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रजत शर्मा ब्लॉग सिसोदियास अरेस्ट द पॉलिटिकल फॉलआउट

छवि स्रोत: इंडिया टीवी
इंडिया टीवी के पहलू एवं-इन-चीफ रजत शर्मा।

दिल्ली के उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट से राहत न मिलने के बाद अपने पद से इस्तीफा दे दिया। ऐतिहासिक जेल में क़ैद एक अन्य मंत्री सत्येंद्र जैन ने भी मंत्री पद से इस्तीफा दे दिया। श्री अरविंद केजरीवाल ने दोनों इतने को मंजूर कर लिया।

रविवार की रात मनीष सिसोदिया की गिरफ्तारी हुई। दिल्ली की सीबी कोर्ट ने उन्हें 4 मार्च तक सीबीआई की हिरासत में भेज दिया। सीबीआई की विशेष अदालत के जज एमके नागपाल ने अपने देश में कहा, 2021-22 की दिल्ली आबकारी नीति में कथित आरोपों की सही और शिया जांच के लिए सीबीआई हिरासत में दस्तावेज की अनुमति दी है।

अदालत ने कहा, ‘हालांकि सदी पहले दो मौकों पर जांच में शामिल हुई लेकिन वह पूछताछ के दौरान ज्यादातर सवालों का जवाब नहीं दे सका। अब तक की गई जांच में आपके सामने आए आपत्तिजनक बयानों के बारे में कानून सही जवाब देने में विफल रहे।

जज ने कहा, ये सही है कि सिसोदिया से ऐसे बयानों की उम्मीद नहीं की जा सकती है, जिसमें वह खुद अपनी गलती मान लें, लेकिन न्याय के हित में और शिकायत जांच के हित में ये जरूरी है कि उन्हें जांच अधिकारियों के सवालों के सही जवाब उनसे पूछा जाना चाहिए।

जज नागपाल ने कहा, सिसोदिया के संबंधित काम करने वाले ने कुछ सच्चाई का खुलासा किया है जिसके आधार पर उन्हें दोषी करार दिया जा सकता है, साथ ही उनके खिलाफ कुछ दस्तावेज भी गलतफहमी के सबूत हैं। कोर्ट ने कहा, इस मामले में अब तक की गई जांच से पता चला है कि सिसोदिया ने ‘कथित पहले को अंजाम देने में सक्रिय भूमिका’ निभाई। अपने आदेश में जज ने कहा कि ऐसा लगता है कि सिसोदिया ने मंत्रियों के समूह के सदस्य और एक्साइज मिनिस्टर होने के संबंध में विशेषज्ञ समिति की रिपोर्ट के साथ पेश की गई ड्राफ्ट पर कैबिनेट नोट में कुछ बदलाव करके हेराफेरी की।

सीबीआइ की ओर से विशेष लोक अभियोजक पंकज गुप्ता ने कोर्ट को बताया कि सिसोदिया जांच में सहयोग नहीं कर रहे हैं और इस साजिश से जुड़े सही तथ्य का पता नहीं लगा रहे हैं। गुप्ता ने कोर्ट के हवाले से कहा कि सिसोदिया के सरकारी अधिकारी और कई अन्य लिपियों की भूमिका और संदर्भ के लिए मिले धन के बारे में सही-सटीक जानकारी नहीं दे रहे हैं।

सिसोदिया की ओर से तीन वरिष्ठों, दयान कृष्णन, सिद्धार्थ अग्रवाल और मोहित माथुर ने कोर्ट में कहा कि आबकारी नीति में हेराफेरी करने के आरोप पूरी तरह से गलत हैं, क्योंकि आबकारी नीति को बाद में उपराज्यपाल ने मंजूरी दी थी। मंत्रिपरिषद और सरकार का निर्णय होने के कारण इसे न्यायालय में चुनौती नहीं दी जा सकती।

सिसोदिया को पांच दिन के सीबीआई के आरोपों में दिए गए फैसले ने कुछ तय कर दिया। पूछताछ ऐसी जगह पर होगी जहां कैमरा लगाएंगे। उस साइट को सीबीआइ के अधिकारी संभाल सकते हैं, हर 48 घंटे में एक बार सिसोदिया की मेडिकल जांच करानी होगी और रोज शाम 6 बजे से 7 बजे के बीच अपने घंटे के लिए अपने जाने से मिलने की अनुमति देगा। मिलने के दौरान सीबीआई के कर्मचारी उनकी बातचीत न सुनते हैं। कोर्ट ने सिसोदिया को अपनी पत्नी से मिलने के लिए हर रोज 15 मिनट की मोहलत दी।

आम आदमी पार्टी के ज्यादातर नेता सिसोदिया की गिरफ्तारी के विरोध में देश के कई शहरों में झूम रहे हैं लेकिन पार्टी के नेता शराब नीति के घोटाले पर बात नहीं कर रहे हैं। सभी नेता एक ही इल्जाम लगा रहे हैं कि सिसोदिया को राजनीतिक बदले की भावना से गिरफ्तार किया गया है। लेकिन कोई ये नहीं बता रहा है कि सीबीआइ ने जो मामले दर्ज किए हैं उनमें क्या गड़बड़ी है, क्या कमियां हैं? केस की मेरिट पर आम आदमी पार्टी के किसी नेता ने बात नहीं की। सीबीआई ने आरोप लगाया है कि पॉलिसी बनाने के दौरान मनीष सिसोदिया शराब कारोबारियों के संपर्क में थे। दिल्ली के एक होटल में दक्षिण भारत के एक कंसोर्टियम ने आबकारी नीति तैयार की। सीबीआई पहले ही आरोप लगा लेती है कि जांच होते ही सिसोदिया में 36 सेटिंग्स शामिल हैं, जिसने अपने सेलफोन से सभी डेटा डिलीट कर दिए हैं और आपकी उम्मीदवारी को नष्ट कर दिया या बदल दिया।

सीबीआई का आरोप है कि मनीष सिसोदिया के खिलाफ पिछले साल 19 अगस्त को मामला दर्ज किया गया और उन्होंने अगले 24 घंटे में तीन फोन और एक सिम बदला। 20 अगस्त को मनीष सिसोदिया ने तीन फोन का इस्तेमाल किया। सिसोदिया ने अगस्त से सितंबर 2022 के बीच 18 बार फोन किया। उसी समय शराब कांड के कुल 36 जालों ने 170 फोनों की कीमत के बदले में करीब एक करोड़ 38 लाख रुपये का विज्ञापन किया है। सीबीआई यह जानना चाहती है कि आखिर इतने सारे फोन क्यों बदले गए और उन फोन के डेटा कहां हैं? सीबीआई का कहना है कि पूछताछ के दौरान मनीष सिसोदिया ने सहयोग नहीं किया। सिसोदिया सवालों के सीधे-सीधे जवाब नहीं दे रहे हैं इसलिए उनकी रिमांड की जरूरत है ताकि दूसरी वरीयता के साथ आमने सामने बैठे व्यक्ति से पूछताछ की जा सके।

आम आदमी पार्टी सिसोदिया की गिरफ्तारी पर इतना आक्रामक क्यों है? इसकी वजह सटीक है। शराब घोटाले का आंच अब सीधे अरविंद केजरीवाल तक पहुंच सकता है। क्योंकि इस मामले की जांच ईडी भी कर रही है। 4 दिन पहले ईडी ने इस मामले में अरविंद केजरीवाल के निजी सहायक विभव कुमार से पूछताछ की थी।

इस पूरे मामले की मोटी-मोटी बात यह है कि दिल्ली में जो शराब नीति बनाई गई वह शराब कारोबारियों को बेहिसाब लाभ पहुंचाने वाली नीति थी। कौन मानेगा कि इस करार को लागू करने के लिए वे आम आदमी को करोड़ों रुपए नहीं पार्टी नहीं भेजेंगे। दूसरी बात ये है कि अगर मनीष सिसोदिया ने प्रत्यक्ष में कुछ गलत नहीं किया तो बार-बार क्यों टेलीफोन का क्षय हो रहा है, सिम कार्ड नष्ट करके और कंप्यूटर से डेटा डिलीट करके सबूत मिटाने की कोशिश क्यों की?

सीबीआइ का आरोप है कि गुरुग्राम के एक शराब कारोबारी दिनेश अरोड़ा से मनीष सिसोदिया सीधे डील करते थे। दिनेश अरोड़ा अब सरकारी गवाह बन गए हैं। अधिकारी विभाग (एक्साइज डिपार्टमेंट) के अधिकारियों ने भी सीबीआई को काफी कुछ बताया है। इसलिए मनीष सिसोदिया की परेशानी बढ़ रही है। जब सिसोदिया की मुश्किलें बढ़ेंगी तो उनके आंचलिक भी पहुंच सकते हैं। केजरीवाल दिल्ली के हैं लेकिन एक मंत्रालय उनके पास नहीं है। वे 33 से 18 मंत्रालय में मनीष सिसोदिया को दिए गए थे।

सत्येंद्र जैन और मनीष सिसोदिया केजरीवाल की सरकार के स्तंभ हैं और दोनों के पीछे हैं। शास्त्र पर दस्तावेज़ के लिए फ़ायदे की बात ये है कि उन्हें एक ऐसा मेल मिला है जिसके आधार पर वो देश भर में अपनी पार्टी के अकाउंट को सक्रिय कर सकते हैं।

सिसोदिया की गिरफ्तारी का एक और सुखद फायदा यह हुआ कि चार्जर को कई सारे विद्वानों का समर्थन मिला है। कांग्रेसी कांग्रेस, अखिलेश यादव और बीजेपी (उद्धव) नेताओं ने पहले ही अभियोग की निंदा की है, लेकिन कांग्रेस इस पर चुप्पी साधे हुए है। कांग्रेस नेता असमंजस में गिरफ्तारी का समर्थन या विरोध कर रहे हैं। पिछले हफ्ते जब कांग्रेस प्रवक्ता पवन खेड़ा को दिल्ली एयरपोर्ट से गिरफ्तार किया गया तो आप नेता खामोश हो गए। सोमवार को अभिषेक मनु सिंघवी ने ट्वीट किया कि गिरफ्तारी के पीछे कोई कारण नहीं है, लेकिन इसके तुरंत बाद, उन्होंने फिर से स्पष्ट करने के लिए ट्वीट किया कि वह एक वकील के रूप में टिप्पणी कर रहे थे, न कि पार्टी प्रवक्ता के रूप में में।

विरोधी पार्टियों के नेताओं की बात सही है कि पिछले सात-आठ सालों में विरोधी पार्टियों के नेताओं ने बड़े तादाद में ईडी और सीबीआई पर आरोप लगाए, गिरफ्तारी की और मामले दर्ज किए। पश्चिम बंगाल, महाराष्ट्र, कर्नाटक और दिल्ली में तो ये साफ-साफ देखने को मिला है। लेकिन बीजेपी का तर्क है कि अगर किसी ने रिश्वत दी है तो क्या उसे सिर्फ इसलिए छोड़ दिया कि वह एक राजनीतिक दल का नेता है?

अलग-अलग राज्यों में कांग्रेस, राजनीतिक कांग्रेस, एनसीपी और आम आदमी पार्टी के कई मामलों में ऐसे मामले संलग्न हैं। कई जेल में हैं और कई बेल पर हैं। लेकिन दिल्ली के शराब घोटाले के मामले अकेले ऐसे मामले हैं जहां एक साथ दो राज्यों, दो राज्यों और दो राजनीतिक दलों के नेताओं के नेक्सस के आरोप हैं। सीबीआइ के मुताबिक नोएडा के नियमों ने पॉलिसी बनाई, दिल्ली की सरकार ने उसे लागू किया और दोनों राज्यों के नेताओं के बीच पैसे का बकाया हो गया। इसीलिए केसी ने सबसे खास तरीके से मनीष सिसोदिया की गिरफ्तारी का विरोध किया।

अब सीबी के सामने बड़ी चुनौती ये है कि वह इस मामले को कोर्ट में साबित करे, नहीं तो सरकार की बहुत फजीहत होगी। फिर सुधार को ये कहने का मौका मिलेगा कि बीजेपी संबंधित नेताओं को संबद्ध मामले में जुड़ा हुआ है। आजकल तो हालत ये है कि अगर किसी को जमानत मिल गई है तो वो विजय पर हस्ताक्षर कर देता है और ये प्रभाव पैदा हो जाते हैं जैसे मामले खत्म हो गए। (रजत शर्मा)

देखें: ‘आज की बात, रजत शर्मा के साथ’ 27 फरवरी, 2023 का पूरा एपिसोड

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Saurabh Namdev

| PR Creative & Writer | Ex. Technical Consultant Govt of CG | Influencer | Web developer
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