कबीरधाम में 200 से अधिक लोगों ने लिया AI प्रशिक्षण, अब गांव-गांव पहुंचाएंगे जागरूकता का संदेश
कवर्धा में सेवा संकल्प अभियान के तहत ‘मैं एआई जागरूक हूं’ विषय पर कार्यशाला आयोजित की गई। इसमें 200 से अधिक लोगों ने AI के उपयोग, सीमाओं और सुरक्षित इस्तेमाल का प्रशिक्षण लिया। प्रशिक्षणार्थी अब मास्टर ट्रेनर के रूप में स्कूलों, कॉलेजों और ग्रामीण क्षेत्रों में जाकर विद्यार्थियों, युवाओं एवं ग्रामीणों को AI के सकारात्मक और जिम्मेदार उपयोग के साथ साइबर अपराध व डीपफेक से बचाव के बारे में जागरूक करेंगे।
UNITED NEWS OF ASIA. सौरभ नामदेव, कवर्धा l आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी AI को आम लोगों और ग्रामीण क्षेत्रों तक पहुंचाने के उद्देश्य से कबीरधाम जिले में सेवा संकल्प अभियान के तहत नई पहल शुरू की गई है। दुर्गावती चौक के पास स्थित स्वामी आत्मानंद उत्कृष्ट अंग्रेजी माध्यम विद्यालय में ‘मैं एआई जागरूक हूं’ विषय पर कार्यशाला आयोजित की गई। कार्यशाला में 200 से अधिक लोगों ने AI से संबंधित प्रशिक्षण प्राप्त किया। अब ये प्रशिक्षणार्थी मास्टर ट्रेनर के रूप में जिले के अलग-अलग क्षेत्रों में जाकर विद्यार्थियों, युवाओं और ग्रामीणों को AI के सकारात्मक, सुरक्षित और जिम्मेदार उपयोग के बारे में जानकारी देंगे।
ग्रामीण यांत्रिकी सेवा एवं शिक्षा विभाग के समन्वय से आयोजित इस कार्यशाला में विशेषज्ञों ने AI की उपयोगिता और उसके संभावित प्रभावों के बारे में जानकारी दी। प्रतिभागियों को बताया गया कि AI का सही और जिम्मेदार उपयोग शिक्षा, शासकीय कार्यों, सामाजिक गतिविधियों तथा रोजमर्रा के कई कामों को आसान और तेज बनाने में मदद कर सकता है। इसके साथ ही AI की सीमाओं को समझना और तकनीक का उपयोग सावधानी के साथ करना भी जरूरी है।
कार्यशाला में AI के सकारात्मक उपयोग के साथ इसके संभावित जोखिमों पर भी विशेष चर्चा की गई। प्रतिभागियों को साइबर अपराध, ऑनलाइन वित्तीय धोखाधड़ी और डीपफेक जैसी तकनीकों से जुड़े खतरों के बारे में जागरूक किया गया। विशेषज्ञों ने समझाया कि सोशल मीडिया पर दिखाई देने वाली फोटो, वीडियो और सूचनाओं को बिना सत्यापन के सही नहीं मानना चाहिए। किसी संदिग्ध लिंक या संदेश पर क्लिक करने से पहले उसकी विश्वसनीयता जांचना और ऑनलाइन लेनदेन के दौरान विशेष सावधानी बरतना जरूरी है।
डीपफेक के बढ़ते इस्तेमाल को देखते हुए प्रतिभागियों को विशेष रूप से जागरूक किया गया कि AI की मदद से तैयार की गई फोटो, वीडियो और ऑडियो वास्तविक प्रतीत हो सकते हैं। इसलिए सोशल मीडिया पर प्रसारित किसी भी सामग्री को तुरंत साझा करने के बजाय उसके स्रोत और सत्यता की जांच करना आवश्यक है। इस प्रशिक्षण के माध्यम से डिजिटल सुरक्षा और तकनीकी समझ को बढ़ाने पर जोर दिया गया।
कार्यशाला में प्रशिक्षण प्राप्त करने वाले 200 से अधिक प्रतिभागी अब जागरूकता अभियान की महत्वपूर्ण कड़ी बनेंगे। मास्टर ट्रेनर के रूप में वे स्कूलों, कॉलेजों और ग्रामीण क्षेत्रों में जाकर लोगों को AI की उपयोगिता, सुरक्षित इस्तेमाल और संभावित जोखिमों के बारे में जानकारी देंगे। इससे एक प्रशिक्षण कार्यक्रम के माध्यम से बड़ी संख्या में नागरिकों तक तकनीकी जागरूकता पहुंचाने का प्रयास किया जाएगा।
कार्यशाला के समापन पर प्रतिभागियों ने AI का उपयोग सकारात्मक और रचनात्मक कार्यों के लिए करने का सामूहिक संकल्प लिया। उन्होंने AI के दुरुपयोग, भ्रामक जानकारी और समाज को नुकसान पहुंचाने वाले इस्तेमाल से बचने की बात कही। जिला स्तर पर शुरू की गई यह पहल आधुनिक तकनीक को ग्रामीण अंचलों तक पहुंचाने के साथ नागरिकों को डिजिटल रूप से जागरूक और सुरक्षित बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम के रूप में सामने आई है।