कवर्धा के आकांक्षी विकासखंड बोड़ला की 44 ग्राम पंचायतें टीबी मुक्त घोषित, सरपंचों और मितानिनों का हुआ सम्मान
छत्तीसगढ़ के कबीरधाम जिले के आकांक्षी विकासखंड बोड़ला की 44 ग्राम पंचायतों को निर्धारित मानकों के आधार पर टीबी मुक्त घोषित किया गया है। इस उपलब्धि पर कवर्धा के वीर सावरकर भवन में सम्मान समारोह आयोजित किया गया। कार्यक्रम में टीबी उन्मूलन अभियान में योगदान देने वाले सरपंचों, पंचायत प्रतिनिधियों और मितानिनों को प्रमाण पत्र देकर सम्मानित किया गया। जिले की कुल 144 ग्राम पंचायतों को टीबी मुक्त घोषित किया गया है। अभियान को जमीनी स्तर पर मजबूत करने के लिए जोश टीम का भी शुभारंभ किया गया।
UNITED NEWS OF ASIA. सौरभ नामदेव, कबीरधाम l कबीरधाम जिले के आकांक्षी विकासखंड बोड़ला की 44 ग्राम पंचायतों को राष्ट्रीय क्षय उन्मूलन कार्यक्रम के अंतर्गत टीबी मुक्त घोषित किया गया है। निर्धारित मानकों को पूरा करने वाली इन ग्राम पंचायतों की उपलब्धि के उपलक्ष्य में कवर्धा स्थित वीर सावरकर भवन में टीबी मुक्त ग्राम पंचायत सम्मान समारोह आयोजित किया गया। कार्यक्रम में टीबी उन्मूलन अभियान को जमीनी स्तर पर और अधिक प्रभावी बनाने के उद्देश्य से जोश टीम का शुभारंभ भी किया गया। इस उपलब्धि को क्षेत्र में स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार, टीबी के प्रति जागरूकता और सामुदायिक सहभागिता की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
44 ग्राम पंचायतों को मिली उपलब्धि
टीबी मुक्त भारत अभियान के तहत बोड़ला विकासखंड की 44 ग्राम पंचायतों ने निर्धारित मानकों को पूरा किया। इसके साथ ही कबीरधाम जिले की कुल 144 ग्राम पंचायतों को टीबी मुक्त घोषित किया गया है। इस उपलब्धि में ग्राम स्तर पर स्वास्थ्य जागरूकता, समय पर जांच, मरीजों के उपचार और पोषण सहायता जैसी गतिविधियों की महत्वपूर्ण भूमिका रही। अभियान का उद्देश्य टीबी की पहचान और उपचार को प्रभावी बनाना तथा समुदाय को इस बीमारी के प्रति जागरूक करना है।
छह निर्धारित सूचकांकों के आधार पर हुआ चयन
मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी के अनुसार, वर्ष 2025 में जिले की कुल 470 ग्राम पंचायतों में से 144 ग्राम पंचायतों को छह निर्धारित सूचकांकों के आधार पर टीबी मुक्त घोषित किया गया। इनमें प्रति एक हजार की आबादी पर कम से कम 30 लोगों की टीबी जांच, टीबी के मामलों की निर्धारित सीमा, दवा संवेदनशीलता की जांच, निक्षय पोषण योजना के अंतर्गत शत-प्रतिशत भुगतान, कम से कम 85 प्रतिशत उपचार सफलता दर और प्रत्येक टीबी मरीज को पोषण सहायता उपलब्ध कराने के लिए निक्षय मित्र की व्यवस्था शामिल है।
इन मानकों का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि ग्राम पंचायतों में टीबी की जांच और उपचार की सुविधाएं प्रभावी ढंग से उपलब्ध हों। साथ ही, मरीजों को उपचार के दौरान आवश्यक पोषण सहायता मिले और बीमारी के प्रति लोगों में जागरूकता बढ़े।
सरपंचों और मितानिनों को किया गया सम्मानित
सम्मान समारोह में जिला पंचायत अध्यक्ष ईश्वरी साहू, जिला पंचायत उपाध्यक्ष कैलाश चन्द्रवंशी, नगर पालिका अध्यक्ष चन्द्रप्रकाश चन्द्रवंशी और जिला पंचायत सदस्य एवं जिला स्वास्थ्य समिति की अध्यक्ष पूर्णिमा साहू सहित विभिन्न जनप्रतिनिधि, पंचायत प्रतिनिधि और अन्य अतिथि उपस्थित रहे। जिला पंचायत अध्यक्ष ईश्वरी साहू ने टीबी मुक्त घोषित ग्राम पंचायतों के सरपंचों और प्रतिनिधियों को प्रमाण पत्र प्रदान कर उनके योगदान की सराहना की। ग्राम स्तर पर स्वास्थ्य सेवाओं और जागरूकता गतिविधियों को आगे बढ़ाने में मितानिनों की भूमिका को भी महत्वपूर्ण माना गया।
टीबी उन्मूलन के लिए सामुदायिक भागीदारी पर जोर
टीबी मुक्त पंचायतों की उपलब्धि यह दर्शाती है कि बीमारी की समय पर पहचान, नियमित उपचार और पोषण सहायता के साथ सामुदायिक भागीदारी जरूरी है। जोश टीम के शुभारंभ से अभियान को जमीनी स्तर पर और अधिक प्रभावी बनाने की पहल की गई है। जिले में टीबी उन्मूलन के प्रयासों को आगे बढ़ाने के लिए स्वास्थ्य विभाग, पंचायत प्रतिनिधियों और स्थानीय समुदाय की सहभागिता महत्वपूर्ण रहेगी।