कोंडागांव: तारगांव के दशहरे में कुम्भकर्ण का नौका विहार बना आकर्षण का केंद्र, हजारों दर्शकों की उमड़ी भीड़

कोंडागांव जिले के ग्राम तारगांव में 24 अक्टूबर को आयोजित दशहरा उत्सव में हजारों दर्शक पहुंचे। अनूठी रामलीला, रावण की सेना के कलाकारों के विशेष अभिनय और तालाब के बीच कुम्भकर्ण के नौका विहार ने लोगों का ध्यान आकर्षित किया। ग्रामीणों, समिति सदस्यों और महिला-पुरुष स्वयंसेवकों के सामूहिक प्रयास से आयोजन संपन्न हुआ।

Oct 25, 2026 - 16:33
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कोंडागांव: तारगांव के दशहरे में कुम्भकर्ण का नौका विहार बना आकर्षण का केंद्र, हजारों दर्शकों की उमड़ी भीड़

UNITED NEWS OF ASIA. रामकुमार भारद्वाज, कोंडागांव l जिले के ग्राम तारगांव का बहुचर्चित दशहरा उत्सव अपनी अनूठी रामलीला और विशेष प्रस्तुतियों के लिए जाना जाता है। यहां दशहरा पर्व का ग्रामीणों के साथ-साथ आसपास के क्षेत्रों के लोगों को भी बेसब्री से इंतजार रहता है। रामलीला के दौरान रावण की सेना के कलाकारों द्वारा किए जाने वाले आकर्षक अभिनय और अलग-अलग झांकियां दर्शकों को रोमांचित करती हैं। इसी परंपरा के चलते हर वर्ष बड़ी संख्या में लोग इस आयोजन को देखने पहुंचते हैं। ग्राम पंचायत तारगांव के तत्वावधान में शनिवार, 24 अक्टूबर 2026 को आयोजित दशहरा उत्सव में हजारों की संख्या में दर्शक शामिल हुए।

कुम्भकर्ण का नौका विहार बना मुख्य आकर्षण

तारगांव के दशहरे में कुम्भकर्ण को नींद से जगाने का प्रसंग विशेष आकर्षण का केंद्र रहता है। रामलीला के दौरान जब रावण की सेना कुम्भकर्ण को जगाने पहुंचती है, तब कलाकार अपने अभिनय से दर्शकों का मनोरंजन करते हैं। इसके बाद कुम्भकर्ण का तालाब के बीचोंबीच नौका विहार करते हुए रावण से मिलने पहुंचने का दृश्य आयोजन को विशिष्ट बनाता है। इस अनोखी प्रस्तुति को देखने के लिए तालाब के चारों ओर बड़ी संख्या में दर्शक एकत्रित होते हैं और पूरे प्रसंग को उत्सुकता से देखते हैं। इस विशेष दृश्य के कारण तारगांव के दशहरे की अलग पहचान बनी हुई है और हर साल इसे देखने आने वाले लोगों का उत्साह दिखाई देता है।

वर्षों से निभाई जा रही है परंपरा

ग्राम तारगांव कुम्भकर्ण दशहरा समिति के अध्यक्ष युवा नरेंद्र नेताम ने बताया कि गांव में पिछले कई वर्षों से दशहरा पर्व धूमधाम से मनाया जा रहा है। कुम्भकर्ण के अभिनय और उसके नौका विहार को देखने के लिए दूर-दूर से लोग पहुंचते हैं। जब रावण की सेना कुम्भकर्ण को नींद से जगाकर लाती है और वह तालाब के बीच से नौका विहार करते हुए रावण से मिलने जाता है, तो यह दृश्य दर्शकों के लिए यादगार बन जाता है। इसी अनूठी प्रस्तुति ने तारगांव के दशहरा उत्सव को जिले में विशिष्ट पहचान दिलाई है।

सुरक्षा व्यवस्था में महिलाओं की भी भागीदारी

दशहरा उत्सव के दौरान तालाब के चारों ओर हजारों लोगों की भीड़ जुटती है। ऐसे में आयोजन को व्यवस्थित और शांतिपूर्ण बनाए रखने के लिए गांव के महिला और पुरुष मिलकर जिम्मेदारी निभाते हैं। सुरक्षा व्यवस्था संभालने में महिलाएं भी बढ़-चढ़कर हिस्सा लेती हैं। समिति के सदस्यों और ग्रामवासियों के सामूहिक प्रयास से भीड़ को संभालने तथा आयोजन को सुचारु रूप से संपन्न कराने में सहयोग मिलता है।

समिति और ग्रामीणों का महत्वपूर्ण योगदान

दशहरा उत्सव को सफल बनाने में समिति के पदाधिकारियों, सदस्यों और ग्रामवासियों की अहम भूमिका रहती है। जिला पंचायत सदस्य भगवती महेश नेताम, जनपद पंचायत सदस्य विद्या नरेंद्र नेताम, समिति उपाध्यक्ष राजेंद्र चौहान, कोषाध्यक्ष बलराम यादव, संरक्षक माधव नेताम, सारंग नेताम, बलराम पम्हार और आशा राम शोरी सहित अनेक सदस्य आयोजन में सहयोग करते हैं। किशोर पम्हार, ज्वाला मरकाम, देवलाल मरकाम, हरीश मरकाम, हीरा मरकाम, कन्हैया मरकाम, पवन यादव, अर्जुन मरकाम, राहुल मरकाम, मुकेश नेताम, शरद नेताम, मदन चौहान और लोमेश साहू सहित ग्रामवासियों का भी योगदान रहता है।

तारगांव का दशहरा धार्मिक आस्था के साथ-साथ क्षेत्र की सांस्कृतिक परंपरा, ग्रामीण एकता और सामूहिक सहभागिता का प्रतीक बन गया है। कुम्भकर्ण का नौका विहार और रामलीला की अनूठी प्रस्तुतियां इस आयोजन को खास बनाती हैं।