महतारी वंदन योजना से ईश्वरी ने संवारी सब्जी-बाड़ी, परिवार की आमदनी बढ़ाने की ओर बढ़ाया कदम

जीपीएम जिले के पेण्ड्रा विकासखंड के ग्राम बम्हनी की ईश्वरी मरकार महतारी वंदन योजना से मिलने वाली एक हजार रुपये की मासिक सहायता राशि का सदुपयोग कर सब्जी-बाड़ी विकसित कर रही हैं। इससे परिवार को ताजी सब्जियां मिल रही हैं और अतिरिक्त उपज बेचकर आमदनी भी हो रही है। बच्चों की पढ़ाई और घरेलू जरूरतों में भी योजना की राशि सहारा बन रही है।

Oct 5, 2026 - 17:31
 0  3
महतारी वंदन योजना से ईश्वरी ने संवारी सब्जी-बाड़ी, परिवार की आमदनी बढ़ाने की ओर बढ़ाया कदम

UNITED NEWS OF ASIA. अमृतेश्वर सिंह, रायपुर l मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में संचालित महतारी वंदन योजना ग्रामीण महिलाओं के लिए आर्थिक संबल का माध्यम बन रही है। जीपीएम जिले के पेण्ड्रा विकासखंड अंतर्गत दूरस्थ वनांचल ग्राम बम्हनी की 40 वर्षीय ईश्वरी मरकार ने योजना से मिलने वाली हर महीने एक हजार रुपये की सहायता राशि का सदुपयोग करते हुए अपने परिवार की आर्थिक स्थिति को मजबूत करने की दिशा में कदम बढ़ाया है। ईश्वरी ने घर के पीछे की जमीन पर सब्जी-बाड़ी विकसित की है, जिससे परिवार को घरेलू उपयोग के लिए ताजी सब्जियां मिल रही हैं और अतिरिक्त उपज बेचकर आमदनी भी हो रही है।

ईश्वरी के अनुसार, पहले परिवार की आर्थिक स्थिति ऐसी थी कि छोटी-छोटी जरूरतों को पूरा करने के लिए भी कई बार दूसरों से पैसे उधार लेने पड़ते थे। सीमित आय के कारण घरेलू खर्च के साथ बच्चों की पढ़ाई-लिखाई की जरूरतें पूरी करना भी चुनौतीपूर्ण रहता था। कई बार जरूरी काम के लिए समय पर पैसे उपलब्ध नहीं हो पाते थे, जिससे उन्हें परेशानी का सामना करना पड़ता था।

महतारी वंदन योजना के तहत नियमित रूप से मिलने वाली एक हजार रुपये की राशि ने ईश्वरी को आर्थिक राहत दी। अब उन्हें छोटी जरूरतों के लिए दूसरों पर निर्भरता कम हुई है। योजना की राशि का उपयोग उन्होंने केवल घरेलू खर्च तक सीमित नहीं रखा, बल्कि इसका एक हिस्सा अपनी सब्जी-बाड़ी तैयार करने में लगाया। घर के पीछे उपलब्ध जमीन पर उन्होंने अलग-अलग प्रकार की सब्जियों की खेती शुरू की।

सब्जी-बाड़ी से परिवार को दोहरा लाभ मिल रहा है। एक ओर घर में उपयोग होने वाली सब्जियों की खरीद पर होने वाला खर्च कम हुआ है, वहीं दूसरी ओर अतिरिक्त सब्जियों को बाजार में बेचकर ईश्वरी अतिरिक्त आमदनी अर्जित कर रही हैं। छोटी-सी जमीन पर तैयार की गई यह बाड़ी अब उनके लिए आय का साधन बनने के साथ आत्मनिर्भरता की पहचान भी बन गई है।

ईश्वरी बताती हैं कि योजना की राशि से उन्हें अपने बच्चों की पढ़ाई से जुड़ी छोटी-छोटी जरूरतों को पूरा करने में भी मदद मिल रही है। हर महीने निश्चित राशि मिलने से परिवार के बजट में राहत मिली है और जरूरी खर्चों को व्यवस्थित करने में आसानी हुई है।

ईश्वरी के जीवन में आया बदलाव केवल आर्थिक नहीं है। नियमित आर्थिक सहायता और अपनी मेहनत से उन्हें आत्मविश्वास भी मिला है। जो महिला कभी जरूरत के समय दूसरों से उधार लेने को मजबूर होती थीं, आज अपनी मेहनत से सब्जी उगाकर परिवार की आमदनी बढ़ाने की कोशिश कर रही हैं। बम्हनी गांव में उनकी सब्जी-बाड़ी शासन की सहायता और मेहनत के बेहतर समन्वय की मिसाल बन रही है।

ईश्वरी मरकार ने महतारी वंदन योजना के तहत नियमित आर्थिक सहायता मिलने पर मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के प्रति आभार व्यक्त किया। उनका कहना है कि योजना से उन्हें आर्थिक सहारा मिलने के साथ अपने दम पर आगे बढ़ने का हौसला मिला है। ईश्वरी की कहानी यह संदेश देती है कि यदि आर्थिक सहायता के साथ मेहनत और सही सोच जुड़ जाए, तो ग्रामीण महिलाएं अपने परिवार की आर्थिक मजबूती में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं।