कोंडागांव में बाहरी हार्वेस्टरों पर रोक लगाने की मांग, स्थानीय संचालकों ने कलेक्टर को सौंपा ज्ञापन
छत्तीसगढ़ के कोंडागांव जिले में धान कटाई का सीजन शुरू होते ही स्थानीय हार्वेस्टर संचालकों ने बाहरी जिलों और राज्यों से आने वाले हार्वेस्टरों के संचालन पर रोक लगाने की मांग उठाई है। हार्वेस्टर संघ ने कलेक्टर को ज्ञापन सौंपकर स्थानीय संचालकों के रोजगार और आजीविका की सुरक्षा की मांग की है।
UNITED NEWS OF ASIA. रामकुमार भारद्वाज, कोंडागांव l छत्तीसगढ़ के कोंडागांव जिले में धान कटाई का सीजन शुरू होने के साथ ही हार्वेस्टर संचालन को लेकर स्थानीय संचालकों की चिंता बढ़ गई है। जिले के हार्वेस्टर संचालकों ने बाहरी जिलों और दूसरे राज्यों से आने वाले हार्वेस्टरों के संचालन पर रोक लगाने की मांग उठाई है। इस संबंध में हार्वेस्टर संघ जिला कोंडागांव के पदाधिकारियों और सदस्यों ने कलेक्टर के नाम ज्ञापन सौंपकर स्थानीय संचालकों के रोजगार और आर्थिक हितों की सुरक्षा के लिए आवश्यक कदम उठाने की अपील की है।
हार्वेस्टर संघ के सदस्यों का कहना है कि धान कटाई के सीजन में छत्तीसगढ़ के विभिन्न जिलों और दूसरे राज्यों से बड़ी संख्या में हार्वेस्टर कोंडागांव जिले में पहुंचते हैं। ये मशीनें स्थानीय स्तर पर धान कटाई का कार्य करती हैं, जिससे जिले के स्थानीय हार्वेस्टर संचालकों को पर्याप्त काम नहीं मिल पाता। संघ के अनुसार, बाहरी हार्वेस्टरों की बढ़ती संख्या के कारण स्थानीय संचालकों की आमदनी प्रभावित होती है और उन्हें आर्थिक नुकसान उठाना पड़ता है।
संघ ने ज्ञापन में बताया कि स्थानीय हार्वेस्टर संचालकों ने अपने व्यवसाय को स्थापित करने के लिए बड़ी रकम निवेश की है। कई संचालकों ने बैंक से ऋण लेकर हार्वेस्टर मशीनें खरीदी हैं। इसके अलावा मशीनों के रखरखाव, मरम्मत, ईंधन और कर्मचारियों के वेतन सहित अन्य खर्चों की जिम्मेदारी भी संचालकों पर होती है। ऐसे में धान कटाई के सीमित सीजन के दौरान पर्याप्त काम नहीं मिलने से उनके सामने बैंक की किस्तें चुकाने और परिवार का भरण-पोषण करने की समस्या खड़ी हो सकती है।
हार्वेस्टर संघ ने जिला प्रशासन से मांग की है कि कोंडागांव जिले में धान कटाई का कार्य केवल कोंडागांव, नारायणपुर और बस्तर जिले के हार्वेस्टर संचालकों के माध्यम से कराने की अनुमति दी जाए। इसके साथ ही छत्तीसगढ़ के अन्य जिलों और दूसरे राज्यों से आने वाले हार्वेस्टरों के संचालन पर नियमानुसार रोक लगाने के लिए आवश्यक कार्रवाई की जाए।
संघ के पदाधिकारियों का कहना है कि स्थानीय संचालकों को प्राथमिकता मिलने से उनके रोजगार के अवसर सुरक्षित रहेंगे। इससे मशीनों में किए गए निवेश की भरपाई करने और आर्थिक जिम्मेदारियों को पूरा करने में भी मदद मिलेगी। संघ ने उम्मीद जताई है कि जिला प्रशासन उनकी समस्याओं को गंभीरता से समझेगा और स्थानीय संचालकों के हित में उचित निर्णय लेगा।
हालांकि, बाहरी जिलों और राज्यों से आने वाले हार्वेस्टरों पर प्रतिबंध लगाने की मांग के संबंध में प्रशासन को लागू नियमों और किसानों की जरूरतों पर भी विचार करना होगा। धान कटाई के समय किसानों को पर्याप्त मशीनें उपलब्ध होना आवश्यक है, ताकि फसल की कटाई समय पर पूरी हो सके। ऐसे में स्थानीय संचालकों के रोजगार और किसानों की सुविधाओं के बीच संतुलन बनाना महत्वपूर्ण होगा।
ज्ञापन सौंपने के दौरान हार्वेस्टर संघ कोंडागांव के जिलाध्यक्ष पोमेश महावीर, नरेंद्र जैन, गोवर्धन दीवान, बलराज साहू सहित क्षेत्र के कई हार्वेस्टर संचालक उपस्थित रहे। सभी ने एकजुट होकर अपनी मांगों को प्रशासन के सामने रखा और जल्द उचित कार्रवाई की उम्मीद जताई।
फिलहाल हार्वेस्टर संघ की मांग पर जिला प्रशासन की ओर से किसी निर्णय की जानकारी सामने नहीं आई है। अब स्थानीय हार्वेस्टर संचालकों की नजर कलेक्टर और संबंधित अधिकारियों की आगामी कार्रवाई पर टिकी हुई है।