मध्य प्रदेश में OBC आरक्षण पर बड़ा मंथन, 27% कोटा बहाल करने नए कानून या अध्यादेश की तैयारी; कांग्रेस ने मांगा 52% आरक्षण

मध्य प्रदेश में 2019 के ओबीसी आरक्षण संशोधन कानून को हाईकोर्ट द्वारा निरस्त किए जाने के बाद आरक्षण को लेकर सियासत तेज हो गई है। राज्य सरकार 27 प्रतिशत आरक्षण को कानूनी आधार देने के लिए नए कानून या अध्यादेश के विकल्प पर विचार कर रही है। वहीं कांग्रेस ने ओबीसी की कथित 52 प्रतिशत आबादी के अनुपात में आरक्षण देने की मांग उठाई है। भाजपा ने कांग्रेस पर भ्रम फैलाने और मुद्दे पर राजनीति करने का आरोप लगाया है।

Oct 13, 2026 - 12:36
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मध्य प्रदेश में OBC आरक्षण पर बड़ा मंथन, 27% कोटा बहाल करने नए कानून या अध्यादेश की तैयारी; कांग्रेस ने मांगा 52% आरक्षण

UNITED NEWS OF ASIA. मध्य प्रदेश में अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) के आरक्षण को लेकर राजनीतिक और कानूनी बहस तेज हो गई है। वर्ष 2019 के ओबीसी आरक्षण संशोधन कानून को हाईकोर्ट द्वारा निरस्त किए जाने के बाद राज्य सरकार 27 प्रतिशत आरक्षण को कानूनी आधार देने के लिए नए विकल्पों पर विचार कर रही है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, सरकार नया संशोधित कानून लाने या अध्यादेश जारी करने की संभावनाओं पर मंथन कर रही है। इस मुद्दे पर कांग्रेस और भाजपा के बीच आरोप-प्रत्यारोप भी शुरू हो गए हैं।

27 प्रतिशत आरक्षण के लिए नए कानून की तैयारी

हाईकोर्ट के फैसले के बाद राज्य सरकार के सामने ओबीसी आरक्षण को लेकर कानूनी रास्ता तलाशने की चुनौती है। रिपोर्ट के मुताबिक, सरकार सुप्रीम कोर्ट का रुख करने के साथ-साथ राज्य स्तर पर भी विकल्पों पर विचार कर रही है। वर्ष 2019 में लागू किए गए आरक्षण संशोधन कानून में जिन कानूनी कमियों के आधार पर हाईकोर्ट ने उसे निरस्त किया, उन्हें दूर करने के लिए विधि विशेषज्ञों से परामर्श किए जाने की बात कही गई है।

सरकार नए सिरे से आंकड़े और आरक्षण के पक्ष में ठोस आधार तैयार करने की दिशा में भी काम कर रही है, ताकि प्रस्तावित व्यवस्था को कानूनी रूप से मजबूत बनाया जा सके। हालांकि, नए कानून या अध्यादेश को लेकर अंतिम निर्णय होने की जानकारी उपलब्ध नहीं है।

क्या था 2019 के कानून का मामला?

तत्कालीन कमलनाथ सरकार ने मार्च 2019 में मध्य प्रदेश में ओबीसी आरक्षण को 14 प्रतिशत से बढ़ाकर 27 प्रतिशत करने के लिए अध्यादेश लागू किया था। बाद में इसे विधानसभा से पारित कर अधिनियम का रूप दिया गया। इस व्यवस्था को लेकर लंबे समय से कानूनी विवाद चल रहा था।

प्रस्तुत जानकारी के अनुसार, हाल ही में हाईकोर्ट की खंडपीठ ने वर्ष 2019 के संशोधन कानून को असंवैधानिक ठहराते हुए निरस्त कर दिया। इसके बाद ओबीसी आरक्षण को 14 प्रतिशत तक सीमित किए जाने की बात सामने आई है। इस फैसले के बाद राज्य सरकार पर आरक्षण व्यवस्था के भविष्य को लेकर निर्णय लेने का दबाव बढ़ा है।

कांग्रेस ने की 52 प्रतिशत आरक्षण की मांग

ओबीसी आरक्षण के मुद्दे पर कांग्रेस ने राज्य सरकार की भूमिका पर सवाल उठाए हैं। वरिष्ठ कांग्रेस नेता मानक अग्रवाल ने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार ने अदालत में मामले की प्रभावी पैरवी नहीं की, जिसके कारण आरक्षण का मामला उलझ गया। कांग्रेस का कहना है कि मध्य प्रदेश में ओबीसी आबादी करीब 52 प्रतिशत है, इसलिए आरक्षण भी आबादी के अनुपात में सुनिश्चित किया जाना चाहिए।

कांग्रेस ने मांग की है कि सरकार केवल 27 प्रतिशत आरक्षण तक सीमित रहने के बजाय ओबीसी वर्ग के लिए 52 प्रतिशत आरक्षण सुनिश्चित करने की दिशा में नया कानून लाए। पार्टी ने यह भी कहा है कि यदि ओबीसी वर्ग को उसका अधिकार नहीं मिला, तो वह सरकार को इस मुद्दे पर जवाबदेह ठहराएगी। यह कांग्रेस की राजनीतिक मांग है, जिस पर अंतिम निर्णय कानूनी और संवैधानिक प्रावधानों के अनुसार होना होगा।

भाजपा ने कांग्रेस पर लगाया भ्रम फैलाने का आरोप

भाजपा सांसद दर्शन सिंह चौधरी ने कांग्रेस के आरोपों पर पलटवार किया है। उन्होंने कांग्रेस पर ओबीसी आरक्षण के मुद्दे पर राजनीति करने और समाज में भ्रम फैलाने का आरोप लगाया। भाजपा सांसद के मुताबिक, उनकी पार्टी की सरकार अनुसूचित जनजाति, अनुसूचित जाति, अन्य पिछड़ा वर्ग और सामान्य वर्ग सहित सभी वर्गों के हितों को ध्यान में रखकर काम कर रही है।

इस तरह मध्य प्रदेश में ओबीसी आरक्षण का मुद्दा कानूनी प्रक्रिया के साथ राजनीतिक बहस का भी केंद्र बन गया है। अब सरकार के अगले कदम, विधि विशेषज्ञों की सलाह और संभावित न्यायिक कार्रवाई पर सबकी नजर रहेगी। नए कानून या अध्यादेश पर अंतिम निर्णय होने के बाद ही स्पष्ट होगा कि 27 प्रतिशत आरक्षण को किस रूप में आगे बढ़ाया जाएगा।