बैकुंठपुर जिला चिकित्सालय में अंतरराष्ट्रीय बालिका दिवस पर जागरूकता कार्यक्रम, शिक्षा और सुरक्षा का दिया संदेश
कोरिया जिले के बैकुंठपुर जिला चिकित्सालय में अंतरराष्ट्रीय बालिका दिवस के अवसर पर जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। जिला चिकित्सालय और नर्सिंग कॉलेज के संयुक्त समन्वय से हुए कार्यक्रम में नुक्कड़ नाटक, रंगोली, भाषण और पोस्टर प्रतियोगिताओं के माध्यम से बालिका संरक्षण, शिक्षा, स्वास्थ्य, सुरक्षा और सशक्तीकरण का संदेश दिया गया। कार्यक्रम में पीसीपीएनडीटी अधिनियम, 1994, कन्या भ्रूण हत्या की रोकथाम और बाल विवाह के दुष्परिणामों पर भी जानकारी दी गई।
UNITED NEWS OF ASIA. जमील अंसारी, कोरिया l अंतरराष्ट्रीय बालिका दिवस के अवसर पर कोरिया जिले के जिला चिकित्सालय बैकुंठपुर में जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. बलवंत सिंह और सिविल सर्जन डॉ. आयुष जायसवाल के मार्गदर्शन में जिला चिकित्सालय एवं नर्सिंग कॉलेज के समन्वय से आयोजित इस कार्यक्रम में बालिकाओं के अधिकार, शिक्षा, स्वास्थ्य, सुरक्षा और सशक्तीकरण पर जोर दिया गया। विभिन्न रचनात्मक गतिविधियों के माध्यम से समाज में बालिकाओं के प्रति सकारात्मक सोच विकसित करने का संदेश दिया गया।
कार्यक्रम में नर्सिंग कॉलेज के विद्यार्थियों ने नुक्कड़ नाटक प्रस्तुत किया। इसके साथ ही रंगोली, भाषण और पोस्टर प्रतियोगिताओं का आयोजन किया गया। विद्यार्थियों ने अपनी प्रस्तुतियों के माध्यम से बालिका संरक्षण, लैंगिक समानता और बेटियों को शिक्षा एवं विकास के समान अवसर उपलब्ध कराने का संदेश दिया। कार्यक्रम में ‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ’ अभियान के उद्देश्यों को भी प्रमुखता से सामने रखा गया।
इस अवसर पर गर्भधारण एवं प्रसव पूर्व निदान तकनीक (लिंग चयन प्रतिषेध) अधिनियम, 1994 यानी पीसीपीएनडीटी अधिनियम के प्रावधानों की जानकारी दी गई। विशेषज्ञों ने कन्या भ्रूण हत्या जैसी सामाजिक बुराइयों के दुष्परिणामों पर प्रकाश डालते हुए बेटा-बेटी के बीच भेदभाव समाप्त करने की आवश्यकता बताई। उन्होंने कहा कि प्रत्येक बालिका को जन्म लेने, शिक्षा प्राप्त करने और अपने जीवन में आगे बढ़ने का समान अधिकार मिलना चाहिए। समाज में बालिकाओं के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण अपनाना जरूरी है।
जिला चिकित्सालय के सिविल सर्जन डॉ. आयुष जायसवाल ने बालिकाओं के स्वास्थ्य, शिक्षा, अधिकारों और सामाजिक सुरक्षा के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि बालिकाओं को समान अवसर उपलब्ध कराना और उनके स्वास्थ्य एवं शिक्षा के प्रति जागरूकता बढ़ाना स्वस्थ तथा सशक्त समाज के निर्माण के लिए आवश्यक है। उन्होंने बालिकाओं के सर्वांगीण विकास के लिए परिवार और समाज की जिम्मेदारी को भी महत्वपूर्ण बताया।
कार्यक्रम के दौरान बाल विवाह की रोकथाम को लेकर भी जागरूकता संदेश दिया गया। मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. बलवंत सिंह ने अभिभावकों, परिजनों और समाज प्रमुखों से बाल विवाह रोकने के लिए सामूहिक संकल्प लेने तथा जनजागरूकता बढ़ाने की अपील की। उन्होंने कहा कि कम उम्र में विवाह होने से बालिकाओं के शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है। इसलिए बेटियों को शिक्षा, कौशल विकास और अपनी प्रतिभा निखारने के पर्याप्त अवसर देना जरूरी है।
डॉ. बलवंत सिंह ने कहा कि बेटियों को आत्मनिर्भर बनाना समय की आवश्यकता है। उन्हें उच्च शिक्षा प्राप्त करने, विभिन्न क्षेत्रों में आगे बढ़ने और अपने सपनों को साकार करने के लिए प्रोत्साहित किया जाना चाहिए। उन्होंने विवाह की कानूनी उम्र पूरी होने के बाद ही विवाह करने के महत्व पर भी जोर दिया। बालिकाओं को शिक्षित, स्वस्थ और सुरक्षित बनाने के लिए परिवार तथा समाज की सक्रिय भागीदारी आवश्यक है।
कार्यक्रम के माध्यम से यह संदेश दिया गया कि प्रत्येक बालिका को सुरक्षित वातावरण, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं और समान अवसर मिलना चाहिए। बालिकाओं के अधिकारों का सम्मान और उनके सशक्तीकरण के प्रयास ही एक समानतापूर्ण एवं मजबूत समाज की नींव रख सकते हैं।