अस्पताल के मेमो से खुला मानव तस्करी नेटवर्क, महासमुंद में 10 ठिकानों पर छापे; 5 आरोपी गिरफ्तार

महासमुंद पुलिस ने एक नाबालिग से जुड़े मामले की जांच के दौरान कथित मानव तस्करी, बंधुआ मजदूरी और बाल मजदूरी से जुड़े नेटवर्क का खुलासा करने का दावा किया है। पुलिस ने 10 ठिकानों पर कार्रवाई कर पांच आरोपियों को गिरफ्तार किया और 1 करोड़ 48 लाख 54 हजार 750 रुपये नकद सहित कई दस्तावेज व इलेक्ट्रॉनिक सामग्री जब्त की।

Sep 25, 2026 - 17:31
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अस्पताल के मेमो से खुला मानव तस्करी नेटवर्क, महासमुंद में 10 ठिकानों पर छापे; 5 आरोपी गिरफ्तार

UNITED NEWS OF ASIA. शिखा दास, महासमुन्द l जिले में मानव तस्करी और बंधुआ मजदूरी से जुड़े कथित नेटवर्क के खिलाफ महासमुंद पुलिस ने बड़ी कार्रवाई की है। पुलिस के अनुसार, एक नाबालिग से जुड़े मामले की जांच के दौरान दूसरे राज्यों में मजदूरों को भेजने वाले संगठित नेटवर्क के बारे में जानकारी सामने आई। इसके बाद पुलिस ने नेटवर्क से जुड़े 10 ठिकानों पर एक साथ छापेमारी की। कार्रवाई के दौरान पांच आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है।

पुलिस के मुताबिक, 21 सितंबर 2026 को आदित्य अस्पताल एवं मैटरनिटी होम से मिले मेमो के आधार पर प्रारंभिक जांच शुरू हुई थी। इसमें एक नाबालिग के शारीरिक शोषण और गर्भवती होने की जानकारी सामने आई। जांच आगे बढ़ने पर पुलिस को कथित तौर पर मानव तस्करी, बंधुआ मजदूरी और बाल मजदूरी से जुड़े नेटवर्क के सुराग मिले। पुलिस ने इसके बाद मामले की कड़ियों को जोड़ते हुए अलग-अलग स्थानों पर दबिश दी।

महासमुंद पुलिस के अनुसार, कार्रवाई के दौरान 1 करोड़ 48 लाख 54 हजार 750 रुपये नकद बरामद किए गए। इसके अलावा मजदूरों के पलायन से संबंधित रजिस्टर और डायरी, कई मोबाइल फोन, बैंक पासबुक, चेकबुक, एटीएम कार्ड, मॉर्गेज से जुड़े दस्तावेज और नोट गिनने की मशीन सहित अन्य सामग्री जब्त की गई है। पुलिस इन दस्तावेजों और इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों की जांच कर रही है।

पुलिस जांच में आरोप लगाया गया है कि नेटवर्क से जुड़े लोग आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों और मजदूरों को एडवांस रकम देकर दूसरे राज्यों में ईंट भट्ठों तथा अन्य स्थानों पर मजदूरी के लिए भेजते थे। पुलिस के अनुसार, कुछ मामलों में मजदूरों पर कर्ज और दबाव बनाए जाने तथा उनकी आवाजाही को नियंत्रित किए जाने के आरोप भी सामने आए हैं।

पुलिस ने एक मामले में जनवरी 2026 में पीड़ित परिवार को 40 हजार रुपये एडवांस दिए जाने की जानकारी दी है। पुलिस के अनुसार, इसके बाद परिवार को उत्तर प्रदेश के बाराबंकी जिले के एक ईंट भट्ठे पर काम के लिए भेजा गया था। जांच में परिवार की स्वतंत्र आवाजाही, मजदूरी और भुगतान से जुड़े आरोप भी सामने आने की बात पुलिस ने कही है। इसी दौरान नाबालिग से कथित बाल मजदूरी और शारीरिक शोषण से संबंधित तथ्य भी जांच के दायरे में आए।

पुलिस का दावा है कि आरोपियों के ठिकानों से मिले रजिस्टर और दस्तावेजों में बड़ी संख्या में मजदूरों से संबंधित रिकॉर्ड मिले हैं। पुलिस के अनुसार, नेटवर्क से जुड़े प्रत्येक आरोपी द्वारा हर साल करीब 2 हजार से 5 हजार तक मजदूरों को अलग-अलग राज्यों के ईंट भट्ठों में भेजे जाने की जानकारी दस्तावेजों की जांच में सामने आई है। हालांकि इन दावों की विस्तृत पुष्टि पुलिस की जांच और जब्त दस्तावेजों के परीक्षण के बाद होगी।

इस मामले में पुलिस ने मुकेश चंद्राकर निवासी बेलटुकरी, जिला नुआपाड़ा, ओडिशा; नसीम बानो उर्फ लता सबर निवासी खरियार रोड, नुआपाड़ा, ओडिशा; जगत गुप्ता उर्फ मनीष गुप्ता निवासी पटपरपाली-बाम्हनडीह, थाना कोमाखान, महासमुंद; नंदूकुमार मोहंती उर्फ नंदू निवासी बारचौक, थाना पिथौरा, महासमुंद और पीयूष अग्रवाल उर्फ फुन्नू सेठ निवासी लहरौद, थाना पिथौरा, महासमुंद को गिरफ्तार किया है। पुलिस ने मुकेश चंद्राकर को कथित तौर पर नेटवर्क का मुख्य आरोपी बताया है।

मामले में थाना खल्लारी में अपराध क्रमांक 104/2026 दर्ज किया गया है। पुलिस के अनुसार आरोपियों के खिलाफ बीएनएस की धारा 143(2), 143(3), 143(4), 3(5) तथा संगठित अपराध से संबंधित धारा 111 के तहत कार्रवाई की गई है। गिरफ्तार आरोपियों को न्यायिक रिमांड पर न्यायालय में पेश किए जाने की जानकारी पुलिस ने दी है।

महासमुंद पुलिस के अनुसार, जांच अभी जारी है और जब्त मोबाइल फोन, बैंक दस्तावेज, रजिस्टर तथा अन्य सामग्री का परीक्षण किया जा रहा है। पुलिस इस बात की भी जांच कर रही है कि कथित नेटवर्क में और कितने लोग जुड़े हैं तथा अलग-अलग राज्यों में कितने मजदूरों को इसके माध्यम से भेजा गया। नाबालिगों, महिलाओं और अन्य श्रमिकों से जुड़े संभावित मामलों की भी जांच की जा रही है।