एमसीबी के स्वास्थ्य केंद्रों में बीपी मशीनों से पारा चोरी, उपकरणों की सुरक्षा व्यवस्था पर उठे गंभीर सवाल
एमसीबी जिले के जिला अस्पताल से लेकर सीएचसी और पीएचसी तक मरकरी वाली बीपी मशीनों से पारा गायब होने की शिकायतों ने स्वास्थ्य केंद्रों की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। जिला अस्पताल में टेक्नीशियन बनकर पहुंचे एक व्यक्ति द्वारा मशीन से पारा निकालने का मामला सामने आने के बाद पुलिस में एफआईआर दर्ज की गई। खड़गवां समेत अन्य स्वास्थ्य केंद्रों में भी ऐसी शिकायतें सामने आने की बात कही जा रही है। अब पुलिस जांच के नतीजों पर सभी की नजरें टिकी हैं।
UNITED NEWS OF ASIA. जमील अंसारी, एमसीबी। एमसीबी जिले के स्वास्थ्य केंद्रों में मरीजों की जांच के लिए इस्तेमाल होने वाली मरकरी वाली बीपी मशीनों से पारा गायब होने की घटनाओं ने स्वास्थ्य विभाग की उपकरण सुरक्षा और निगरानी व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। जिला अस्पताल एमसीबी से लेकर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र खड़गवां सहित अन्य स्वास्थ्य केंद्रों में बीपी मशीनों से पारा चोरी होने की शिकायतें सामने आने की बात कही जा रही है। लगातार सामने आ रही ऐसी घटनाओं के बाद अस्पतालों में रखे चिकित्सा उपकरणों की सुरक्षा और बाहरी लोगों के प्रवेश को लेकर भी सवाल उठने लगे हैं।
जानकारी के अनुसार, जिला अस्पताल एमसीबी में कुछ समय पहले एक व्यक्ति कथित तौर पर टेक्नीशियन बनकर पहुंचा था। उसने बीपी मशीनों की मरम्मत करने की बात कही और इसी दौरान मशीन से पारा निकाल लिया। बाद में संबंधित कंपनी से सत्यापन कराने पर जानकारी सामने आई कि उक्त व्यक्ति कंपनी का अधिकृत टेक्नीशियन नहीं था। इसके बाद मामले को गंभीरता से लेते हुए पुलिस में एफआईआर दर्ज कराई गई। इस घटना ने अस्पतालों में बाहरी व्यक्तियों के प्रवेश और तकनीकी कार्यों के लिए होने वाले सत्यापन की प्रक्रिया पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
इसी तरह सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र खड़गवां समेत जिले के अन्य स्वास्थ्य केंद्रों में भी मरकरी वाली बीपी मशीनों से पारा गायब होने की शिकायतें पुलिस तक पहुंचने की बात सामने आई है। एक से अधिक स्वास्थ्य संस्थानों में समान प्रकृति की घटनाओं की जानकारी सामने आने के बाद मामला और गंभीर नजर आ रहा है। हालांकि इन घटनाओं के पीछे कौन लोग हैं और उनका वास्तविक उद्देश्य क्या था, इसका स्पष्ट खुलासा पुलिस जांच के बाद ही हो सकेगा।
इन घटनाओं के बीच सबसे बड़ा सवाल यह है कि कोई व्यक्ति बिना पर्याप्त पहचान और सत्यापन के स्वास्थ्य केंद्र में प्रवेश कर चिकित्सा उपकरणों तक कैसे पहुंच गया। क्या अस्पतालों में आने वाले बाहरी तकनीशियनों की पहचान और उनके अधिकृत होने की पुष्टि के लिए निर्धारित प्रक्रिया है? यदि प्रक्रिया लागू है तो उसका पालन किस स्तर तक किया जा रहा है? ऐसे सवालों के जवाब सामने आना जरूरी है, ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं को रोका जा सके।
बीपी मशीनों से पारा निकालने की घटनाओं को लेकर यह सवाल भी उठ रहा है कि आखिर चोरी किए गए पारे का इस्तेमाल या उद्देश्य क्या था और उसे कहां ले जाया गया। एक से अधिक स्वास्थ्य केंद्रों से शिकायतें सामने आने के कारण यह भी जांच का विषय है कि कहीं इन घटनाओं के पीछे किसी एक ही व्यक्ति या समूह की भूमिका तो नहीं है। हालांकि किसी संगठित गिरोह की भूमिका को लेकर फिलहाल कोई पुष्टि नहीं हुई है और इस संबंध में स्थिति पुलिस जांच के बाद ही स्पष्ट होगी।
फिलहाल इन घटनाओं ने स्वास्थ्य विभाग के सामने चिकित्सा उपकरणों की सुरक्षा और निगरानी व्यवस्था को मजबूत करने की चुनौती खड़ी कर दी है। अस्पतालों में मरीजों की सुरक्षा के साथ-साथ जांच और उपचार में इस्तेमाल होने वाले उपकरणों की सुरक्षा भी बेहद महत्वपूर्ण है। अब पुलिस जांच के नतीजों पर नजर है कि बीपी मशीनों से पारा गायब होने की घटनाओं के पीछे क्या वजह सामने आती है और जिम्मेदार लोगों तक पुलिस कब पहुंचती है। साथ ही यह भी महत्वपूर्ण होगा कि स्वास्थ्य केंद्रों में बाहरी तकनीशियनों के प्रवेश, पहचान सत्यापन और उपकरणों की निगरानी को लेकर क्या ठोस कदम उठाए जाते हैं।