

एएनआई
जनसंख्या नियंत्रण कानून के मुद्दों पर प्रभासाक्षी ने वरिष्ठ अधिवक्ताओं और भारत के पी को पुरुष के रूप में विख्यात अश्विनी उपाध्याय से बात की। उन्होंने कहा कि दुनिया की बढ़ती जनसंख्या कई देशों के लिए तो खतरनाक सिद्ध हो ही रही है, वह भारत के लिए भी गंभीर चिंता का विषय है।
नमस्कार, प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क के खास साप्ताहिक कार्यक्रम जन गण मन में आप सभी का स्वागत है। आज हम बात करेंगे भारत में जनसंख्या नियंत्रण कानून की बढ़ती आवश्यकताओं की। पिछले साल दुनिया की कुल आबादी 8 अरब से भी ज्यादा हो गई। देखा जाए तो पिछले 50 सालों में दुनिया की सबसे ज्यादा आबादी की रफ्तार से अंदाजा लगाया जा सकता है। जनसंख्या के मामले में एक समय चीन सबसे आगे था लेकिन भारत अब उसे पीछे छोड़ देता है। भारत में बढ़ती आबादी से संसाधनों पर बोझ बढ़ता जा रहा है। भारत में बढ़ती आबादी की उम्मीद पूरी करने में दौड़ के पसीने छूट रहे हैं। नौकरी एक घोषणा है लाखों आवेदन आते हैं, अस्पताल में बेड दस बीमार दस हजार आ जाते हैं, हर जगह सिर्फ लाइन ही लाइन नजर आती है। भारत में जनसंख्या पर नियंत्रण करना बहुत जरूरी हो गया है, लेकिन सरकार का रवैया जिस तरह का है, उसे देखते हुए ऐसा नहीं लगता कि यह जल्द ही कानून बन सकता है।
इस मुद्दे पर प्रभासाक्षी ने वरिष्ठ वकील और भारत के पी अंतर्निहित पुरुष के रूप में विख्यात अश्विनी उपाध्याय से बात की। उन्होंने कहा कि दुनिया की बढ़ती जनसंख्या कई देशों के लिए तो खतरनाक सिद्ध हो ही रही है, वह भारत के लिए भी गंभीर चिंता का विषय है। अश्विनी उपाध्याय ने कहा कि यदि आपके देश या परिवार की आबादी बढ़ती जा रही है और उसके साथ-साथ गरीबी और लगातार बढ़ती जा रही है तो वह समाज के लिए बोझ बन जाता है।
उन्होंने कहा कि जनसंख्या के खतरों से निपटने के लिए भारत सरकार को कठोर जनसंख्या नियंत्रण कानून बनाने की आवश्यकता है और यदि कोई कानून को प्रभावित करता है तो उसे जेल में डालने की व्यवस्था भी होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि दो से ज्यादा बच्चों को चुनाव लड़ने पर रोकें या इस तरह के रोक लगाने से कोई लाभ नहीं होगा क्योंकि इस देश की पूरी जनता को तो चुनाव लड़ने नहीं है। उन्होंने कहा कि जनसंख्या पर नियंत्रण होने से बहुत सी योजनाओं का स्वत: समाधान हो जाएगा।
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