
UNITED NEWS OF ASIA. नागपुर। चैत्र प्रतिपदा हिंदू नववर्ष के अवसर पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) प्रमुख मोहन भागवत ने नागपुर स्थित संघ मुख्यालय में स्वयंसेवकों को संबोधित किया। इस दौरान उन्होंने सेवा, समाज के प्रति कर्तव्य और संघ की विचारधारा पर विस्तार से चर्चा की।
“स्वयंसेवक अपने लिए नहीं, समाज के लिए कार्य करता है”
मोहन भागवत ने कहा कि सेवा का कार्य दया भाव से नहीं, बल्कि प्रेम भाव से किया जाना चाहिए। उन्होंने स्वयंसेवकों को प्रेरित करते हुए कहा, “संघ विचार की प्रेरणा स्वार्थ से नहीं, बल्कि समाज कल्याण से जुड़ी है। स्वयंसेवक अपने लिए नहीं, बल्कि समाज के लिए कार्य करता है। यह समाज मेरा है और हमें तन-मन-धन से इसके लिए कार्य करना चाहिए।”
समाज सेवा ही संघ की प्राथमिकता
संघ प्रमुख ने बताया कि देशभर में संघ के स्वयंसेवक डेढ़ लाख से अधिक सेवा कार्यों में संलग्न हैं। ये सभी कार्य नि:स्वार्थ भाव से किए जाते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि संघ के स्वयंसेवक किसी स्वार्थ या लाभ की अपेक्षा से सेवा नहीं करते, बल्कि समाज के प्रति अपने प्रेम के कारण इसे अपनाते हैं।
“संघ का स्वयंसेवक 23 घंटे समाज के लिए देता है”
भागवत ने कहा कि “संघ के स्वयंसेवक प्रतिदिन एक घंटा शाखा में अपने व्यक्तिगत विकास के लिए देते हैं, लेकिन बाकी 23 घंटे समाज की सेवा में लगाते हैं।” उन्होंने भारतीय परंपरा का उल्लेख करते हुए कहा, “एकांत में आत्मसाधना और लोकांत में परोपकार”, यही संघ की कार्यशैली है।
पीएम मोदी का नागपुर दौरा और संघ मुख्यालय का दौरा
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी आज (30 मार्च) नागपुर दौरे पर हैं। इस दौरान उन्होंने संघ मुख्यालय पहुंचकर संघ संस्थापक डॉ. हेडगेवार और गुरु गोलवलकर को श्रद्धांजलि दी। पीएम मोदी ने नागपुर में माधव नेत्रालय प्रीमियम सेंटर की नई इमारत की आधारशिला भी रखी। इस कार्यक्रम में मोहन भागवत भी मौजूद थे, जहां उन्होंने स्वयंसेवा और सेवा कार्यों को लेकर यह महत्वपूर्ण विचार रखे।
निष्कर्ष
आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत का यह बयान संघ के सेवा कार्यों और विचारधारा को स्पष्ट करता है। उन्होंने स्वयंसेवकों को समाजसेवा के लिए प्रेरित करते हुए कहा कि सेवा को कर्तव्य समझकर अपनाना चाहिए, न कि किसी दया भाव से। संघ के कार्यों को जन-जन तक पहुंचाने और समाज को एकजुट करने के लिए यह संदेश महत्वपूर्ण साबित हो सकता है।



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