जामुल में देवी भागवत ज्ञान यज्ञ सप्ताह, पंचमी पर स्कंदमाता की महिमा का वर्णन
छत्तीसगढ़ के जामुल में आयोजित देवी भागवत ज्ञान यज्ञ सप्ताह के पांचवें दिन पंडित चंपेश कृष्ण महाराज ने स्कंदमाता की महिमा का वर्णन किया। उन्होंने तारकासुर वध के प्रसंग के माध्यम से जीवन में संस्कार, श्रद्धा और अहंकार त्यागने का संदेश दिया। कार्यक्रम में जनप्रतिनिधियों, महिला समिति की सदस्यों और बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने भाग लिया।
UNITED NEWS OF ASIA. लोकेश्वर सिंह ठाकुर, जामुल। जामुल में आयोजित देवी भागवत ज्ञान यज्ञ सप्ताह के पांचवें दिन धार्मिक वातावरण में श्रद्धालुओं ने कथा का श्रवण किया। इस अवसर पर पंडित चंपेश कृष्ण महाराज नंदकठी ने पंचमी तिथि पर स्कंदमाता की पूजा-अर्चना और उनकी महिमा का वर्णन करते हुए श्रद्धालुओं को संस्कार, श्रद्धा और सदाचार का संदेश दिया।
कथावाचन के दौरान पंडित चंपेश कृष्ण महाराज ने बताया कि नवरात्रि की पंचमी तिथि को मां स्कंदमाता की पूजा की जाती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मां ने तारकासुर का वध किया था। उन्होंने तारकासुर के प्रसंग को जीवन में व्याप्त अहंकार, कुतर्क और रूढ़िवादिता से जोड़ते हुए कहा कि मनुष्य को अपने जीवन में सकारात्मक विचारों और अच्छे संस्कारों को स्थान देना चाहिए।
महाराज ने कहा कि परिवार और समाज में संस्कारों का सिंचन करना आवश्यक है, ताकि नई पीढ़ी में धर्म और शास्त्रों के प्रति श्रद्धा बनी रहे। उन्होंने समझाया कि जब व्यक्ति के जीवन में अच्छे संस्कार और विवेक विकसित होते हैं, तब वह कुतर्क, अहंकार और नकारात्मक प्रवृत्तियों से दूर रह सकता है। मां स्कंदमाता की आराधना हमें परिवार में संस्कारों को मजबूत करने और जीवन में सदाचार अपनाने की प्रेरणा देती है।
उन्होंने श्रद्धालुओं से धार्मिक परंपराओं के महत्व को समझने और अपने आचरण में सकारात्मक बदलाव लाने का आह्वान किया। कथा के दौरान मां की महिमा और धार्मिक प्रसंगों के माध्यम से जीवन में श्रद्धा, संयम तथा सद्भाव बनाए रखने का संदेश दिया गया।
इस धार्मिक आयोजन में पार्षद लेखराम साहू, पालिका उपाध्यक्ष सुनीता चंदेलवाल, शिव शक्ति महिला मोहल्ला विकास समिति की सदस्य महिलाएं तथा सैकड़ों श्रद्धालु उपस्थित रहे। सभी ने कथा का श्रवण कर धार्मिक आयोजन में सहभागिता निभाई।
देवी भागवत ज्ञान यज्ञ सप्ताह के पांचवें दिन का आयोजन भक्ति और आध्यात्मिक वातावरण के बीच संपन्न हुआ। कथा के माध्यम से श्रद्धालुओं को संदेश दिया गया कि धार्मिक आस्था के साथ परिवार और समाज में अच्छे संस्कारों को बढ़ावा देना भी आवश्यक है। ऐसे आयोजन लोगों को अपनी धार्मिक और सांस्कृतिक परंपराओं से जोड़ने के साथ जीवन में नैतिक मूल्यों को अपनाने की प्रेरणा देते हैं।