
इंडिया टीवी के चेयरमैन और एडिटर-इन-चीफ रजत शर्मा।
उत्तराखंड के जोशीमठ में एंडी संदेशों की एक और रणनीतियों की 8 टीमों ने मंगलवार को फ्रंट हैंडल लिया। शहर की असुरक्षित घोषित की जा चुकी है 678 इमारतों को गिराने की कार्य योजना पर काम शुरू हो गया है।
सर्वोच्च न्यायालय ने मंगलवार को उस याचिका पर लंबित सुनवाई करने से इंकार कर दिया, जिसमें इस आपदा को राष्ट्रीय आपदा घोषित किया गया था और इस पर सुनवाई करने का अनुरोध किया गया था। सुप्रीम कोर्ट में अब इस मामले में 16 जनवरी को सुनवाई होगी। चीफ जस्टिस डी.वाई. चंद्रचूड़ और न्यायमूर्ति पी.एस. नरसिम्हा की दलील में कहा गया है कि हालात से निपटने के लिए लोकतांत्रिक रूप से शुरू हुई संस्थाएं हैं और वे इस मामले में गौर किए गए पहलू हैं, इसलिए सुनवाई की जरूरत नहीं है। यह याचिका स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने पैर रखने की थी।
सबसे पहले जोशीमठ में दो होटल माउंट व्यू और मलारी को स्थानीय प्रशासन द्वारा नियुक्त किया जाएगा। दोनों इमारतों में एक-दूसरे पर इस तरह से भगदड़ मची हुई है कि आसपास के एक-एक घरों पर खतरा पैदा हो गया है। एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि दोनों बिल्डिंग को जल्द ही मनोनीत तरीके से हटा दिया जाएगा। ये इमारतें काफी हद तक धंसी हुई हैं। सेंट्रल बिल्डिंग अनुसंधान इंस्टीच्यूट, रूड़की की एक टीम ने दोनों इमारतों का सर्वेक्षण किया ताकि इन्हें इस तरह से गिराया जाए कि जलमाल का कोई नुकसान न हो।
जोशीमठ में जहां एक ओर के घरों, पानी और अन्य इमारतों में दरारें बढ़ती जा रही हैं, वहीं अधिकारियों ने असुरक्षित होने का दावा करते हुए घरों पर ‘लाल X निशान’ लगाना शुरू कर दिया है। जिन घरों पर लाल निशान लग जाएंगे वे उन्हें मिलने लगेंगे। 81 अधिक पीड़ित लोगों ने अपना घर खाली कर दिया है और राज्य सरकार ने उन्हें अस्थायी शिविर में रखा है।
हर पहलू पर विचार-विमर्श के बाद राज्य सरकार ने आखिरकार यह फैसला किया कि लोगों की जान बचाने का एकमात्र उपाय है कि खतरे वाले क्षेत्र में रहने वाले सभी लोगों के घर खाली तलाशी जाएं। जोशीमठ के चार वार्डों से लोगों को घर खाली करने के आदेश जारी कर दिए गए हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी राहत उपायों पर लगातार नजर बनाए हुए हैं। जोशीमठ नगर के पास 1,191 लोगों के रहने के लिए 213 कब्जे के कब्जे किए गए हैं। वहीं पीपलकोटी में 2,205 लोगों के रहने के लिए 491 कब्जे के अधिकार किए गए हैं। विषाक्त पदार्थों के अलावा 63 किट के अलावा 53 चिपचिपा भी दिया जाता है।
इस बीच लोगों का क्रोध भी फूट पड़ा। शिवानी बाजार में लोगों ने विरोध प्रदर्शन किया। लोगों का कहना था कि रहने के लिए आवास की उचित व्यवस्था किए बिना लोगों को दर्शकों से बाहर नहीं किया जाना चाहिए। खतरनाक जमीन को गिरने का काम पूरा होने के बाद जोशीमठ के करीब 30 हजार लोग मंजूर हो जाएंगे। इस शहर के धंसने के सही कारण का पता लगाने के लिए दिल्ली से आई एक टीम पहले ही इलाके का सर्वे कर चुकी है।
सोमवार को सेंट्रल ब्रिज इंस्टीच्यूट (CBRI) की टीम ने शहर का दौरा किया और उन संपत्तियों की बड़ी-बड़ी दरारें लगी हुई हैं। तलाकशुदा महिलाएं, पुरुष, नौजवान, बच्चे और बजुर्ग भी अपनी आंखों से अपने घरों को देख रहे हैं, जो किसी दिन उजड़ने वाले हैं। जोशीमठ की सभी दुकानों और व्यवसायों का पूरा ब्योरा न होने से प्रशासन के सामने बड़ी समस्या आ रही है। एक बार जब इन अटकलों को झंझोड़ दिया जाएगा, तो फिर क्षतिपूर्ति का ग्रहण करने के लिए रिकॉर्ड और अन्य दस्तावेजों की आवश्यकता होगी। वहीं मौजूदा संकट के बीच और बारिश का खतरा भी मंडरा रहा है।
जोशीमठ प्रसिद्ध चार धाम तीर्थ का प्रवेश द्वार माना जाता है। स्वभाविक रूप से, हिंदू संत और मठों के मालिक सक्रिय हैं। कांग्रेस नेता और पूर्व सदस्य हरीश रावत ने कहा कि जोशीमठ के नाम से एक नए शहर बसाने के अलावा कोई विकल्प नहीं है। उन्होंने पनबिजली प्रोजेक्ट और ऑल वेदर रोड के चल रहे सभी काम को रोकने की मांग की।
जोशीमठ बड़ा पर्यटन स्थल है और उससे भी ज्यादा धार्मिक आस्था का केंद्र है। रामायण में जिस द्रोण पर्वत से संजीवनी बूटी का जिक्र है वह द्रोण पर्वत जोशीमठ में ही है। चार धामों की स्थापना करने वाले आदि शंकराचार्य ने जोशीमठ में ही तपस्या की थी। उन्होंने यहां एक मठ भी स्थापित किया था। जोशीमठ में ही नरसिंह का मंदिर है। थोड़ी ही देर में जब बद्रीनाथ का धाम बंद हो जाता है तो भगवान बद्री विशाल को व्यवस्थित किया जाता है। इस समय बद्री विशाल जोशीमठ में ही निवास कर रहे हैं इसलिए लोग भगवान बद्रीविशाल से प्रार्थना कर रहे हैं।
हालांकि, जो स्थिति उन लोगों को जोशीमठ से सुरक्षित बाहर निकालना ही एकमात्र उपाय है। हालांकि लोग आसानी से अपना घर-बार ज्वाइन करने के लिए तैयार नहीं हैं। वे विरोध कर रहे हैं। उनकी समझ जा सकती है क्योंकि जहां अटक से रह रहे हों, जो घर की छत पर रोक लगाई जाए, उसे छोड़ सरकार छत के नीचे रहने को मजबूर हो जाए तो कोई भी विरोध करेगा। लेकिन जोशीमठ के लोग भी खतरों को देख रहे हैं, समझ रहे हैं, इसलिए वे मान जाएंगे।
जहां तक सियासत का सवाल है तो ये वक्त के आरोप-प्रत्यारोप की राजनीति का नहीं हैं। क्योंकि अगर इस नींद से इस तरह की चीजें होंगी तो फिर नई चीजें भी सामने आएंगी। जोशीमठ में पहली बार दरारें 1970 में दिखाई दी थीं। उसके बाद 1976 में वी. सी. मिश्रा समिति की रिपोर्ट भी आई थी। लेकिन उस रिपोर्ट पर ध्यान नहीं दिया गया। इसलिए मैंने कहा कि आरोप-प्रत्यारोप का वक्त नहीं है। इस वक्त सभी राजनीतिक दलों और नागरिक समाज को मिलाकर जोशीमठ के लोगों की मदद के लिए प्रयास करना चाहिए। (रजत शर्मा)
देखें: ‘आज की बात, रजत शर्मा के साथ’ 09 जनवरी, 2023 का पूरा एपिसोड



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