
महाराष्ट्र में बिजली संकट का खतरा
महाराष्ट्र में तीन सरकारी बिजली प्राधिकरण के कर्मचारियों ने तीन दिनों तक हड़ताल पर जाने की घोषणा की थी। जिसके बाद राज्य में बिजली संकट पैदा हो सकता था। लेकिन अब खबर है कि उपमुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के साथ चर्चा के बाद कर्मचारियों ने हड़ताल वापस ले ली है। फडणवीस ने कहा, ”बिजली उद्यम का निजीकरण नहीं होगा सत्ता प्राधिकरण में सरकार 50 हजार करोड़ का निवेश करेगी।”
प्राधिकरण के निजीकरण का विरोध
महाराष्ट्र की 3 सरकारी बिजली प्राधिकरण के हजारों कर्मचारी बिजली प्राधिकरण के विरोध में बुधवार को 72 घंटे की हड़ताल पर जाने की घोषणा कर दी गई थी। उन्होंने राज्य सरकार द्वारा महाराष्ट्र आवश्यक सेवा रखरखाव अधिनियम (MESMA) लागू करने के साथ-साथ यह कदम उठाया।
हड़तालियों की प्रमुख मांग क्या है
महाराष्ट्र इलेक्ट्रिक मार्केटिंग कंपनी लिमिटेड (महावितरण), महाराष्ट्र राज्य इलेक्ट्रिक मार्केटिंग कंपनी लिमिटेड (महापरेशन) और महाराष्ट्र राज्य इलेक्ट्रिक निर्माण कंपनी लिमिटेड (महानिर्मित) राज्य सरकार के स्वामित्व वाली बिजली कंपनियाँ हैं। लाइटनिंग ओज की 31 यूनियन की एक कार्य समिति महाराष्ट्र राज्य के कर्मचारी, अधिकारी और अभियान संघर्ष समिति ने अपने विभिन्न मांगों को लेकर पिछले महीने आंदोलन शुरू किया था। अडाणी ग्रुप की लाइटनिंग कंपनी को ‘समान रिवर्सल डिस्ट्रीब्यूशन लाइसेंस’ जारी नहीं करना उनकी प्रमुख मांग है। इस बिजली कंपनी ने नवंबर 2022 में मुंबई के कुछ और क्षेत्रों में अपने कारोबार का विस्तार करने के लिए लाइसेंस मांगा था।



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