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स्तन के दूध को अधिक पौष्टिक और गाढ़ा बनाने के उपाय।- स्तनों के दूध को अधिक अनाज बनाने के उपाय।

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नवजात के लिए मां का दूध ही संपूर्ण आहार होता है। इसलिए शुरुआत के दिनों में मां के दूध से ही सभी पोषक तत्व मिलते हैं। मां के दूध से बच्चे की रोग प्रतिरोधक क्षमता मजबूत होती है साथ ही कई बीमारियों से भी बचाव होता है। इसके लिए मां को संपूर्ण आहार लेना जरूरी है। मां के खान का पान का सीधा असर बच्चे पर पड़ता है। उतना ही पोष्टिक भोजन उतना ही मांसाहार देने वाला होगा। पर कई बार मां के स्तनों में इतना दूध पैदा नहीं होता है, कि उसके बच्चे का पेट भर सके। जबकि कई बार स्तनपान कराने के बावजूद बच्चा कमजोर रहता है। आइए जानते हैं क्या होता है ऐसा और आप इसके (स्तनपान पोषण) के लिए क्या कर सकती हैं।

मां के दूध में सभी पोषक तत्वों का होना बहुत जरूरी है, क्योंकि शुरुआत के दिनों में मां का दूध ही बच्चे का सहयोग होता है। उत्तम खान-पान न होने से मां के दूध से मोटा हो जाता है। जिससे बच्चे का वजन का बढ़ने में परेशानी होती है। इस स्थिति में जरूरी है कि सभी मां अपना खाना खाएं, जिससे बच्चे का वजन कम न हो। आइए जानते हैं ब्रेस्ट मिल्ट में अन्य पोषक तत्वों के साथ ब्रेस्ट मिल्क में कैसे सही करें।

क्या कहते हैं जानकार

मध्य प्रदेश के मेडकिल कॉलेज में नौ नौकरी देने वाली पीडियाट्रिक डॉक्टर यामिनी जामोद बताती हैं कि शिशु के बेहतर विकास के लिए मां का दूध बहुत जरूरी है। मां का दूध न सिर्फ बच्चों के हड्डियों को दिखाता है। बल्कि शरीर के संपूर्ण विकास में भी सहयोगी है। डॉ कहते हैं जन्म के 6 माह तक बच्चे को सिर्फ मां का ही दूध देना चाहिए। इसके बाद ही आहार ठोस देना शुरू करना चाहिए या मां के दूध के देखने वाला दूध पिलाने की सलाह दी जाती है।

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कितना पोष्टिक है मां का दूध, दुग्ध है जरूरी

ब्रेस्ट क्रिएटिंग के लिए मांएं संतुलित डाइट लें। चित्र: एक्सपोजर

डॉ यामिनी जामोद बताती हैं कि मां के दूध में संतृप्त वसा, ओमेगा तीन युक्त एसिड, मोनोसैचुरेटेड वसा और पॉलीअनसैचुरेटेड एटीएम पाया जाता है। यह शुरुआती मां के दूध में एक साथ शामिल होती हैं। इसके सात से बच्चों को सभी पोषक तत्व मिलते हैं। डॉ बताते हैं कि मां के दूध के 100 ग्राम में 75 किलो कैलोरी व 4.2 ग्राम में मोटे तौर पर मोटा मोटा पाया जाता है। जो नवजात के लिए बहुत अहम भूमिका अदा करता है।

मां के दूध के पोषक तत्वों का कम होना ऐसे पता करें

डॉ जामोद कहते हैं कि नवजात के भोजन मां का दूध ही होता है। मां का दूध बच्चे के लिए भरपूर पोषण दे रहा है कि इसकी जानकारी बच्चे के पेशाब से नहीं हो सकती है। सभी पोषक तत्व बच्चे को अगर भरपरू मात्रा में मिल रहे हैं तो वह बार-बार पेशाब करेगा। एक बच्चे का दिन भर में सात से आठ बार पेशाब करना जरूरी है।

ऐसे ब्रॉस्ट में विकिरण सामग्री

1 दोनों स्तन खाली करें

बच्चे को दूध पिलाते जहर मां को ध्यान रखना चाहिए कि बच्चा दोनों स्तनों से दूध पिए। बच्चे एक ही स्तन से दूध पीकर अपना पेट भरेगा, तो दूसरे स्तन का दूध खाली नहीं हो सकता। ध्यान देने वाली बात यह है कि एक स्तन का दूध खाली होने के बाद ही दूसरे टैबलेट। यदि पहले वाले में दूध रह जाता है, तो यह दूध में दूध की मात्रा को कम करेगा। इससे बच्चे को बहुत ज्यादा मात्रा में नहीं मिल रहा है। बच्चा पूरा दूध नहीं पाता है तो ब्रेस्ट पंप की मदद से दूध बाहर फट खाली कर सकता है।

स्तनपान
शिशु की सेहत के लिए ज़बरदस्त है ब्रेस्ट क्रिएट करना। चित्र- शेयर करें

2 स्तन करें

बच्चा अगर भूखा है और आप उसे देख रहे हैं, तो पहले आप दोनों स्तनों की मति लें। स्तन स्तन करने से स्तन मिल में कैंसर बढ़ जाता है। साथ ही बच्चे भी भरपूर मात्रा में पोषक आहार ग्रहण कर सकेंगे। ऐसे स्तन भी खाली हो जाते हैं, कसरत में भी सुधार होता है।

3 पोष्टिक आहार लें

दूध पिलाने वाली महिलाओं को पोष्टिक आहार का सेवन करना चाहिए। ऐसे आहार का सेवन करना उचित रहेगा जिसमें पॉलीअनसैचुरेटेड और मोनोसैचुरेटेड एसिड अधिक मात्रा में मौजूद होंगे। इससे बच्चे के मस्तिष्क का संपूर्ण विकास होता है। इसके लिए हरे, पौधे, टमाटर अनाज, सोयाबीन साहित घास का सेवन करना चाहिए।

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Saurabh Namdev

| PR Creative & Writer | Ex. Technical Consultant Govt of CG | Influencer | Web developer
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