बिलासपुर में हिंदू-मुस्लिम एकता की मिसाल, चांदनी चौक में पांचवें वर्ष मां दुर्गा की स्थापना; बस्तर थीम बनी आकर्षण
छत्तीसगढ़ के बिलासपुर स्थित चांदनी चौक में हिंदू और मुस्लिम समुदाय के लोग मिलकर मां दुर्गा की प्रतिमा स्थापित कर रहे हैं। समिति के पांचवें वर्ष में प्रवेश के साथ इस बार बस्तर थीम पर झोपड़ी तैयार की गई है, जिसे सदस्यों ने अपने हाथों से बनाया है। आयोजन धार्मिक सद्भाव, आपसी सम्मान और भाईचारे का संदेश दे रहा है।
UNITED NEWS OF ASIA. विशु तिवारी, बिलासपुर l छत्तीसगढ़ के बिलासपुर शहर के चांदनी चौक में दुर्गा उत्सव के दौरान धार्मिक सद्भाव और आपसी भाईचारे की अनूठी तस्वीर देखने को मिल रही है। यहां हिंदू और मुस्लिम समुदाय के लोग मिलकर मां दुर्गा की प्रतिमा स्थापित करने और उत्सव की तैयारियों में भागीदारी निभा रहे हैं। यह आयोजन गंगा-जमुनी तहजीब, आपसी सम्मान और सामाजिक एकता का संदेश दे रहा है।
समिति इस वर्ष अपने आयोजन के पांचवें वर्ष में प्रवेश कर रही है। हर साल की तरह इस बार भी सदस्यों ने मिलकर दुर्गा उत्सव को खास बनाने का प्रयास किया है। इस वर्ष आयोजन का प्रमुख आकर्षण बस्तर थीम है, जिसके तहत सदस्यों ने अपने हाथों से झोपड़ी तैयार की है। पारंपरिक शैली से प्रेरित इस सजावट में स्थानीय संस्कृति की झलक दिखाई देती है। सदस्यों की मेहनत और सामूहिक भागीदारी ने आयोजन को अलग पहचान दी है।
धर्म अलग, लेकिन भाईचारा एक
इस आयोजन की सबसे खास बात दोनों समुदायों की साझा भागीदारी है। दुर्गा उत्सव की तैयारियों से लेकर व्यवस्था बनाने तक लोग मिलकर काम करते हैं। मुस्लिम समुदाय के सदस्यों का कहना है कि वे दुर्गा उत्सव के दौरान अपने हिंदू भाइयों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़े रहते हैं। इसी तरह ईद के अवसर पर हिंदू समुदाय के लोग भी उनके साथ खुशियां बांटते हैं। आपसी सहयोग और सम्मान की यह भावना त्योहारों को केवल धार्मिक आयोजन तक सीमित नहीं रहने देती, बल्कि उन्हें सामाजिक मेल-मिलाप का अवसर भी बनाती है।
बस्तर थीम से सजा दुर्गा उत्सव
इस वर्ष बस्तर की संस्कृति से प्रेरित थीम ने आयोजन को विशेष रूप दिया है। समिति के सदस्यों ने झोपड़ी का निर्माण स्वयं किया है। इसमें उनकी मेहनत, रचनात्मकता और सामूहिक प्रयास दिखाई देते हैं। आयोजन से जुड़े लोगों के लिए यह केवल सजावट नहीं, बल्कि अपनी सांस्कृतिक विविधता को सम्मान देने और मिल-जुलकर त्योहार मनाने का माध्यम भी है।
एकता और इंसानियत का संदेश
चांदनी चौक का यह आयोजन बताता है कि धार्मिक आस्था के साथ सामाजिक सद्भाव भी महत्वपूर्ण है। जब अलग-अलग समुदायों के लोग एक-दूसरे के त्योहारों में शामिल होते हैं, तो आपसी विश्वास मजबूत होता है और समाज में सकारात्मक संदेश जाता है। मां दुर्गा की स्थापना के साथ यहां प्रेम, सहयोग और इंसानियत की भावना को भी महत्व दिया जा रहा है।
बिलासपुर की यह तस्वीर विविधता में एकता की भावना को सामने लाती है। चांदनी चौक का दुर्गा उत्सव संदेश देता है कि धर्म और पूजा-पद्धतियां अलग हो सकती हैं, लेकिन आपसी सम्मान, प्रेम और भाईचारा लोगों को एक परिवार की तरह जोड़ सकता है। यही भारत की सांस्कृतिक विविधता और साझा परंपराओं की खूबसूरती है।