चेमल खदान में 3 पोकलेन मशीनों में आग, मौके से ‘लाल सलाम’ के पर्चे मिले; नक्सली एंगल की जांच
कांकेर जिले के चेमल गांव स्थित पुष्प स्टील लिमिटेड की लौह अयस्क खदान में खड़ी तीन पोकलेन मशीनों में आग लगाए जाने का मामला सामने आया है। मंगलवार सुबह कर्मचारियों ने मशीनों को जली हुई हालत में देखा। घटनास्थल से ‘लाल सलाम’ लिखे दो पर्चे भी मिले हैं, जिसके बाद पुलिस ने नक्सली एंगल को जांच में शामिल किया है। हालांकि, पुलिस ने अभी घटना को नक्सली वारदात घोषित नहीं किया है। फॉरेंसिक टीम घटनास्थल से साक्ष्य जुटाकर जांच कर रही है।
UNITED NEWS OF ASIA. श्रीदाम ढाली, भानुप्रतापपुर l कांकेर जिले के लोहत्तर थाना क्षेत्र के ग्राम चेमल स्थित पुष्प स्टील लिमिटेड की लौह अयस्क खदान में खड़ी तीन पोकलेन मशीनों में आग लगाए जाने का मामला सामने आया है। मंगलवार सुबह कर्मचारी जब खदान परिसर में पहुंचे तो तीनों मशीनें जली हुई हालत में मिलीं। घटना की जानकारी खदान प्रबंधन को दी गई, जिसके बाद पुलिस को सूचना दी गई। आगजनी की इस घटना के बाद पुलिस ने मौके पर पहुंचकर जांच शुरू कर दी है।
जानकारी के अनुसार सोमवार शाम खदान में काम खत्म होने के बाद कर्मचारी और मजदूर अपने कैंप की ओर चले गए थे। इसके बाद खदान परिसर में तीनों पोकलेन मशीनें खड़ी थीं। मंगलवार सुबह जब कर्मचारी दोबारा काम पर पहुंचे तो मशीनों को क्षतिग्रस्त और जली हुई हालत में देखकर इसकी सूचना संबंधित अधिकारियों को दी। आग से तीनों मशीनों को नुकसान पहुंचा है।
घटना की सूचना मिलने के बाद पुलिस टीम ने मौके का निरीक्षण किया। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि मशीनों में आग किस समय और किस तरीके से लगाई गई। साथ ही वारदात को अंजाम देने वाले संदिग्ध लोग खदान परिसर में किस रास्ते से दाखिल हुए और घटना के बाद किस दिशा में गए, इसकी भी पड़ताल की जा रही है। आसपास के क्षेत्र में मौजूद लोगों और खदान कर्मचारियों से भी जानकारी जुटाई जा रही है।
मामले में घटनास्थल से मिले दो पर्चों ने जांच को और महत्वपूर्ण बना दिया है। पुलिस के अनुसार इन पर्चों पर ‘लाल सलाम’ लिखा हुआ है। बताया जा रहा है कि पर्चों में खदान से जुड़ी कुछ मांगों का उल्लेख करते हुए उन्हें निर्धारित समय में पूरा करने की बात कही गई है। पर्चे मिलने के बाद पुलिस ने घटना में नक्सली कनेक्शन की संभावना को भी जांच के दायरे में लिया है।
हालांकि, पुलिस ने फिलहाल इस घटना को नक्सली वारदात के रूप में घोषित नहीं किया है। जांच का एक प्रमुख पहलू यह भी है कि कहीं किसी व्यक्ति या समूह ने नक्सली संगठन के नाम या तौर-तरीके का इस्तेमाल कर घटना को अंजाम तो नहीं दिया। पुलिस पर्चों की भाषा, लिखावट और घटनास्थल से मिले अन्य साक्ष्यों का परीक्षण कर रही है।
घटना की जांच के लिए फॉरेंसिक टीम को भी मौके पर बुलाया गया। SDOP शेर बहादुर सिंह ने घटनास्थल का निरीक्षण किया। फॉरेंसिक टीम ने जली हुई मशीनों और आसपास के क्षेत्र से आवश्यक साक्ष्य जुटाए हैं। आग लगने की वजह और घटना में इस्तेमाल किए गए संभावित साधनों का पता लगाने के लिए भी जांच की जा रही है।
फिलहाल पुलिस के सामने सबसे बड़ा सवाल यह है कि तीनों मशीनों में आग किसने लगाई और घटनास्थल पर ‘लाल सलाम’ लिखे पर्चे किस उद्देश्य से छोड़े गए। पुलिस नक्सली गतिविधि के साथ-साथ अन्य संभावित कारणों को भी ध्यान में रखकर जांच कर रही है। खदान से जुड़े विवाद, पर्चों में लिखी मांगों और स्थानीय स्तर पर उपलब्ध जानकारी को भी जांच का हिस्सा बनाया गया है।
पुलिस ने अभी तक किसी व्यक्ति या संगठन को घटना के लिए जिम्मेदार नहीं बताया है। मामले में आरोपियों की पहचान और गिरफ्तारी के लिए जांच जारी है। फॉरेंसिक रिपोर्ट और पुलिस की विस्तृत जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि मशीनों में आगजनी के पीछे वास्तव में नक्सली संगठन की भूमिका थी या किसी अन्य व्यक्ति अथवा समूह ने नक्सली गतिविधि जैसा तरीका अपनाकर वारदात को अंजाम दिया।