाय तैयार करने पर चर्चा की गई।

भूजल स्तर और गुणवत्ता की नियमित निगरानी पर जोर

भूजल प्रबंधन की योजना में जल की गुणवत्ता और भूजल स्तर की निगरानी को भी महत्वपूर्ण स्थान दिया गया। बैठक में भूगर्भ जल के स्तर का लगातार मापन करने के लिए स्वचालित प्रणाली स्थापित करने के विषय पर चर्चा हुई। ऐसी प्रणाली के माध्यम से भूजल स्तर में होने वाले बदलावों की नियमित जानकारी प्राप्त करने और उपलब्ध आंकड़ों के आधार पर प्रबंधन संबंधी निर्णय लेने में सहायता मिल सकती है।

इसके साथ ही भूजल की गुणवत्ता की निगरानी और उससे संबंधित आवश्यक पहलुओं को योजना में शामिल करने पर भी विचार किया गया। शहर में जल संसाधनों की स्थिति को समझने के लिए केवल पानी की उपलब्धता ही नहीं, बल्कि उसकी गुणवत्ता और समय के साथ होने वाले बदलावों का आकलन भी आवश्यक है। बैठक में इन विषयों को समग्र भूजल प्रबंधन योजना का हिस्सा बनाने पर चर्चा हुई।

शहरी बाढ़ नियंत्रण और सतही जल के प्रबंधन पर चर्चा

बैठक में शहरी बाढ़ नियंत्रण तथा सतही जल के अपव्यय को रोकने से जुड़े विषयों पर भी विचार-विमर्श किया गया। वर्षा के दौरान पानी का उचित प्रबंधन करना और उसे उपयोगी संसाधन के रूप में संरक्षित करने की संभावनाओं पर ध्यान देना शहरी जल प्रबंधन के महत्वपूर्ण पहलू हैं। इसी क्रम में वर्षा जल संचयन, भूजल पुनर्भरण और जल संसाधनों के बेहतर उपयोग के लिए रणनीति तैयार करने पर चर्चा की गई।

बैठक में यह भी विचार किया गया कि रायपुर के मास्टर प्लान में भूजल की दृष्टि से महत्वपूर्ण स्थानों को आरक्षित करने की संभावनाओं पर ध्यान दिया जाए। इसके अलावा मास्टर प्लान में भूजल प्रबंधन के विषय पर पृथक प्रावधान रखने के संबंध में भी चर्चा हुई। इसका उद्देश्य शहरी नियोजन में भूजल संरक्षण को उचित महत्व देना और भविष्य की आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए दीर्घकालिक योजना तैयार करना है।

डेटा आधारित योजना और विभागीय समन्वय पर फोकस

अमृत 2.0 योजना के अंतर्गत आयोजित इस बैठक में डेटा आधारित योजना तैयार करने और संबंधित विभागों के बीच समन्वय को प्रभावी जल प्रबंधन के लिए आवश्यक बताया गया। भूजल से संबंधित विभिन्न आंकड़ों, उपलब्ध संसाधनों और तकनीकी पहलुओं का समग्र विश्लेषण कर कार्ययोजना बनाने पर जोर दिया गया। इसके साथ ही संबंधित संस्थाओं और विभागों की भूमिका को ध्यान में रखते हुए आगे की रणनीति तैयार करने पर चर्चा की गई।

रायपुर में वर्तमान और भविष्य की पेयजल जरूरतों को ध्यान में रखते हुए भूजल प्रबंधन की व्यापक योजना तैयार करना बैठक का प्रमुख उद्देश्य रहा। नलकूपों, रिचार्ज स्ट्रक्चर, वर्षा जल संचयन, भूजल गुणवत्ता, जलस्तर की निगरानी और शहरी बाढ़ नियंत्रण जैसे विषयों पर हुई चर्चा इसी दिशा में महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

अमृत 2.0 के तहत यह बैठक शहर में जल संसाधनों के बेहतर प्रबंधन और भविष्य की पेयजल चुनौतियों से निपटने के लिए योजना बनाने की प्रक्रिया का हिस्सा है। अब चर्चा में शामिल विभिन्न बिंदुओं को आगे की कार्ययोजना में किस तरह शामिल किया जाएगा, यह संबंधित विभागों की आगामी कार्रवाई पर निर्भर करेगा।