छत्तीसगढ़ में टीईटी परीक्षा ऑफलाइन कराने की मांग, कांग्रेस बोली- कंप्यूटर परीक्षा के नाम पर शिक्षकों को न करें परेशान

छत्तीसगढ़ प्रदेश कांग्रेस कमेटी की मुख्य प्रवक्ता वंदना राजपूत ने शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) ऑनलाइन के बजाय ऑफलाइन माध्यम से आयोजित करने की मांग की है। उन्होंने कहा कि प्रदेश के लगभग 50 हजार शिक्षकों की उम्र, अनुभव और व्यावहारिक कठिनाइयों को ध्यान में रखते हुए परीक्षा प्रणाली निर्धारित की जानी चाहिए। कांग्रेस ने विशेष रूप से सेवानिवृत्ति के करीब पहुंचे शिक्षकों को कंप्यूटर आधारित परीक्षा से होने वाली संभावित परेशानियों से राहत देने की मांग की है।

Oct 24, 2026 - 12:37
 0  2
छत्तीसगढ़ में टीईटी परीक्षा ऑफलाइन कराने की मांग, कांग्रेस बोली- कंप्यूटर परीक्षा के नाम पर शिक्षकों को न करें परेशान

UNITED NEWS OF ASIA. अमृतेश्वर सिंह, रायपुर l छत्तीसगढ़ में शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) को ऑनलाइन के बजाय ऑफलाइन माध्यम से आयोजित करने की मांग उठी है। प्रदेश कांग्रेस कमेटी की मुख्य प्रवक्ता वंदना राजपूत ने राज्य सरकार से कहा है कि परीक्षा प्रणाली निर्धारित करते समय शिक्षकों की उम्र, अनुभव और व्यावहारिक कठिनाइयों को ध्यान में रखा जाए। कांग्रेस के अनुसार, प्रदेश के लगभग 50 हजार शिक्षकों की चिंताओं को नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए। विशेष रूप से सेवानिवृत्ति के करीब पहुंचे शिक्षकों के लिए कंप्यूटर आधारित परीक्षा परेशानी और मानसिक दबाव का कारण बन सकती है।

23 अक्टूबर 2026 को जारी प्रेस विज्ञप्ति में वंदना राजपूत ने कहा कि शिक्षकों ने अपना पूरा जीवन बच्चों का भविष्य संवारने और शिक्षा व्यवस्था को मजबूत बनाने में लगाया है। ऐसे में उनके अनुभव और सेवाओं का सम्मान किया जाना चाहिए। उन्होंने सवाल उठाया कि जब शिक्षकों की योग्यता का मूल्यांकन करना परीक्षा का उद्देश्य है, तो कंप्यूटर संचालन की दक्षता को लेकर उन्हें कठिनाइयों में डालना कितना व्यावहारिक है।

कंप्यूटर आधारित परीक्षा पर उठाए सवाल

वंदना राजपूत ने कहा कि सभी शिक्षकों से कंप्यूटर संचालन में समान दक्षता की अपेक्षा करना उचित नहीं है। शिक्षकों के ज्ञान, अनुभव और शिक्षण क्षमता का आकलन प्राथमिकता के आधार पर होना चाहिए। कांग्रेस का कहना है कि ऑनलाइन परीक्षा में कंप्यूटर चलाने, तकनीकी समस्याओं और परीक्षा केंद्रों की व्यवस्थाओं से संबंधित कठिनाइयां सामने आ सकती हैं। इन परिस्थितियों में उन शिक्षकों को अधिक परेशानी हो सकती है, जो लंबे समय से शिक्षण कार्य कर रहे हैं और सेवानिवृत्ति के करीब हैं।

लगभग 50 हजार शिक्षकों की चिंताओं का मुद्दा

कांग्रेस की मुख्य प्रवक्ता ने कहा कि सरकार को शिक्षकों पर अनावश्यक दबाव बनाने के बजाय उनकी समस्याओं को सुनना चाहिए। उनके अनुसार, शिक्षकों की उम्र और लंबे सेवाकाल को ध्यान में रखते हुए ऐसी व्यवस्था बनाई जानी चाहिए, जिससे वे बिना अतिरिक्त तकनीकी परेशानी के अपनी योग्यता का मूल्यांकन करा सकें। उन्होंने कहा कि शिक्षा व्यवस्था शिक्षकों के सम्मान, विश्वास और सहयोग से मजबूत होती है। इसलिए परीक्षा प्रक्रिया तय करते समय उनकी परिस्थितियों को नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए।

ऑफलाइन परीक्षा कराने की मांग

वंदना राजपूत ने राज्य सरकार से टीईटी परीक्षा ऑफलाइन माध्यम से आयोजित करने की मांग की है। उन्होंने कहा कि परीक्षा का उद्देश्य शिक्षकों की योग्यता का निष्पक्ष मूल्यांकन करना होना चाहिए, न कि तकनीकी असुविधाओं के कारण उन्हें परेशान करना। कांग्रेस का मानना है कि ऑफलाइन परीक्षा का विकल्प उपलब्ध कराने से शिक्षकों को अधिक व्यावहारिक सुविधा मिल सकती है।

उन्होंने सरकार से अपील की कि प्रदेश के शिक्षकों की समस्याओं पर गंभीरता से विचार कर उचित निर्णय लिया जाए। साथ ही, उम्र, अनुभव और परिस्थितियों के अनुरूप राहत देने की दिशा में कदम उठाए जाएं।

सरकार से तत्काल निर्णय लेने की अपील

कांग्रेस ने एक बार फिर टीईटी परीक्षा ऑफलाइन कराने और शिक्षकों के हितों की रक्षा करने की मांग दोहराई है। वंदना राजपूत के अनुसार, सरकार को शिक्षकों की चिंताओं का समाधान करते हुए ऐसी परीक्षा प्रणाली अपनानी चाहिए, जिसमें उनके ज्ञान और शिक्षण क्षमता का निष्पक्ष आकलन हो सके। यह मांग छत्तीसगढ़ प्रदेश कांग्रेस कमेटी की ओर से जारी प्रेस विज्ञप्ति पर आधारित है। इसमें परीक्षा के माध्यम और शिक्षकों को संभावित कठिनाइयों को लेकर कांग्रेस का पक्ष सामने रखा गया है।