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उद्धव ठाकरे ने चुनाव आयोग को तोड़ने की मांग की, शिंदे गुट ने शिवसेना पार्टी फंड पर भी दावा किया

जहां तक ​​भाजपा और पार्टी का चुनाव चिह्न पूरे तरह हाथ से छिन जाने के बाद की स्थिति की बात है तो आपको बता दें कि मुख्यमंत्री ठाकरे ने सोमवार को अपनी पार्टी की आगे की रणनीति तय करने के लिए अपने करीबी सहयोगियों के साथ बीजेपी नेताओं से मुलाकात की की।

महाराष्ट्र में सत्ता और उनके पिता बाला साहेब ठाकरे द्वारा स्थापित पार्टी को खो देने वाले ठाकरे के हाथ से अब राज्य सरकार स्थित बीजेपी कार्यालय भी चला गया है। उद्धव ठाकरे को अब ममता बनर्जी, शिरपांव और शून्य कुमार जैसे नेता ढाढसंगबंधाने के लिए फोन कर रहे हैं। लेकिन हवा को ध्यान रखना होगा कि यह सभी नेता पहले अपना स्वार्थ देखते हैं और मौका पाला बदलने में भी पकड़ लेते हैं। हालांकि उडंदर ठाकरे एक बात तो सही कह रहे हैं कि जो उनके साथ हुआ वह किसी और के साथ भी हो सकता है। इसलिए ठाकरे की इस सलाह पर सम्मानित करते हुए परिवार आधारित राजनीतिक दलों के मुखियाओं को ध्यान रखना चाहिए कि नामांकन और नामांकन की बात पर ध्यान दें और उनकी नाराजगी दूर करते रहें।

बहरहाल, जहां तक ​​बीजेपी और पार्टी का चुनाव चिन्ह पूरे हाथ से छिन जाने के बाद की स्थिति की बात है तो आपको बता दें कि मुख्यमंत्री ठाकरे ने सोमवार को अपनी पार्टी की आगे की रणनीति तय करने के लिए अपने करीबी सहयोगियों के साथ बीजेपी नेताओं बैठक में। बीजेपी (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) के नेता संजय राउत, सुभाष देसाई, अनिल देसाई और अनिल परब ने ठाकरे के साथ बैठक में भाग लिया। उडौड़ा ने जिलाधिकारियों के नेताओं को भी आगे की रणनीति पर विचार-विमर्श करने के लिए बुलाया है।

हम आपको याद दिलाते हैं कि निर्वाचन आयोग ने शुक्रवार को एकनाथ शिंदे की पहचान वाले लोगों को वास्तविक बीजेपी के रूप में मान्यता दी थी और उन्हें ‘धनुष बाण’ चुनाव को लेकर भी आने का आदेश दिया था। इससे ठाकरे को बड़ा झटका लगा है क्योंकि उनके पिता बालासाहेब ठाकरे ने 1966 में पार्टी की स्थापना की थी। पार्टी नेताओं के साथ लंबी बैठक के बाद वाइडर ठाकरे ने सारा फ्यूरी चुनाव आयोग पर चढ़ाई की और कहा कि चुनाव आयोग को भंग कर दिया जाना चाहिए। उन्होंने दादर स्थित बीजेपी भवन में दाखिल से कहा, ”हमारी पार्टी का नाम (शिवसेना) और चुनाव चिन्ह (धनुष और एरो) चोरी हो गया है, लेकिन ‘ठाकरे’ नाम नहीं दर्ज हो सकता है।” हम आपको बताते हैं कि दादार ठाकरे के प्रेस को संदेश देने से पहले सुप्रीम कोर्ट ने आज उनके गुट द्वारा किए गए इस मौलिक पर उल्लेख करने से इनकार कर दिया कि चुनाव आयोग के फैसले को चुनौती देने वाले उनकी याचिका को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध कर लेंगे। ठाकरे ने कहा, “निर्वाचन आयोग का आदेश गलत है। सुप्रीम कोर्ट उम्मीद की आखिरी किरणें हैं।” उन्होंने कहा, ”ऐसा एक भी उदाहरण नहीं है, जब पार्टी का नाम और चुनाव चिह्न सीधे एक गुट को दे दिया गया हो।” ठाकरे ने कहा, ‘इतनी जल्दबाजी में फैसला देने की क्या जरूरत थी।’

उन्होंने कहा, “भले ही दूसरे गुट ने हमारा नाम और निशान ले लिया हो, लेकिन वे हमारा ठाकरे का नाम नहीं ले सकते। मैं खुशनसीब हूं कि बालासाहेब ठाकरे के परिवार में जन्म हुआ।” बीजेपी पर डेमोक्रेटिक पार्टनरशिप की मदद से लोकतंत्र को नष्ट करने के आरोप, पार्टियों के दावेदारों ने कहा, ”भाजपा ने आज हमारे साथ जो किया, वह किसी के साथ भी कर रही है हो सकता है। अगर ऐसा ही चलता है तो 2024 के बाद देश में लोकतंत्र या चुनाव नहीं होगा।’

उद्धव ठाकरे ने एक सवाल के जवाब में कहा कि उन्होंने हिंदुत्व को कभी नहीं छोड़ा, हालांकि उन पर ऐसा करने का आरोप तब लगा, जब उन्होंने 2019 में बीजेपी के साथ अपने दशकों पुराने गठबंधन को खत्म कर दिया। ठाकरे ने कहा कि अंधेरी विधानसभा उपचुनाव के दौरान उनके पार्टी के उम्मीदवार ने निर्वाचन आयोग द्वारा दिए गए नाम का इस्तेमाल किया था। उन्होंने कहा कि दूसरे झटके में उस उपचुनाव को लड़ने की हिम्मत भी नहीं थी। उनके खेमे द्वारा भाजपा के आधिकारिक बैंक खातों से धन धोखे जाने की खबरों के बारे में पूछे जाने पर फेसबुक ठाकरे ने कहा, “निर्वाचन आयोग को यह बोलने का कोई अधिकार नहीं है कि पार्टी के धन का क्या होता है और यह सुल्तान की तरह कार्य नहीं कर सकता। इसकी भूमिका केवल फेयर चुनाव और किसी राजनीतिक दल के भीतर आंतरिक लोकतंत्र सुनिश्चित करने तक सीमित है।” उन्होंने कहा कि अगर निर्वाचन आयोग पार्टी कोष वितरण में दखल देता है, तो उसका आपराधिक मामला सामने आएगा।

झारखंडे शिमे द्वारा भाजपा के विभिन्न नौकरी में अपने व्यवसाय के लिए जाने के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने कहा, “मैं उन्हें मेरे पिता (दिवांगत बालासाहेब ठाकरे) के नाम और उनकी तस्वीर का उपयोग बंद करने की चुनौती देता हूं। वे अपने पिता की तस्वीरें देखते हैं और फिर वोट मांगते हैं।” ठाकरे ने कहा कि आयोग ने पहले ही उनकी खेमे को बीजेपी (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) के नाम से अलग नाम दे दिया है और उन्हें प्रतीक के तौर पर टॉर्च भी दे दिया है। उन्होंने कहा, “इसका मतलब है कि निर्वाचन आयोग ने हमारे अलग अस्तित्व को पहले ही मान्यता दे दी थी।” उन्होंने कहा कि पार्टी का सिंबल चाहे चोरी हो जाए लेकिन ठाकरे का नाम नहीं चुराया जा सकता। ठाकरे ने कहा कि शिव धनेश्वर को रोना कैसे बनेगा? हम आपको यह भी बताते हैं कि महाराष्ट्र के ग्रामीण इलाकों में स्थित भाजपा कार्यालय पर भी आज शिंदे गुट का कब्जा हो गया है। इसके बाद दोनों अटकों में जोरदार बहस भी हुई।

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Saurabh Namdev

| PR Creative & Writer | Ex. Technical Consultant Govt of CG | Influencer | Web developer
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