बसंतपुर में बच्चों को परोसा जा रहा कथित सड़ा-गला चावल! स्कूलों और आंगनबाड़ी में भोजन की गुणवत्ता पर उठे सवाल

छत्तीसगढ़ के बलरामपुर-रामानुजगंज जिले के वाड्रफनगर विकासखंड अंतर्गत ग्राम पंचायत बसंतपुर में शासकीय उचित मूल्य दुकान से स्कूलों और आंगनबाड़ी केंद्रों को कथित तौर पर खराब गुणवत्ता का चावल दिए जाने का मामला सामने आया है। ग्रामीणों और पालकों का आरोप है कि चावल पीला, बदबूदार और सड़ा-गला है, जिसमें कीड़े और कंकड़ भी मिल रहे हैं। मामले की जांच कर बच्चों के लिए गुणवत्तापूर्ण चावल उपलब्ध कराने की मांग की गई है।

Oct 23, 2026 - 08:14
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बसंतपुर में बच्चों को परोसा जा रहा कथित सड़ा-गला चावल! स्कूलों और आंगनबाड़ी में भोजन की गुणवत्ता पर उठे सवाल

UNITED NEWS OF ASIA. अली खान, बलरामपुर l छत्तीसगढ़ के बलरामपुर-रामानुजगंज जिले के वाड्रफनगर विकासखंड अंतर्गत ग्राम पंचायत बसंतपुर में सरकारी स्कूलों और आंगनबाड़ी केंद्रों में बच्चों को दिए जाने वाले भोजन की गुणवत्ता को लेकर गंभीर सवाल उठे हैं। ग्रामीणों और पालकों ने शासकीय उचित मूल्य दुकान (सोसायटी) से मध्यान्ह भोजन के लिए उपलब्ध कराए जा रहे चावल की गुणवत्ता पर आपत्ति जताई है। उनका आरोप है कि बच्चों के भोजन के लिए दिया जा रहा चावल पीला, बदबूदार और सड़ा-गला है। ग्रामीणों के अनुसार, चावल में कीड़े और कंकड़ भी पाए जा रहे हैं।

बच्चों के स्वास्थ्य को लेकर बढ़ी चिंता

ग्रामीणों का कहना है कि ग्राम के प्राथमिक शाला, माध्यमिक शाला और आंगनबाड़ी केंद्रों में इसी चावल से भोजन तैयार किया जा रहा है। पालकों के मुताबिक, चावल की स्थिति इतनी खराब है कि घर के मवेशी और मुर्गियां भी उसे खाने से परहेज कर रहे हैं। ऐसे में बच्चों को यही चावल खिलाए जाने की आशंका ने अभिभावकों की चिंता बढ़ा दी है। हालांकि, चावल की गुणवत्ता और बच्चों की सेहत पर इसके प्रभाव की पुष्टि के लिए आधिकारिक जांच और स्वास्थ्य संबंधी जानकारी आवश्यक है।

धोने के बाद भी नहीं जाती बदबू

स्थानीय रसोइयों की शिकायत है कि चावल को कई बार धोने के बावजूद उसकी बदबू दूर नहीं होती। उनका कहना है कि पकने के बाद चावल चिपचिपा हो जाता है और सामान्य भोजन की तरह खाने योग्य नहीं रहता। इसके बावजूद मध्यान्ह भोजन तैयार करने में इसी चावल के इस्तेमाल की समस्या सामने आ रही है। यदि शिकायत सही पाई जाती है, तो यह बच्चों को पौष्टिक और सुरक्षित भोजन उपलब्ध कराने की व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करता है।

खराब चावल सोसायटी तक कैसे पहुंचा?

इस मामले में सबसे बड़ा सवाल यह है कि चावल की गुणवत्ता की जांच किस स्तर पर की गई थी। क्या उचित मूल्य दुकान तक पहुंचने से पहले भंडारण या परिवहन के दौरान चावल खराब हुआ, अथवा वितरण के समय गुणवत्ता की जांच में लापरवाही बरती गई? इन सवालों का जवाब संबंधित विभाग की जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा। फिलहाल, सोसायटी संचालक या संबंधित अधिकारियों की भूमिका को लेकर लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।

ग्रामीणों ने जांच और कार्रवाई की मांग की

ग्रामीणों ने जिला प्रशासन और खाद्य विभाग से मामले की तत्काल जांच कराने की मांग की है। उनकी मांग है कि चावल के नमूने लेकर प्रयोगशाला में गुणवत्ता की जांच कराई जाए, वितरण और भंडारण की प्रक्रिया की पड़ताल हो तथा दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाए। साथ ही, स्कूलों और आंगनबाड़ी केंद्रों में बच्चों के लिए तत्काल अच्छी गुणवत्ता का चावल उपलब्ध कराया जाए।

अधिकारियों का पक्ष सामने आना बाकी

इस संबंध में संबंधित अधिकारियों से संपर्क करने का प्रयास किया गया, लेकिन संपर्क नहीं हो सका। इसलिए विभाग की आधिकारिक प्रतिक्रिया फिलहाल सामने नहीं आई है। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि प्रशासन शिकायत पर क्या कदम उठाता है और बच्चों को सुरक्षित एवं गुणवत्तापूर्ण भोजन उपलब्ध कराने के लिए क्या व्यवस्था की जाती है। बच्चों के पोषण और स्वास्थ्य से जुड़े इस मामले में निष्पक्ष जांच तथा समयबद्ध कार्रवाई आवश्यक है।