छत्तीसगढ़

UNA पड़ताल: जाम के 23 साल:19 कलेक्टर, 16 एसपी, 17 निगम आयुक्त, ये सभी 7 सड़कों को जाम से मुक्ति नहीं दिला पाए

राजधानी में सात सड़कें ऐसी हैं जिनकी तस्वीर राज्य बनने के बाद से अब तक नहीं बदल पाई

UNITED NEWS OF ASIA राजधानी में सात सड़कें ऐसी हैं जिनकी तस्वीर राज्य बनने के बाद से अब तक नहीं बदल पाई। 19 कलेक्टर, 16 एसपी और 17 निगम आयुक्त बदल गए लेकिन शहर की सात प्रमुख सड़कों को जाम से मुक्ति नहीं दिला सके। इन सड़कों पर ट्रैफिक सुधारने के लिए आधा दर्जन से ज्यादा प्रयोग किए गए। लेकिन एक भी प्रयोग सफल नहीं हुआ। इसकी सबसे बड़ी वजह है कि नियम मानने को कोई तैयार नहीं है।

ये शारदा चाैक से तात्यापारा चाैक के बीच की सड़क है। हर शाम, हर रात यहां यही हाल रहता है। सड़क संकरी है जिसमें हैवी ट्रैफिक रहता है। दो मिनट का रास्ता कई मिनट में पूरा होता है। बीच-बीच में जाम के हालात बनते रहते है।

1. जयस्तंभ से मालवीय रोड
सड़क पार करने में 15 से 20 मिनट का समय लगता है। मालवीय रोड से गोलबाजार का यही हाल। सड़कें संकरी। सड़क पर ही दुकानें। यहां रोज एक लाख गाड़ियां आती हैं।

2. चिकनी मंदिर से एवरग्रीन चौक
दुकानदारों के सामान बाहर। सड़क इतनी संकरी हो जाती है कि हर गाड़ी जाम में फंसती है। संडे बाजार में दिनभर और रोजाना शाम 7 से 9 बजे तक सड़क पार करने में 20 मिनट से ज्यादा।

3. शारदा चौक से एमजी रोड
शारदा चौक से एमजी रोड तक सड़क पर गाड़ियां, ठेले और फूड स्टॉल लगने की वजह से यह दोपहर 12 से रात 12 बजे तक जाम लगता ही रहता है। यहां से कार निकालना मुश्किल।

4. पंडरी बस स्टैंड से लोधीपारा चौक
यहां में ट्रैफिक वाले समय में 70 हजार से ज्यादा गाड़ियां गुजरती है। दुकानदार सामान बाहर सड़क पर रखते हैं। सिग्नल का कोई फायदा नहीं हुआ। ट्रैफिक भगवान भरोसे।

5. कोतवाली चौक से सदरबाजार
यहां सराफा कारोबारी हैं। दिनभर 65 हजार से ज्यादा गाड़ियां गुजरती हैं। दुकानों के सामने लोग कार खड़ी करते हैं। 20 फीट की सड़क में गाड़ियों के चलने के लिए केवल 5 फीट की सड़क।

6. गुरुनानक चौक से स्टेशन रोड तक
हार्डवेयर का सबसे बड़ा बाजार। सामान दुकानों के बाहर। गाड़ियां भी सड़क पर। इस वजह से इस सड़क पर दिनभर जाम रहता है। पुलिस की दिखावटी कार्रवाई चलती रहती है।

7. राठौर चौक से रामसागरपारा
चावल, दाल का थोक कारोबार। छोटे मालवाहकों के साथ बड़ी गाड़ियां भी खाली होती रहती हैं। व्यापारी ट्रकों को भी सड़क पर खड़ी करते हैं। लोडिंग अनलोडिंग यहीं होती है।

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राज्य बनने के बाद रायपुर में 23 साल में 19 कलेक्टर 16 एसपी और 17 निगम कमिश्नर बदल चुके हैं। लेकिन ट्रैफिक आज तक नहीं सुधरा है। आमतौर पर कलेक्टर और एसपी पदभार लेने के साथ ही ट्रैफिक सुधारने का दावा करते हैं। लेकिन किसी के भी कार्यकाल में शहर में ट्रैफिक की तस्वीर नहीं बदली है।

19 कलेक्टर बदले 20वें काम कर रहे
राज्य बनने के बाद 2000 में पहले कलेक्टर अजय तिर्की थे। उनके बाद अमिताभ जैन, सीके खेतान, विवेक कुमार देवांगन, अमिताभ जैन, आरपी मंडल, सुबोध कुमार सिंह, विकासशील, सोनमणि बोरा, विकासशील, सुबोध कुमार सिंह, संजय गर्ग, डॉ. रोहित यादव, सिद्धार्थ कोमल सिंह परदेशी, ठाकुर राम सिंग, ओपी चौधरी, डॉ. बसवराजू एस, डॉ. एस भारतीदासन, सौरभ कुमार और अभी डॉ. सर्वेश्वर नरेन्‍द्र भुरे काम कर रहे हैं।

16 एसपी बदले, 17वें काम कर रहे
छत्तीसगढ़ निर्माण के समय रायपुर के पहले एसपी आईपीएस राजीव टंडन थे। एक माह बाद ही उनकी जगह मुकेश गुप्ता को एसपी बनाया गया। इनके बाद आरसी पटेल, मुकेश गुप्ता, डीएम अवस्थी, अशोक जुनेजा, बीएस मरावी, अमित कुमार, दीपांशु काबरा, ओपी पाल, बीएन मीणा, डॉ. संजीव शुक्ला, अमरेश मिश्रा, नीतू कमल, आरिफ शेख, अजय यादव एसएसपी बने। पिछले डेढ़ साल से प्रशांत अग्रवाल रायपुर एसएसपी हैं।

17 नगर निगम के कमिश्नर
राज्य बनने के बाद रायपुर के पहले निगम कमिश्नर विवेक देवांगन थे। इनके बाद एमडी दीवान, सोनमणि बोरा, अशोक अग्रवाल, डॉ. कमलप्रीत सिंह, जितेंद्र शुक्ला, अवनीश कुमार शरण, अमित कटारिया, तारण प्रकाश सिन्हा, राजेश टोप्पो, तारण प्रकाश सिन्हा, नरेंद्र कुमार दुग्गा, डॉ. सारांश मित्तर, रजत बंसल, शिव अनंत तायल, सौरभ कुमार, प्रभात मलिक 17 निगम कमिश्नर बाजारों की व्यवस्था नहीं सुधार पाए। अभी मयंक चतुर्वेदी निगम कमिश्नर हैं।

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Saurabh Namdev

| PR Creative & Writer | Ex. Technical Consultant Govt of CG | Influencer | Web developer
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